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10 फ़रवरी 2009

गन्ने को लेकर प्राइस वार

सोने के अंडे में बदलती दिख रही चीनी के लालच में देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों के बीच गन्ना हासिल करने के लिए प्राइस वार छिड़ गई है। राज्य की अधिकांश निजी मिलों ने 7 फरवरी से गन्ने के खरीद मूल्य में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर दी है। इससे पहले भी कुछ मिलों ने 10 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी की थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बढ़ोतरी राज्य सरकार द्वारा चालू पेराई सीजन (2008-09) के लिए निर्धारित उस राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) के ऊपर है जिसके खिलाफ चीनी मिलें इलाहाबाद हाई कोर्ट चली गई थीं। इस घटनाक्रम के चलते राज्य के गन्ना किसानों को 140 और 145 रुपये प्रति क्विंटल के एसएपी के मुकाबले 155 और 160 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत मिल रही है।गन्ने के क्षेत्रफल में आई भारी गिरावट के चलते अब चीनी मिलें किसानों को सस्ते कर्ज और दूसरी सुविधाएं देने की बात भी करने लगी हैं। वहीं, केंद्र सरकार को भी गन्ने के न्यूनतम वैधानिक मूल्य (एसएमपी) के लिए की गई 125 रुपये प्रति क्विंटल की सिफारिश व्यावहारिक लगने लगी है। यह सिफारिश कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) के पूर्व चेयरमैन डॉ. टी. हक ने मार्च 2008 के पहले की थी। सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय भी अब इसे 115 और 125 रुपये प्रति क्विंटल के बीच कहीं तय करने का मूड बना रहा है। उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य को लेकर पिछले तीन साल से जारी अनिश्चितता के चलते गन्ना क्षेत्रफल में काफी गिरावट दर्ज की गई जिसके चलते मिलों के बीच यह मारामारी मची हुई है। अधिक कीमत देने के बावजूद राज्य में करीब 35 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, जबकि फरवरी माह में ही राज्य की अधिकांश चीनी मिलें बंद हो जाएंगी।उद्योग सूत्रों के मुताबिक गन्ने की कमी के चलते जहां पहले राज्य चीनी निगम और सहकारी फेडरेशन की चीनी मिलें बंद होना शुरू हरुई, वहीं निजी क्षेत्र की दर्जन भर से अधिक मिलें बंद हो गई हैं। बंद होने वाली निजी चीनी मिलों में जहां बजाज हिन्दुस्थान समूह की मकसूदापुर और रदौली चीनी मिलें शामिल हैं, वहीं बलरामपुर चीनी समूह की भी हैदरगढ़, रोजागांव और अकबरपुर मिल बंद हो चुकी हैं। इस समय राज्य की एक भी चीनी मिल पूरी क्षमता पर नहीं चल रही है। हालांकि, गन्ने की अधिक कीमत के बावजूद मिलों को अच्छा-खासा मुनाफा हो रहा है। इस समय चीनी का एक्स फैक्टरी मूल्य 2150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि चालू सीजन के शुरू में यह 1700 रुपये प्रति क्विंटल था।उत्पादन घटने की आशंका में दिसंबर में 225 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा शीरा अब 400 रुपये प्रति क्ंिवटल पर पहुंच गया है और बगास (खोई) 180 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई है। इसी तरह की हालत पड़ोसी राज्य हरियाणा की है जहां अधिकांश चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं और 165 व 170 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत के बावजूद राज्य की सबसे बड़ी चीनी मिल सरस्वती शुगर मिल एक-तिहाई क्षमता पर ही चल रही है। जबकि इसे काफी गन्ना उत्तर प्रदेश से मिल रहा है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक इस हालत के चलते उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन घटकर 40 लाख टन पर आ जाने के आसार हैं जबकि दूसरे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में भी चीनी का उत्पादन 43 लाख टन के आसपास रहने की संभावना है।ऐसी स्थिति में देश में चीनी का कुल उत्पादन पिछले साल के 263 लाख टन के मुकाबले घटकर 160 लाख टन से भी कम रह जाने की आशंका है। ऐसे में चीनी की खुदरा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी बनी रहेगी और उसके 30 रुपये किलो तक पहुंचने की संभावना है। (Business Bhaskar)

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