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20 जून 2009

मानसून में देरी का असर धान की बुआई पर

लखनऊ June 19, 2009
मानसून आने में हो रही देरी का सीधा असर उत्तर प्रदेश में धान की फसल पर पड़ रहा है।
जून का तीसरा पखवाड़ा शुरु हो चुका है पर सूबे में अभी तक धान की 10 फीसदी नर्सरी भी नही लगाई जा सकी है। मानसून की हीला-हवाली को देखते हुए माना जा रहा है कि अब नर्सरी का काम जुलाई के प्रथम सप्ताह से पहले पूरा होने वाला नहीं है।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक बंगाल की खाड़ी से मानसून की आमद से संकेत नही मिले हैं जिसके चलते माना जा रहा है कि कम से कम 10 दिनों की देरी से बारिश की शुरुआत हो सकेगी। हालांकि मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है बीते सात सालों की तरह इस साल भी मानसून सामान्य रहने के आसार हैं।
मौसम विभाग ने अपनी ओर से मानसून के एक सप्ताह पिछड़ने की भी भविष्यवाणी कर दी है पर कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसमें कम से कम 10 दिन की देरी हो सकती है। राज्य कृषि विविधीकरण परियोजना के अधिकारी सुशील कुमार सिंह का कहना है कि मानसून में होने वाली देरी के चलते धान की अगैती किस्मों की बुआई का काम पिछड़ेगा ऐसे में किसानों को ज्यादातर पिछैती के बीजों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
सिंह के मुताबिक अवध क्षेत्र में गेहूं के कटने के बाद बोई जाने वाली उड़द की फसल में भी देर हो रही है। उनका कहना है कि मानसून अगर जुलाई तक आता है तो किसानों को उड़द का मोह छोड़कर सीधे धान पर आना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि फार्मों को प्रभारी रह चुके बीबी सिंह का कहना है कि बारिश के समय पर न होने से धान ही नही बाकी की दलहन फसलों को नुकसान हो रहा है।
सूबे में बिजली की जबरदस्त कटौती को देखते हुए किसानों के लिए नलकूप से भी सिंचाई कर पाना संभव नही हो पा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के सचिव हरिनाम सिंह का कहना है कि बारिश न होने की दशा में सरकार को नहरों में पानी छोड़कर सिंचाई का अवसर देना चाहिए पर इस समय किसी भी नहर में सींच सकने लायक पानी नही है।
...कब खत्म होगा इंतजार?
बारिश के अभाव में उत्तर प्रदेश में अब तक धान की 10 फीसदी नर्सरी भी नहीं लगाई जा सकी हैबारिश समय पर न होने से धान के अलावा दलहन फसलों को भी हो रहा है नुकसान (BS Hindi)

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