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09 फ़रवरी 2009

मांग बढ़ने की उम्मीद से कॉपर चढ़ा

मुंबई: इस तिमाही में चीन से कॉपर की मांग बढ़ने के अनुमान और अमेरिकी सरकार द्वारा घोषित राहत पैकेज के बाद सकारात्मक सेंटीमेंट के कारण पिछले सप्ताह कॉपर की कीमतों में 16 फीसदी की तेजी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि शॉर्ट टर्म में कीमतों में तेजी आ सकती है, लेकिन मध्यम समय में अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एलएमई पर 3,600 डॉलर के अधिकतम स्तर पर जाने के बाद कॉपर 3,590 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ। इससे पिछले सप्ताह के मुकाबले एमसीएक्स पर फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 14 फीसदी ऊपर चढ़ा और वह 174.7 रुपए प्रति किलो पर बंद हुआ। इस साल की शुरुआत से कॉपर की कीमतें अपने न्यूनतम स्तर 2,950 डॉलर प्रति टन से 20 फीसदी ऊपर चढ़ चुकी हैं। एंजेल कमोडिटीज के रिसर्च हेड अमर सिंह के मुताबिक, शॉर्ट टर्म में कॉपर के 182-190 रुपए प्रति किलो तक जाने की क्षमता है, लेकिन एमसीएक्स पर फरवरी कॉन्ट्रैक्ट के लिए मीडियम टर्म बहुत अच्छा नहीं दिखता है। 190-200 रुपए प्रति किलो पर पहुंचने के बाद कॉपर पर मुनाफावसूली का दबाव बन सकता है। निर्मल बांग कमोडिटीज के कुणाल शाह का भी मानना है कि चीन में निर्माण गतिविधियों में तेजी आने के कारण एमसीएक्स फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 180-185 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है। पिछले महीने की शुरुआत में चीन से मांग के चलते इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया। यहां तक कि पिछले सप्ताह में भी कमजोर फंडामेंटल के बावजूद चीन से मांग बढ़ने की उम्मीद में खरीदारी में तेजी देखी गई। अमेरिका द्वारा 900 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज की घोषणा का भी असर इस कमोडिटी पर पड़ा। कुल मिलाकर देखें तो कमजोर मांग और स्टॉक बढ़ने के कारण कॉपर के फंडामेंटल काफी कमजोर हैं। रिफाइंड कॉपर ग्लोबल मार्केट में 9.20 लाख टन ज्यादा है। पिछले साल के मुकाबले यह तीन गुना अधिक है। यहां तक कि एलएमई में भी स्टॉक पांच लाख टन है जो नवंबर 2003 के बाद सबसे अधिक है। आने वाले महीनों में इसके और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के भंडार में भी पिछले दो सप्ताह के मुकाबले 72 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चीन प्रतिदिन 13,000 टन कॉपर का उपभोग करता है और शंघाई के स्टॉक में 28,000 टन की बढ़ोतरी से यह नवंबर 2008 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। (ET Hindi)

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