मुंबई : जेम्स-ज्वैलरी कारोबार की चमक और फीकी पड़ सकती है। इस महीने देश से इनके निर्यात में कमी की आशंका है। इस साल नवंबर में जेम्स
और ज्वैलरी निर्यात में 34 फीसदी की गिरावट आई थी। नवंबर में इनका निर्यात घटकर सिर्फ 18.7 करोड़ डॉलर का रह गया। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी के चलते दुनिया भर में भारतीय ज्वैलरी की मांग कम हुई है। इस वजह से इंडस्ट्री को उत्पादन में कमी और छंटनी जैसे कदम उठाने पड़े हैं। जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) ने सरकार से अंतरिम राहत की मांग की है। जीजेईपीसी की मांग है कि इंडस्ट्री को निर्यात के लिए रुपए में लिए जाने वाले कर्ज पर ब्याज में दो फीसदी की छूट को बढ़ाकर चार फीसदी कर दिया है। साथ ही डॉलर में लिए जाने वाले कर्ज पर ब्याज दरों को लाइबोर (लंदन इंटर बैंक ऑफर्ड रेट) से चार से पांच फीसदी ऊपर की दर पर फिक्स रखा जाए। जीजेईपीसी के चेयरमैन वसंत मेहता ने कहा है कि सस्ती ब्याज दरों पर पूंजी मिलने और उधार चुकाने की मियाद बढ़ाने से इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा। इससे नए ऑर्डर हासिल करने में मदद मिलेगी। साथ ही उद्योग को दूसरे बाजारों में पहुंच बनाने का भी मौका मिलेगा। इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच इस इंडस्ट्री को मिलने वाले ऑर्डरों में 20 फीसदी की गिरावट आई है। नग और गहनों के निर्यात में सबसे ज्यादा कमी की वजह अमेरिका में इसकी कम हुई मांग रही है। इस निर्यात का करीब 30 से 35 फीसदी हिस्सा अमेरिकी बाजार में जाता है। निर्यातक मान रहे हैं कि बैंकों से हर निर्यातक को दिए जाने वाले कर्ज को उतार-चढ़ाव वाले विनिमय दरों की बजाय शुद्ध डॉलर के तौर पर देने के लिए कहा जाना चाहिए। मेहता के मुताबिक, कर्ज भुगतान में देरी होने पर निर्यातक के खाते को खराब कर्जों में शामिल करने और इस तरह से कर्ज दिए जाने में दिक्कतें पैदा करने के मौजूदा कामकाज को बंद किया जाना चाहिए। काउंसिल ने इसके अलावा सोने की अनियमित सप्लाई की वजह से इंडस्ट्री को हो रहे नुकसान पर भी चिंता जाहिर की। मेहता कहते हैं, 'गहने बनाने वालों के लिए कई एजेंसियों के नामांकित किए जाने के बावजूद इनमें से ज्यादातर छोटे केंदों को सोने की सप्लाई करने में रुचि नहीं दिखाती हैं।' काउंसिल ने यह भी कहा कि सोने का लॉट साइज काफी बड़ा होने की वजह से छोटे कारोबारियों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। (ET Hindi)
17 दिसंबर 2008
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