08 अक्टूबर 2008
करेंसी कारोबार के जरिए बेहतर रिटर्न
मुंबई : बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और बढ़े मार्जिन की वजह से कमोडिटी ऑर्बिट्राज (दो बाजारों में एक ही माल के भाव में अंतर का फायदा उठाना) का फायदा उठाने वाले और सटोरिए करेंसी कारोबार के जरिए बेहतर रिटर्न हासिल कर रहे हैं। मजबूत बैलेंस शीट की कमी और सौदों का आकार बड़ा होने के कारण इनमें से ज्यादातर सटोरियों की पहुंच ओवर द काउंटर मार्केट(ओटीसी) तक नहीं होती है, इसलिए यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में करेंसी वायदा कॉन्ट्रैक्ट और डॉलर-रुपए बाजार में नॉन डिलीवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) के अंतर का फायदा उठाते हैं। इस बारे में ब्रोकर्स का कहना है कि ओवर द काउंटर मार्केट में सोमवार को एक महीने के रुपए-डॉलर फारवर्ड और हाजिर रुपए के मूल्य में 8 पैसे का अंतर था। एनडीएफ का नवंबर कॉन्ट्रैक्ट, एनसीई के नवंबर रुपया-डॉलर कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले सोमवार को 27 पैसे प्रीमियम पर कारोबार कर रहा था। ब्रोकर्स ने बताया कि सटोरियों ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में नवंबर कॉन्ट्रैक्ट की खरीदारी की और उसे एनडीएफ के एक महीने के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट में बेच दिया। ठीक इसी तरह जब एनडीएफ के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट प्रीमियम में गिरावट आती है, तो सटोरिए एनएसई के कॉन्ट्रैक्ट में इसकी बिकवाली करते हैं। एनडीएफ में सौदे का आकार कम से कम 1,00,000 डॉलर का होता है, जबकि एनसीई में कोई भी व्यक्ति 100 रुपए-डॉलर कॉन्ट्रैक्ट की खरीदारी कर सकता है। कारोबार से जुड़े ब्रोकर का कहना है कि एनसीई के करेंसी वायदा कारोबार और एनडीएफ के बीच 27 पैसे के अंतर में ब्रोकरेज की हिस्सेदारी 5 पैसे होती है। इस हिसाब से 1,00,000 डॉलर की खरीद से करीब 22,000 रुपए का फायदा होता है। जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सोने और कच्चे तेल के मार्जिन और अस्थिरता दोनों में इजाफा हुआ है। इससे इन दोनों कमोडिटी से बेहतर रिटर्न हासिल करना निवेशकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। (ET Hindi)
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें