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06 जुलाई 2010

सोने और हीरे की चमक के आगे महंगाई फीकी

सोने और हीरे की बढ़ती कीमतों के बावजूद इनके प्रति ग्राहकों की दिलचस्पी पर कोई असर नहीं पड़ा है। बीती चार तिमाहियों में सूचीबद्ध डायमंड और गोल्ड जूलरी कंपनियों की बिक्री से पता चलता है कि लोगों ने कीमती धातुओं और हीरों की खरीदारी की अपनी रफ्तार बढ़ा दी है। शेयर बाजार ने भी इस चलन पर सकारात्मक रुख दिखाया है और इस दौरान इन कंपनियों के शेयरों के दाम निरंतर चढ़ते रहे। शीर्ष आठ डायमंड और गोल्ड जूलरी कंपनियों ने 31 मार्च 2010 को खत्म तिमाही में 10,431 करोड़ रुपए का संयुक्त टर्नओवर दर्ज कराया, जबकि बीती तीन तिमाहियों में यह क्रमश: 8,551 करोड़ रुपए, 7,964 करोड़ रुपए और 6,832 करोड़ रुपए था। कंपनियों की इस सूची में राजेश एक्सपोर्ट्स, गीतांजलि जेम्स, सूरज डायमंड्स, श्रेनुज एंड कंपनी, एशियन स्टार कंपनी, सुआशीष डायमंड, फ्लॉलेस डायमंड और क्लासिक डायमंड्स शामिल हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने कंसॉलिडेटेड नतीजों का एलान किया है, लेकिन ईटी ने उन कंपनियों के स्टैंडअलोन आंकड़ों पर भी गौर किया, जिन्होंने ऐसा नहीं किया है। उनका संयुक्त लाभ 144 करोड़ रुपए से बढ़कर क्रमश: 231 करोड़ रुपए, 121 करोड़ रुपए से बढ़कर 146 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। साल दर साल आधार पर तुलना करें तो साफ होता है कि 31 मार्च 2009 को खत्म तिमाही के आंकड़ों के मुकाबले भारी सुधार हुआ है। 31 मार्च, 09 तिमाही में कंपनियों ने 7,986 करोड़ रुपए की बिक्री दर्ज की और 10 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया। विश्लेषकों ने इंक्रीमेंटल बिक्री का श्रेय रईसों, उच्च-मध्य आय वर्ग और मझोले वर्ग की खर्च करने लायक आमदनी में इजाफे को दिया, जिसकी पुष्ट हेविट के अध्ययन में भी हुई है। अध्ययन में कहा गया है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में साल 2009 में तनख्वाह में सबसे ज्यादा इजाफा भारत में हुआ, जहां वेतनमान औसतन 6.3 फीसदी बढ़ा। इस सूची में इंडोनेशिया दूसरे पायदान पर है, जहां औसत इजाफा 6 फीसदी, चीन में 4.5 फीसदी और फिलीपींस में 4.3 फीसदी है। अप्रैल 2009 से मार्च 2010 के बीच डॉलर आधार पर सोना 23 फीसदी उछलकर 1,113 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, लेकिन इसके बावजूद जूलरी कंपनियों की बिक्री में उछाल थमा नहीं है। भारत सोने का सबसे बड़ा ग्राहक और आयातक है, ऐसे में विदेशी बाजार में दामों में बढ़ोतरी होने का असर स्थानीय कीमतों पर भी दिखना स्वाभाविक है, हालांकि करेंसी के खेल की वजह से यह हमेशा उसी अनुपात में नहीं होता। अब डेल्टा ग्लोबल पार्टनर्स नामक रिसर्च फर्म चलाने वाले क्वांटम म्यूचुअल फंड के पूर्व सीईओ और सीआईओ देवेंद्र नेवगी कहा कि क्रय शक्ति में कमी आने की वजह से लोग सोने जैसी संपत्ति को अपने कब्जे में रखना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा, 'भारत में, खास तौर से ग्रामीण इलाकों में बीते एक साल से आमदनी काफी बढ़ रही है, जिसका श्रेय जमीन की कीमतें बढ़ने और चावल तथा गेहूं जैसी कृषि कमोडिटी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा होने को दिया जा सकता है। युवाओं की एक नई पीढ़ी भी सामने आई है, जिसका मानना है कि अनिश्चित वक्त के लिए सोने और हीरों जैसे संपत्ति को अपने पास रखने में काफी फायदा होता है। ऐसा साल 2008 के दौरान आए वैश्विक आर्थिक संकट के वक्त भी देखने को मिला था, जब रुपए में सोने के दाम 27 फीसदी तक उछल गए थे, जबकि सेंसेक्स में 52 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।' पॉलिश्ड डायमंड की कीमतों के दुनिया के प्रमुख स्त्रोत रैपापोर्ट की इंडिया हेड पूजा कोटवानी ने कहा कि अतिरिक्त पैसा जूलरी में निवेश करना, भारतीयों की स्वाभाविक प्रकृति है। (इ टी हिंदी)

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