08 जनवरी 2009
अंगूर के लिए इस गर्मी चुकानी होगी ज्यादा कीमत
बंगलुरु : आपके लिए इस बार अंगूर खट्टे हो सकते हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस बार फसल में बीमारी लगने से अंगूर के उत्पादन में कमी आ सकती है। इससे गर्मियों में अंगूर की कीमतों के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अंगूर की प्रसिद्ध किस्म थॉमसन सीडलेस के लिए ग्राहकों को 20-25 फीसदी अधिक ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं। यह फसल घरेलू बाजार में मार्च-अप्रैल के दौरान आती है। इन राज्यों में अंगूर की फसल डाउनी माइल्ड्यू नाम की बीमारी का शिकार हो गई है। बेहद ठंडे मौसम के कारण यह बीमारी होती है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में घने कोहरे के कारण अंगूर की फसलों को यह बीमारी लगी। अंगूर उत्पादकों और निर्यातकों की एसोसिएशन महाग्रेप्स के सीनियर अधिकारी का कहना है, 'हम राज्य में अंगूर की फसल में 30-35 फीसदी गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं। कोहरे के कारण लातूर, पंढरपुर, सांगली और नागपुर के आसपास अंगूर की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।' महाराष्ट्र में अंगूर का उत्पादन 12 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। फरवरी-मार्च 2008 में बेमौसम बारिश के कारण भी अंगूर के उत्पादन पर काफी असर पड़ा था।महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों पर सिर्फ बीमारी ही सितम नहीं ढा रही है। कीटनाशकों की बढ़ी कीमतों की वजह से भी उनकी हालत खराब हो गई है। एक सूत्र ने ईटी को बताया, 'कच्चे माल की कमी के कारण पिछले 6-12 महीने में कीटनाशकों का खर्च दोगुना हो गया है। इस साल अंगूर किसानों को प्रति एकड़ 50000 रुपए कीटनाशक पर खर्च करने पड़ रहे हैं। पहले यह लागत 25000-30000 रुपए आती थी। कर्नाटक के किसानों का कहना है कि दिसंबर में असामान्य तौर पर घने कोहरे के कारण फसल पर काफी बुरा असर पड़ा है। इससे घरेलू बाजार में अंगूर की उपलब्धता पर असर पड़ेगा। कर्नाटक में 30000 एकड़ जमीन पर अंगूर की खेती की जाती है और प्रति एकड़ औसत उत्पादन 10 टन रहता है। एक अनुमान के मुताबिक, कर्नाटक में कुल अंगूर उत्पादन का 25 फीसदी हिस्सा राज्य में ही खप जाता है। यहां से अंगूर की सप्लाई केरल और आंध्र प्रदेश को भी की जाती है। (ET Hindi)
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