11 फ़रवरी 2009
महंगे कपास से टैक्सटाइल को राहत मिलने की उम्मीद
टैक्सटाइल सेक्टर को महंगे कपास से राहत मिलने की उम्मीद बंध गई है। उसे आशा है कि सस्ते दामों पर कपास बेचने पर सरकारी एजेंसियों को होने वाले घाटे की भरपाई के लिए सब्सिडी देने के सरकार के फैसले से कपास के दामों में गिरावट आएगी। हालांकि बाजार में मूल्य गिरावट कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडियी (सीसीआई) और दूसरी एजेंसियों के बिक्री मूल्य और मात्रा पर निर्भर होगी।कं फ डरशन ऑफ इंडिया टेक्सटाइल इंडस्ट्रीस के महासचिव डी. के. नायर के मुताबिक इतना तय है कि कीमतों में गिरावट आएगी। लेकिन यह काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करगा कि सरकारी एजेंसियां कितना कपास किस भाव पर बेचती हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में घरलू बाजारों में कॉटन की कीमतें वैश्विक बाजारों की तुलना में काफी तेज हैं। जिसका असर घरलू कॉटन निर्यात पर भी देखा जा रहा है। ऐसे में सरकार यदि सस्ते दरों पर कॉटन की बिक्री करती है तो कीमतों में गिरावट तय है। चालू सीजन के लिए केंद्र सरकार ने कॉटन के एमएसपी में तगड़ा इजाफा किया था। जबकि मंदी की वजह से वैश्विक बाजारों में कॉटन की कीमतें काफी नीचे चल रही हैं। वहीं कपड़ा और धागा मिलों के कारोबार में गिरावट की वजह से दाम घट गए हैं। इससे उनके लिए घरलू बाजारों में कपास की खरीद काफी महंगी पड़ रही है। ऐसे में हाल ही में कैबिनेट ने कॉटन कारपोरशन को 500 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने का फैसला किया है। इससे सस्ती दरों पर कॉटन बेचने पर कारपोरेशन को होने वाले घाटे की भरपाई होगी।चालू सीजन के दौरान कारपोरशन ने करीब 55 लाख गांठ कॉटन की खरीद किया है। तबकि पिछले सीजन में दस लाख गांठ कॉटन की खरीद हुई थी। कारोबारियों के मुताबिक मौजूदा समय में भारतीय कॉटन का भाव करीब 61-62 सेंट प्रति पौंड है, जबकि अमेरिका करीब 58 सेंट प्रति पौंड के भाव पर कॉटन बेच रहा है। कॉटन कारपोरशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सुभाष ग्रोवर ने बताया कि इससे पहले छह सालों के दौरान सरकार की तरफ से कपास पर करीब चार अरब रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है। (Business Bhaskar)
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