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07 अक्टूबर 2008

हड़ताली मूंगफली कारोबारी प्रधानमंत्री से आज मिलेंगे

मूंगफली के निर्यात पर लगी रोक के विरोध स्वरूप व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को प्रधानमंत्री से मिलकर निर्यात पर लगी रोक हटाने की मांग करेगा। केंद्र सरकार ने फरवरी 2008 में मूंगफली तेल व गिरी के निर्यात पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। निर्यात न होने से उत्पादक मंडियों में मूंगफली के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे आ गए जिसकी कारण किसानों व व्यापारियों ने पहली अक्टूबर से राज्य की लगभग मंडियों में अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी। मैसर्स राजमोती इंडस्ट्रीज के चेयरमैन समीर भाई शाह ने बिजनेस भास्कर को बताया कि व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना होगा तथा इनका कार्यक्रम प्रधानमंत्री से मिलने का है। प्रधानमंत्री के अलावा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ से भी इनकी मिलने की योजना है। उन्होंने बताया कि राज्य की लगभग सभी बड़ी मंडियों में अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। हड़ताल से पहले 30 सितंबर को मंडियों में मूंगफली के भाव घटकर नीचे में 1700 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए थे जबकि मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य चालू फसल सीजन के लिए 2100 रुपये प्रति क्विंटल है। अत: विरोध स्वरूप किसानों ने माल बेचने से इंकार कर दिया था जिसके कारण एक अक्टूबर से व्यापारियों को अनिश्चितकालीन हड़ताल का सहारा लेना पड़ा है।मूंगफली तेल व गिरी के निर्यात पर लगा प्रतिबंध अगर नहीं हटाया जाता है तो फिर मूंगफली के भाव घटकर समर्थन मूल्य से नीचे जा सकते है जिससे किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ेगा। इस साल अनुकूल मौसम से राज्य में मूंगफली के उत्पादन में करीब 4 से 5 लाख टन की बढ़ोतरी होकर कुल उत्पादन 21 से 22 लाख टन होने के आसार हैं। व्यापारियों के अनुसार पूर देश में चालू खरीफ सीजन में मूंगफली का उत्पादन 51 से 52 लाख टन होने की संभावना है। (Business Bhaskar)

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