11 फ़रवरी 2009
आसमान छूती सोने की कीमत मोर्गेज लोन दिलाने में बेमानी
सोने की कीमतें भले ही आसमान छू रही है। लेकिन अगर अपने जेवर गिरवी (मोरगेज) रखकर आप बैंक से लोन लेना चाहते हैं तो उसकी वैल्यू बैंक की नजर में आपकी अपेक्षा से काफी कम होगी। यानि आपको उम्मीद से काफी कम कर्ज मिल पाएगा। ज्यादातर बैंक पर्सनल लोन देने से पहले ही कतरा रहे हैं। इसी वजह से लोगों के पास ज्वैलरी पर लोन लेने का एक विकल्प बचता है। सोने के मूल्यांकन के लिए विभिन्न बैंकों के अपने अलग-अलग तरीके हैं।कुछ बैंक अगले छह से बारह माह के लिए एक निश्चित मूल्य आधार तय कर लेते हैं। इसके बाद भले ही सोना रिकार्ड स्तर पर पहुंच जाए, लेकिन वे अपने आधार मूल्य पर ही वैल्यू आंकते हैं। हालांकि कुछ बैंक थोड़े उदार हैं। वे दो सप्ताह के औसतन बाजार मूल्य के आधार पर जेवरातों का मूल्यांकन करते हैं। गिने-चुने ऐसे भी बैंक हैं जो उसी दिन के अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मूल्यों के अनुसार ग्राहकों के जेवर का मूल्यांकन करते हैं और उसके आधार पर कर्ज की राशि की पेशकश करते हैं। बैंकरों का कहना है कि सोने की कीमतें हमेशा घटती-बढ़ती हैं। एक बैंकर ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम जेवरातों के बदले कर्ज देने में अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं क्योंकि सोने का मूल्य उसकी शुद्धता पर ही आधारित होता है। कई बार बैंकों को मूल्यांकन में गड़बड़ी से नुकसान उठाना पड़ा। इसी अनुदार नजरिये के कारण बैंकों का मूल्यांकन का तरीका ऐसा है कि आपको मिलने वाले कर्ज की राशि बहुत कम होगी। शारदा जैसे उदाहरण से समझा जा सकता है कि बाजार में सोने की कीमतें चाहें जिस स्तर पर पहुंच रही हो, बैंकों के गणना करने का तरीका बिल्कुल अलग है। उनके आंकलन के आधार पर ही कर्ज की राशि निर्भर होती है। शारदा को मिल पाया 40 फीसदी कम लोनशारदा शुक्ला अपने पैतृक जेवरातों पर कर्ज लेना चाहती थी। कर्ज लेने का फैसला करने वाले दिन सोने का बाजार भाव ख्भ्ख्8 रुपए प्रति ग्राम था। इस लिहाज से उन्होंने म्ब्क् ग्राम के शुद्ध सोने के जेवरों की कीमत त्त.म् लाख रुपए होने का अनुमान लगाया। इस रकम से अपनी जरूरत पूरी होते देख जब शारदा ने बैंक से संपर्क किया तो उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि बैंक सोने की कीमत ख्क्म्क् रुपए प्रति ग्राम मानता है। बैंक बाजार भाव पर ख्भ्ख्8 रुपए प्रति ग्राम मूल्य मानने को तैयार नहीं था।बैंक के अनुसार शारदा शुक्ला के जेवरातों का मूल्य म्.म्त्त लाख रुपए था। यह मूल्यांकन उनकी आवश्यकता से फ्म् फीसदी कम था। उन्हें पता चला कि बैंक मूल्यांकन के बराबर लोन देने को भी तैयार नहीं है। बैंक इसमें फ्क् फीसदी तक (कई अन्य बैंक 15-20 फीसदी के बीच कटौती करते हैं) की कटौती करके सिर्फ भ्.त्त लाख रुपए लोन देने को तैयार था। यानि बैंक शारदा शुक्ला के त्त.म् लाख रुपये के अनुमान से तकरीबन भ्क् फीसदी कम लोन देने को तैयार था। इसके अलावा बैंक ने उनसे लोन के एक फीसदी के बराबर प्रोसेसिंग फीस चार्ज किया। (Business Bhaskar)
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