कुल पेज दृश्य

07 फ़रवरी 2009

मांग बढ़ने से जीरा वायदा में तेजी

वायदा बाजार में जारे में तेजी का रुख बना रह सकता है क्योंकि हाजिर बाजार में जीरे में घरेलू और निर्यातकों की मांग अच्छी होने से भावों में तेजी देखी जा रही है। हाजिर भावों में आई तेजी का असर वायदा बाजार पर भी पड़ रहा है। बाजार पर हालांकि उत्पादक मंडियों में नई फसल की आवक शुरू हो गई है लेकिन आवक के मुकाबले मांग ज्यादा होने से तेजी को बल मिल रहा है। बुवाई के समय उत्पादक क्षेत्रों में मौसम प्रतिकूल होने और बाद में ओस पड़ने से गुजरात में जीरा के उत्पादन में 15 से 20 फीसदी की कमी आने की आशंका है। वैसे भी चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में देश से जीरा निर्यात में 51 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आवकों का दबाव बनने तक भावों में तेजी का रुख कायम रहने की संभावना है।मंडियों में आवकऊंझा मंडी के जीरा व्यापारी पंकट भाई पटेल ने बताया कि जीरे की नई फसल की आवक 3000 बोरी (एक बोरी 55 किलो) की हो रही है जबकि मांग करीब छह से सात हजार बोरी की चल रही हैं। भाव में चल रही तेजी को देखते हुए स्टॉकिस्टों की बिकवाली भी कम आ रही है। घरेलू के साथ-साथ इस समय निर्यातकों की अच्छी मांग देखने को मिल रही है। ऊंझा मंडी में जीरे के भाव एनसीडीईएक्स क्वालिटी के 2150 से 2200 रुपये प्रति 20 किलो और एवरेज क्वालिटी के 2000 रुपये प्रति 20 किलो चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि चालू महीने के मध्य तक ऊंझा मंडी में तो आवक बढ़ेगी ही, साथ ही मार्च के शुरू में राजस्थान में भी नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी। आवक बढ़ने के बाद भावों में आंशिक गिरावट तो आ सकती है लेकिन भारी गिरावट के आसार नहीं है।उत्पादन और बकाया स्टॉकजीरा व्यापारी कुनाल शाह ने बताया कि ऊंझा मंडी में नई फसल की आवक शुरू हो गई है। लेकिन गुजरात के राजकोट, सुरेंद्रनगर, जामनगर, जूनागढ़, भावनगर, पोरबंदर और कच्छ आदि क्षेत्रों में बुवाई के समय मौसम प्रतिकूल होने और पकाई के समय लगातार कई दिनों तक ओस पड़ने से नई फसल के उत्पादन में 15 से 20 फीसदी की कमी आने की आशंका है। पिछले वर्ष देश में जीरा का उत्पादन 25 लाख बोरी का हुआ था। उत्पादक मंडियों में इस समय बकाया स्टॉक भी पिछले साल के 12-13 लाख बोरी के मुकाबले पांच से साढ़े पाच लाख बोरी का ही बचा हुआ है। ऐसे में बकाया स्टॉक कम होने से भी इसकी तेजी को बल मिल रहा है।निर्यात में बढ़ोतरीभारतीय मसला बोर्ड के सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर तक देश से जीरा निर्यात में 51 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान देश से जीरे का निर्यात पिछले वर्ष के 18,855 टन से बढ़कर 28,500 टन का हो गया। टर्की और सिरिया में उत्पादन में कमी के कारण भारत से निर्यात में बढ़ोतरी आई है। टर्की और सिरिया में नई फलस की आवक जून-जुलाई महीने में बनेगी। ऐसे में भारतीय भारतीय जीरे में निर्यात मांग बराबर बनी रहने की संभावना है।वायदा बाजार में भाव तेजनेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स) में मार्च महीने के जीरा वायदा के भाव में दिसंबर के मुकाबले करीब 2,000 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आकर भाव 12,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं मार्च महीने के वायदा में करीब 7803 लोट के सौदे खड़े हुए हैं। हाजिर बाजार की तेजी को देखते वायदा बाजार में भी तेजी के ही आसार हैं। (Businss Bhaskar....R S Rana)

कोई टिप्पणी नहीं: