09 फ़रवरी 2009
कमजोर निर्यात से कपास में फिलहाल सुधार की आस कम
निर्यात मांग कमजोर होने से कपास के भावों में फिलहाल सुधार की संभावना कम है। हालांकि बीते एक महीने से कपास के भाव कमोबेश स्थिर हैं लेकिन पिछले तीन महीने में कपास की कमतों में 10 से 28 फीसदी तक की गिरावट यही संकेत दे रही है। कपास की कीमतों में गिरावट का मोटा कारण विश्वव्यापी मंदी ही है। मंदी के कारण कपास का निर्यात तो घटा ही, सूती धागों तथा कपड़ों की मांग में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। सूती धागों का निर्यात तो 60 फीसदी तक कम हो गया है। वहीं भारत से कपास के प्रमुख आयातक चीन, टर्की, पेरू तथा मिस्र ने इस साल कपास की खरीद कम करने का निर्णय कर भारतीय निर्यातकों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।अत: वर्ष 2008-09 (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान कपास का निर्यात करीब 35 फीसदी से ज्यादा घटकर 50 से 55 लाख गांठ रह जाने की आशंका पैदा हो गई है, जो कि पिछले वर्ष 85 लाख गांठ तक पहुंच गया था। हालांकि भारत से घटते कपास निर्यात को थामने में बांग्लादेश से जरूर थोड़ी मदद मिली है। बांग्लादेश में इस साल भारतीय कपास शंकर-6 की अच्छी मांग है। इस वजह से बांग्लादेश को कपास निर्यात बढ़कर तीन लाख गांठ पहुंचने की संभावना है। वैसे मौजूदा सीजन में भारतीय निर्यातक अब तक 9.5 लाख गांठ के ही निर्यात सौदे कर पाएं हैं।उधर, देश में वर्ष 2008-09 के दौरान कपास उत्पादन पिछले वर्ष के 3.15 करोड़ से बढ़कर 3.22 करोड़ गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) होने का अनुमान है। इसके अलावा पिछले वर्ष का करीब 47 लाख गांठ बकाया स्टॉक भी बचा हुआ है। कपास पर आयात शुल्क समाप्त होने से देश में इस साल आयात बढ़कर 6.5 लाख गांठ होने का अनुमान है। इस तरह देश में कुल उपलब्धि 3.75 करोड़ गांठ होने की संभावना है। ऐसे में मंदी के चलते घरलू कपड़ा मिलों की खरीद पिछले वर्ष के मुकाबले 2.40 करोड़ गांठ से घटकर दो करोड़ रह जाने की आशंका और निर्यात में संभावित कमी को मिलाकर देखें तो कुल खपत 2.55 करोड़ गांठ से ज्यादा होने की संभावना नहीं है।सीसीआई मौजूदा सीजन में अब तक 66 लाख गांठ की खरीद कर चुकी है, जो अब तक की कुल आवक 1.85 करोड़ गांठ की 35.7 फीसदी है। लेकिन इन सबके बावजूद कपास के भाव समर्थन मूल्य से नीचे चल रहे हैं। घरलू बाजार में कपास की कीमतों में कमी का एक प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में आई भारी गिरावट है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले भारतीय बाजार में कपास के भाव महंगे होने के कारण आयातक देश भारत खरीद कम रहे हैं। वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक मंदी से दुनियाभर में ही कपास की खपत में तीन फीसदी की कमी की आशंका है। यह देखते हुए कपास की कीमतों में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं की जा सकती है। इस तरह कुल मिलाकर कपास उत्पादन व उपलब्धि के लिहाज से यह साल बेहतर रहेगा लेकिन कीमत व निर्यात के मामले में स्थिति ज्यादा बेहतर दिखाई नहीं दे रही है। (Business Bhaskar)
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