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11 जनवरी 2009

चीनी के उत्पादन में कमी की आशंका

गन्ने का बुवाई क्षेत्रफल घट गया है। इससे चालू फसल सीजन में चीनी के उत्पादन में कमी आने की आशंका है। साथ ही चीनी का बकाया स्टॉक भी पिछले वर्ष के मुकाबले कम है। गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में बढ़ोतरी तो हुई है साथ ही गन्ने में रिकवरी भी पिछले साल के मुकाबले कम आ रही है। इससे शुगर मिलों की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में चालू वर्ष में घरेलू बाजारों में चीनी की कीमतों में तेजी का रुख कायम रह सकता है।बुवाई क्षेत्रफल घटाचालू वर्ष में देश में गन्ने के बुवाई क्षेत्रफल में 8.82 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में देश में गन्ने की बुवाई 44.13 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले वर्ष देश में इसकी बुवाई 52.95 लाख हेक्टेयर में हुई थी।कीमतों में बढ़ोतरीहरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में राज्य सरकारों ने चालू फसल सीजन के लिए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में बढ़ोतरी की है, जिससे शुगर मिलों की उत्पादन की लागत बढ़ गई है। हरियाणा में राज्य सरकार ने गन्ने का एसएपी बढ़ाकर सामान्य किस्म के लिए 165 रुपए और अगेती किस्म के लिए 170 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। पंजाब में भी राज्य सरकार ने गन्ने का एसएपी सामान्य किस्म के लिए 160 रुपए और अगेती किस्म के लिए 165 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। इसी तरह से उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने गन्ने का एसएपी सामान्य किस्म के लिए 140 रुपए और अगेती किस्म के लिए 145 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। गन्ने का एसएपी तो बढ़ा ही है साथ ही गन्ने में रिकवरी पिछले साल से कम आ रही है।बकाया स्टॉकखाद्य मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 204.97 लाख टन होने की संभावना है, जबकि बकाया स्टॉक 110 लाख टन मिलाकर कुल उपलब्धता 315.97 लाख टन की बैठेगी। हालांकि उद्योग जगत इससे सहमत नहीं है। उद्योग जगत का मानना है कि चालू सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 190 लाख टन और बकाया 90 लाख टन मिलाकर कुल उपलब्धता 280 लाख टन की बैठेगी। हमारी सालाना घरेलू खपत 220 से 230 लाख टन की है। पिछले वर्ष देश में चीनी का उत्पादन 264 लाख टन का हुआ था।कोटे में बढ़ोतरीकेंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों को काबू में करने के लिए चालू वर्ष की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) के लिए चीनी का कोटा बढ़ाकर 50 लाख टन का जारी किया है। पिछले साल की समान अवधि में सरकार ने 44 लाख टन का कोटा जारी किया था। कोटा ज्यादा आने के बावजूद भी चीनी की कीमतों में तेजी का रख बना हुआ है। चीनी व्यापारी सुरेंद्र पाल ने बताया कि सरकार ने तेजी रोकने के लिए अतिरिक्त कोटा जारी किया लेकिन मिलों द्वारा भाव बढ़ाने और स्टॉकिस्टों की खरीदारी बनी रहने से इसकी तेजी को बल मिला है। उन्होंने बताया कि चालू वर्ष में लोकसभा के चुनाव होने हैं इसलिए सरकार चीनी की कीमतों पर निगाह रखे हुए है। जब तक सरकार रॉ शुगर आयात के नियमों में बदलाव नहीं करेगी तब तक भावों में तेजी का रुख कायम रह सकता है।तेजी का रुखदिल्ली के चीनी व्यापारी सुधीर भालोठिया ने बिजनेस भास्कर को बताया कि चीनी के उत्पादन में कमी की आशंका से इस समय स्टॉकिस्टों की सक्रियता बनी हुई है जिससे चालू माह में ही दिल्ली बाजार में चीनी के भावों में लगभग 125 से 150 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। उन्होंने बताया कि इस समय रॉ शुगर का (ग्रेन टू ग्रेन) आयात किया जा सकता है। ग्रेन टू ग्रेन आयात में आयातकों को रॉ शुगर के बदले उसी मात्रा में साफ की हुई चीनी का दो साल के अंदर निर्यात करना होता है। पिछले दिनों महाराष्ट्र की शुगर मिलों ने सरकार से रॉ शुगर के आयात को (टन टू टन) करने की मांग की थी जिसे केंद्र सरकार ने नकार दिया। टन टू टन में आयात की गई रॉ शुगर को निर्यात करने की समय सीमा की अवधि तो ज्यादा होती ही है साथ ही देश में तैयार चीनी का निर्यात भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली बाजार में एम ग्रेड चीनी के भाव बढ़कर 2150 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल और एस ग्रेड चीनी के भाव बढ़कर 2125 से 2150 रुपए प्रति क्विंटल हो गए।वायदा बाजार में तेजीवायदा बाजार में पिछले एक महीने से चीनी की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। एनसीडीईएक्स पर जनवरी वायदा में चालू महीने में ही लगभग 100 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आकर भाव ऊंचे में 2010 रुपए प्रति क्विंटल हो गए। इन दिनों चीनी में निवेशकों की सक्रियता बराबर बनी हुई है। (Business Bhaskar...R S Rana)

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