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08 अक्टूबर 2008

कमोडिटी ब्रोकिंग में 100% एफडीआई को मिलेगी मंजूरी

नई दिल्ली : सरकार जल्द ही कमोडिटी ब्रोकिंग में 100 फीसदी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की मंजूरी दे सकती है। प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, आरबीआई की राय का अभी इंतजार किया जा रहा है। उसकी राय पर विचार किए जाने के बाद ही इस बारे में अंतिम फैसला हो पाएगा। इस वक्त 'वित्तीय सेवा यानी ' फाइनेंशियल सर्विसेज ' वर्ग की केवल 12 सेवाओं में ही एफडीआई की इजाजत है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाने के बाद कमोडिटी ब्रोकिंग भी लिस्ट में शामिल हो जाएगी। कैबिनेट इस साल पहले ही कमोडिटी एक्सचेंज में 26 फीसदी तक एफडीआई की इजाजत दे चुका है। इसके साथ ही यह शर्त भी थी कि कोई एक निवेशक 5 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी एक्सचेंज में नहीं लेगा। उस समय डीआईपीपी का प्रेस नोट 8 कमोडिटी ब्रोकिंग में एफडीआई के सवाल पर चुप था। इसी प्रेस नोट के जरिए कमोडिटी एक्सचेंज में एफडीआई की इजाजत दी गई थी। डीआईपीपी के एक अधिकारी ने ईटी को बताया कि कमोडिटी ब्रोकिंग को वित्तीय सेवाओं की उस लिस्ट में डालने का प्रस्ताव है, जिसमें एफडीआई की इजाजत है। इस सूत्र ने बताया कि पिछले साल से फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड के पास भारतीय ब्रोकिंग कंपनियों में विदेशी निवेश के लिए तमाम एप्लिकेशन पड़ी हुई हैं। अगर सरकार इस प्रस्ताव को अनुमति दे देती है, तो बड़ी विदेशी ब्रोकरेज कंपनियों को देश में कारोबार शुरू करने को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय कमोडिटी बिजनेस का भी विकास होगा। रेलिगेयर कमोडिटीज के जयंत मांगलिक ने कहा कि यह भारत में कमोडिटी ब्रोकिंग बिजनेस में विदेशी संस्थागत निवेशकों को इजाजत देने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि एफडीआई आने के बाद एफआईआई के लिए भी नीति तैयार होगी। (ET Hindi)

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