07 फ़रवरी 2009
मांग में कमी से कपास निर्यात में कमी की आशंका
मुंबई: देश के कपास निर्यात में गिरावट आने की आशंका है। ग्लोबल मांग में आई कमी और कॉटन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने से कपास का निर्यात पहले के अनुमान से कम रह सकता है। चीन, तुर्की, पेरू और मिस्र ने कपास आयात कम करने का फैसला किया है। इसकी मार भारतीय निर्यातकों पर पड़ रही है। इस साल 31 जनवरी तक केवल 9.5 लाख कपास की गांठों के निर्यात के ऑर्डर मिल सके हैं। इनमें से भी केवल 5.3 लाख गांठों का निर्यात 31 जनवरी तक हो सका है। साल 2008-09 के कॉटन साल (अक्टूबर से सितंबर) के लिए सरकार का इसकी 75 लाख गांठों के निर्यात का अनुमान है। कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (टेक्सप्रोसिल) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सिद्धार्थ राजगोपाल कहते हैं कि आर्थिक संकट के बढ़ने के साथ ही भारत के कपास और सूती धागों के आयातक तमाम देशों ने घरेलू कारोबार को बचाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट्स को कम कर दिया है। साल 2008 में चीन की कुल कपास खरीद में भारत की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी थी। इस साल चीन से मिलने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या में कमी आई है। साथ ही, ऊंची कीमतों के चलते चीन भारत से कम कपास खरीद रहा है। कॉटन एसोसिएशन के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक, खराब क्वालिटी और ऊंची एमएसपी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपास को खरीदार मिलने में दिक्कत हो रही है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट धीरेन एन शेठ कहते हैं कि देश से मौजूदा कपास वर्ष में अधिकतम 50 से 55 लाख गांठों के निर्यात की उम्मीद है। वह कहते हैं, 'भारतीय कपास की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। ऐसे में 75 लाख गांठों के निर्यात को अनुमान को हासिल करना मुश्किल लग रहा है। हम ज्यादा से ज्यादा 50 से 55 लाख गांठें ही निर्यात कर पाएंगे।' हाल ही में तुर्की, मिस्र और पेरू जैसे देशों ने अपने यहां कपास आयात को कम करने के उपाय किए हैं। मिस्र ने तो सूती धागे, मिक्स्ड धागे, सूती कपड़े और मिक्स्ड कपड़े के आयात को भी रोकने के कदम उठाए हैं। राजगोपाल कहते हैं कि इन देशों ने आयात रोकने के लिए आयात फीस को बढ़ाकर सीआईएफ की वैल्यू का 25 फीसदी कर दिया है। साथ ही यह फीस 0.5 सेंट प्रति किलो से कम भी नहीं हो सकती है। पेरू के कुल कपास खरीद में भारत की हिस्सेदारी करीब पांच फीसदी की है। वहीं, तुर्की भी भारत से बड़े पैमाने पर कपास की खरीदारी करता है। भारत-पाकिस्तान के बीच कपास कारोबार की हालत भी बुरी है। ऐसे में बांग्लादेश अकेला ऐसा देश है, जिसने भारत से ज्यादा कपास की खरीदारी की है। (BS Hindi)
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