08 अक्टूबर 2008
कमोडिटी बाजार में भी पहुंची मंदी की छाया
मुंबई : अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट का हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। दुनिया की सरकारों के तमाम कदमों के बावजूद निवेशकों की चिंता दूर नहीं हो रही है। कमोडिटी मार्केट तक पर इस संकट का बुरा असर पड़ा है। एक वक्त इस बाजार को इस उठापटक से सुरक्षित समझा जा रहा था। कमोडिटी बाजार के निवेशक घबराहट में बाजार से अपनी रकम निकाल रहे हैं, जिसके चलते हर तरफ कीमतें गिर रही हैं। ब्रोकरों को लगता है कि हालात और भी खराब हो सकती है। मांग में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी होने पर ही कीमतें संभल सकती हैं। बाजार को कुछ मदद भी मिली है। रुपए में तेज गिरावट ने कमोडिटी के दामों को कुछ हद तक गिरने से रोका है। उसके बावजूद कुछ ब्रोकरों को लगता है कि बाजार में अस्थिरता की वजह से बिकवाली बढ़ने की होड़ से मार्जिन कॉल बढ़ी है। रेलिगेयर कमोडिटीज के प्रमुख जयंत मांगलिक ने कहा कि इस समय बाजार में मंदी चल रही है। लोग अपनी रकम वापस निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक निवेशकों की ओर से मांग नहीं आती है, तब तक बाजार में मंदी रहेगी। पिछले सप्ताह कीमती धातुओं, बेस मेटल, कच्चे तेल और तमाम कृषि कमोडिटी के भाव 1 दिन में 4 फीसदी गिरे हैं। यह गिरावट एक्सचेंजों के ट्रेडिंग अस्थायी तौर पर रोक देने के लिए तय की गई औसत सीमा के बराबर है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में मंदी की वजह यूरो के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने को माना जा रहा है। डॉलर की मजबूती से कमोडिटी के दाम पूरी दुनिया में गिरे हैं। कच्चे तेल में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। यह पिछले पखवाड़े में 26 फीसदी से ज्यादा गिरकर 89 डॉलर प्रति बैरल के वर्तमान भाव पर पहुंच गया है। तांबा भी लगभग 24 फीसदी गिरा है। सोने में 9 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। कॉमटेंड्ज रिस्क मैनेजमेंट के निदेशक टी. ज्ञानशेखर ने बताया कि इस समय बाजार में नकदी की कमी है, लेकिन हर निवेशक नकदी चाह रहा है। इस समय बाजार में हर कमोडिटी में वायदा सौदों की बिकवाली हो रही है। इस वजह कीमतें नीचे जा रही हैं। रिस्क कम करने के लिए ज्यादातर ब्रोकरेज तय से ज्यादा मार्जिन वसूलते हैं, जिससे उनके ग्राहक सट्टेबाजी में न फंसें। कोटक कमोडिटीज के प्रमुख दिलीप भाटिया ने बताया कि उनके ब्रोकरेज को अभी तक मार्जिन कॉल (मार्जिन की मांग) के मामलों का सामना नहीं करना पड़ा है। इसकी वजह ये कि वे अपने ग्राहकों की गतिविधियों पर काफी ध्यान देते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ब्रोकर को मार्जिन कॉल की दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।( ET Hindi)
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