06 अक्टूबर 2008
सौराष्ट्र में मूंगफली मिलों पर टूटी आफत
राजकोट : सौराष्ट्र का मूंगफली उद्योग खस्ताहाल हो गया है। मूंगफली नहीं मिलने की वजह से यहां बड़ी संख्या में तेल मिलें बंद हैं। आने वाले वक्त में यहां की कुछ और मिलें बंद हो सकती हैं। सौराष्ट्र ऑयल मिलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट उकाभाई पटेल ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया, 'महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद सरकार ने मार्च 2008 से मूंगफली के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस कारण सीजन की शुरुआत में जहां मूंगफली की कीमतें 600 रुपए प्रति किलोग्राम थी अब वह गिरकर 450 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ चुकी हैं। अब किसान बेहतर कीमतों की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वे चाहते हैं कि निर्यात से प्रतिबंध को हटाया जाए। बाजार में आवक न होने के कारण मिलों के पास पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल नहीं है।' मूंगफली के तेल की कुल खपत 5.5 लाख टन है जबकि उत्पादन करीब 12 लाख टन है। पटेल का कहना है कि ऐसी स्थिति में अगर निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया जाए तो कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी। पिछले साल कुल उत्पादन 15 लाख टन रहा था, जबकि इस बार उत्पादन 16 लाख टन रहने का अनुमान है। पटेल का कहना है कि केंद्र से निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने का अनुरोध किया गया है, लेकिन जब तक इस पर कोई निर्णय आता है तेल मिलें बंद रहेंगी। उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत में खाद्य तेल का कुल सालाना उपभोग करीब 1.10 करोड़ टन है और इसमें मूंगफली तेल की हिस्सेदारी मात्र पांच फीसदी है। केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में सौराष्ट्र में करीब 58 मंडियों ने अनिश्चित काल के लिए बंदी की घोषणा की है। एक औद्योगिक विश्लेषक का कहना है कि आमतौर पर सितंबर से शुरू होने वाले सीजन में प्रतिदिन 1 लाख से अधिक बैग की आवक होती है और त्योहारी सीजन होने के कारण मांग को देखते हुए मिलें भी इस दौरान ज्यादा उत्पादन करती है। एक बैग 100 किलोग्राम का होता है। सूत्रों का कहना है कि हाल के समय तक सौराष्ट्र की मंडियों में प्रतिदिन 50,000-60,000 बैग की आवक हो रही थी, लेकिन कीमतों में लगातार आ रही नरमी को देखते हुए किसानों ने मंडी में फसल लाना बंद कर दिया है। (ET Hindi)
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें