08 अक्टूबर 2008
कीमतें गिरीं, हाजिर बाजार में खलबली
नई दिल्ली : नकदी की कमी का डर कमोडिटी बाजार पर भी असर दिखा रहा है। मंगलवार को कमोडिटी हाजिर बाजार में जमकर बिकवाली हुई। नकदी की कमी का सामना कर रहे कमोडिटी कारोबारियों ने भी स्टॉक की बिकवाली की। हालांकि, बाजार में खरीदारों की कमी के चलते उन्हें नुकसान ही उठाना पड़ा। इसके बावजूद कारोबारी बिकवाली करके राहत महसूस कर रहे हैं। उनका मानना है कि भले ही नुकसान का सौदा हुआ, लेकिन हाथ में कुछ नकदी तो आई। पिछले पखवाड़े में सिर्फ खाद्य तेल इंडस्ट्री ने ही 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा का नुकसान उठाया है। दाल का आयात करने वाली कंपनियों को हर शिपमेंट पर 24 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। मसाले और अनाज का कारोबार करने वालों को भी घाटा हो रहा है। गेहूं की कीमत अप्रैल में 10 रुपए किलो थी, लेकिन अब यह इससे नीचे चली गई है। कारोबारियों को आशंका है कि आने वाले दिनों में गेहूं की कीमत और गिरेगी। इसलिए वह इसकी भी बिकवाली कर रहे हैं। बाजार में मची इस खलबली की दो वजहें हैं। पहली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी की कीमतें इतनी गिर चुकी हैं कि भारतीय कारोबारियों की हिम्मत जवाब दे रही है। खाद्य तेल और दालों जैसी कमोडिटी की कीमत भारत पहुंचे-पहुंचते बहुत गिर जाती हैं। इस वजह से कंपनियों को न तो खरीदार मिल पा रहे हैं और न ही वे पहले के कॉन्ट्रैक्ट को पूरा कर पा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार की मंदी की वजह से कॉटन, कॉफी और मसाले के निर्यात की लागत भी नहीं निकल पा रही है। अंतरराष्ट्रीय माल भाड़ा दर में तेज गिरावट ने भी भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुंचाया है। गुजरात की एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि माल भाड़े में कमी आने की वजह से अर्जेंटीना की सोयामील 50 डॉलर प्रति टन सस्ती पड़ रही है। उन्होंने पूछा कि ऐसे में भारतीय सोयामील को कौन खरीदेगा? लैटिन अमेरिका से दक्षिण पूर्वी एशिया का माल भाड़ा केवल 60 डॉलर प्रति टन है। ऐसे में जब अर्जेंटीना के निर्यातकों ने इस सप्ताह अपनी कीमतों में कटौती की, तो भारतीय निर्यातकों के पास एक ही चारा था कि या तो वे भी अपनी कीमत घटाएं या फिर घर बैठें। दोनों ही सूरत में सोया कारोबारियों को नुकसान है। इसी तरह भारतीय कॉटन भी दुनिया की सबसे महंगी कॉटन में से है, जिस वजह से कारोबारी नए निर्यात करार नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी वजह उधार की कमी है। फिजिकल कमोडिटी को रोक कर रखने के लिए काफी कामकाजी पूंजी लगानी पड़ती है। इस वक्त बाजार में नकदी की कमी है। शेयर बाजार में नुकसान उठाने वाले कारोबारियों को तो नकदी की और भी बड़ी जरूरत है। उधर बैंक भी इस समय कमोडिटी कारोबार के लिए उधार देने के खिलाफ हैं। उन्हें भी कमोडिटी की गिरती कीमतें दिख रही हैं। मुंबई की एक कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ महीने पहले तक कंपनियों को लाइबोर से एक फीसदी ज्यादा दर पर उधार मिल रहा था। इस समय वे लाइबोर से आठ फीसदी ज्यादा ब्याज चुकाने को तैयार हैं, फिर भी बैंक कर्ज देने में हिचक रहे हैं। एक बड़ी एमएनसी के मुख्य वित्त अधिकारी ने बताया कि बैंक 19 फीसदी ब्याज दर मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतना ब्याज अदा करना मुश्किल हैं। इस अधिकारी ने कहा कि इस समय के कारोबारी माहौल में उनकी जैसी बड़ी कंपनी को भी कारोबार करने में मुश्किल आ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आरबीआई के हस्तक्षेप से हालत सुधरेगी। (ET Hindi)
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