08 जनवरी 2009
कालीमिर्च की पैदावार में कमी से भाव त्तत्न बढ़े
देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में कालीमिर्च का बकाया स्टॉक काफी कम है। जबकि नई फसल की आवक हल्की है। ऐसे में घरेलू व निर्यातकों की मांग निकलने से पिछले पंद्रह दिनों में कालीमिर्च के भावों में लगभग सात फीसदी की तेजी आ चुकी है। चालू फसल सीजन के दौरान देश में कालीमिर्च की पैदावार घटने की आशंका है। इससे आगामी दिनों में इसके मौजूदा भावों में तेजी का रुख कायम रह सकता है। कोच्चि मंडी स्थित मैसर्स केदारनाथ संस के अजय अग्रवाल ने बिजनेस भास्कर को बताया कि इस समय उत्पादक राज्यों में कालीमिर्च का स्टॉक मात्र 4,000 से 5,000 टन ही बचा है। पिछले वर्ष की समान अवधि में इसका स्टॉक 14,000 से 15,000 हजार टन का था। नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में मात्र 60 से 70 टन की ही शुरू हुई है जबकि पिछले वर्ष इन दिनों 600 से 700 टन की आवक शुरू हो गई थी। केरल में मजदूरी दर बढ़ने से कालीमिर्च की तुड़ाई किसानों को मंहगी पड़ रही है। वैसे भी नीचे भावों को देखते हुए किसानों द्वारा कालीमिर्च की तुड़ाई कम करवाई जा रही है।इसलिए आवक का दबाव नहीं बन रहा है। जून-जुलाई महीने में केरल के उत्पादक क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा न होने से देश में कालीमिर्च की पैदावार भी पिछले साल के 50,000 टन से घटकर 45,000 हजार टन ही रहने की आशंका है। बकाया स्टॉक कम और पैदावार में भी कमी आने की आशंका से भविष्य में कालीमिर्च की कीमतों में तेजी कायम रह सकती है। पिछले पंद्रह दिनों में कालीमिर्च की कीमतों में करीब 1500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आकर अनगार्बल्ड के भाव 11,400 से 11,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। बंगलुरू के कालीमिर्च निर्यातक अनीश रावथर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कालीमिर्च के भाव 2600 डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) बोले जा रहे हैं। वियतनाम की नई फसल की आवक फरवरी-मार्च महीने में बनेगी तथा वहां भी बकाया स्टॉक कम है। इंडोनेशिया में कालीमिर्च का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। ब्राजील के पास स्टॉक तो है लेकिन भारत की तुलना में ब्राजील की कालीमिर्च की क्वालिटी हल्की है। इसलिए निर्यातकों की भारत से खरीद जारी रह सकती है। भारतीय मसाला बोर्ड के सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से नवंबर तक देश से कालीमिर्च का निर्यात घटकर 16,850 टन ही रहा जोकि पिछले वर्ष के मुकाबले कम है। गत वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 25,230 टन का हुआ था। निर्यात में गिरावट का कारण अमेरिका व यूरोप में आर्थिक संकट है। (Business Bhaskar.....R S Rana)
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