07 फ़रवरी 2009
कपास खरीद जारी रखने को 2000 करोड़ रुपये की मांग
टेक्सटाइल मंत्रालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कपास की खरीद जारी रखने के लिए 2000 करोड़ रुपये की मांग की है। इस आशय का कैबिनेट नोट मंत्रिमंडलीय समिति के पास भेजा है। घरेलू बाजार में कपास के दाम लगातार एमएसपी से नीचे बने हुए हैं। जिसके कारण कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) पर किसानों से कपास खरीद का दबाव काफी ज्यादा है। अब तक की खरीद के लिए सरकार ने गुरुवार को 500 करोड़ रुपये देने का फैसला किया था। टेक्सटाइल मंत्रालय के उच्च अधिकारी के अनुसार मंत्रिमंडलीय समिति को भेजे प्रस्ताव में वित्त वर्ष 2009-10 के लिए 2000 करोड़ रुपये की मांग की गई है। जिससे सीसीआई समेत सभी सरकारी एजेंसियां को कपास की खरीद के लिए नकदी की कमी न हो। हाल ही में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने सीसीआई को चालू वित्त वर्ष में कपास की खरीद जारी रखने के लिए 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। केंद्र सरकार की ओर से कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) और नाफेड कपास की खरीद कर रही है। इसके अलावा प्रस्ताव में कपास की खरीद आगे भी जारी रखने की भी मंजूरी मांगी है। अधिकारी ने बताया कि विश्व बाजारों में कपास के दामों में नरमी को देखते हुए घरेलू बाजार में आगे भी कपास के दाम एमएसपी से नीचे बने रहने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए टेक्सटाइल मंत्रालय ने कपास की खरीद आगे भी जारी रखने की अनुमति मांगी है। अभी सरकारी एजेंसियों को केवल फरवरी तक ही एमएसपी पर कपास खरीद की अनुमति है। घरेलू बाजार में अभी कपास के दाम 20,500-21300 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी में 355 किलो) के स्तर पर हैं। जबकि कपास की एमएसपी 2500-3000 रुपये प्रति क्विंटल है। दूसरी ओर विश्व बाजार में इस समय कपास के दाम 49.71 सेंट प्रति पाउंड है जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 27 फीसदी कम है। टेक्सटाइल मंत्रालय ने इस सीजन के लिए करीब 100 लाख गांठ (1 गांठ में 170 किलो) कपास खरीद का लक्ष्य रखा है। जिसको एमएसपी से निचले दामों पर बेचा जाएगा। जिससे सरकार को कुल 2500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। अभी सीसीआई ने कुल 67 लाख गांठ और नाफेड ने 23 लाख गांठ (170 किलो प्रति गांठ) कपास की खरीद की है। दोनों एजेंसियों की कुल खरीद 9500 करोड़ रुपये की हुई है। (Business Bhaskar)
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