08 जनवरी 2009
पीतल स्क्रैप पर आयात कर घटा, पर राहत नहीं
मुंबई : सरकार के पीतल के स्क्रैप आयात पर कर 20 फीसदी कम करने के बावजूद मेटल कारोबारियों की मुसीबतें खत्म नहीं हुई हैं। कारोबारी पीतल स्क्रैप पर टैक्स और कम करने की मांग कर रहे हैं। बॉम्बे मेटल एक्सचेंज (बीएमई) सरकार से आयात पर टैरिफ को कम करने की मांग करने वाली है। बीएमई का कहना है कि आयात कर आकलन में विसंगति की वजह से पीतल स्क्रैप को पश्चिमी पोर्ट पर उतारना पड़ता है। इस वजह से सरकार को इसके टैरिफ को और कम करना चाहिए। बीएमई के प्रेजिडेंट सुरेंद्र मार्डिया के मुताबिक, सरकार के टैरिफ वैल्यू को कम करने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 1000 डॉलर कम चल रही है। उनका कहना है, 'मेटल कारोबारी बड़ी मुश्किल में हैं। कारोबारियों को इसकी कीमत कम होने के बावजूद काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।' इस साल 1 जनवरी से कस्टम और रेवेन्यू विभाग ने पीतल स्क्रैप पर टैरिफ दर को पहले के 40282 डॉलर प्रति टन से घटाकर 3252 डॉलर प्रति टन कर दिया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीतल स्क्रैप की कीमतों में आश्चर्यजनक गिरावट आई है और यह 1700 से 1800 डॉलर प्रति टन के बीच चल रही है। मार्डिया के मुताबिक, 'तमाम आयातकों ने पोर्ट से माल लेने से इनकार कर दिया है क्योंकि उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।' वह कहते हैं कि स्थिति काफी गंभीर है और लग रहा है कि आने वाले वक्त में कई इकाइयों को अपना कामकाज बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। बीएमई का तर्क है कि स्क्रैप पर 20 से 25 फीसदी डिस्काउंट के बावजूद इसकी कीमत 2000 डॉलर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 1800 डॉलर चल रही है। पीतल की ज्यादातर इकाइयां स्मॉल स्केल सेक्टर में आती हैं। यह सेक्टर काफी असंगठित है। पीतल का ज्यादातर काम उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में होता है। (ET Hindi)
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें