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21 दिसंबर 2008

खाद्य तेल आयात पर शुल्क लगवाने को उद्योग सक्रिय

विश्व बाजार से सस्ते दामों पर खाद्य तेलों का भारी स्टॉक जमा कर चुके आयातकों और प्रोसेसिंग कंपनियों ने आयात पर शुल्क लगवाने के लिए सरकार पर दुबारा दबाव बनाना शुरू कर दिया है। उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से मांग की है कि क्रूड पाम तेल के आयात पर 30 प्रतिशत, आरबीडी पामोलिन पर 37.5 प्रतिशत और रिफाइंड सोया तेल पर 27.5 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाए। इसके अलावा खाद्य तेल के निर्यात को पूरी तरह से छूट दी जाए। उद्योग ने कई राज्यों में लगी स्टॉक लिमिट को पूरी तरह से समाप्त किया जाए।साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन और इंडियन ऑयलसीड एंड प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वाणिज्य मंत्री कमलनाथ से मुलाकात की और आयात शुल्क लगाने की मांग उठाई। इस संगठनों का दावा है कि इस समय उत्पादक मंडियों में खरीफ तिलहनों की आवक बनी हुई है तथा फरवरी महीने में रबी तिलहनों की आवक शुरू हो जाएगी। मौसम अनुकूल होने से रबी में तिलहनों का उत्पादन बढ़ने की संभावना है। इन हालातों में अगर सरकार आयातित तेलों पर 10 या 20 प्रतिशत शुल्क लगा भी देगी तो भी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि खाद्य तेल व्यापार से जुड़े सूत्रों का मानना है कि आयातित तेलों पर शुल्क न होने से व्यापारियों ने सस्ते दामों पर खाद्य तेलों का भारी मात्रा में आयात किया है तथा इस समय स्टॉकिस्टों के पास अच्छा-खासा स्टॉक मौजूद है इसलिए स्टॉकिस्ट चाहते हैं कि सरकार आयातित तेलों पर शुल्क लगा दे। इससे घरेलू बाजार में भाव बढ़ने लगेंगे और उन्हें स्टॉक पर अच्छा मुनाफा होगा।। सॉल्वेंट एक्स्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार तेल वर्ष नवंबर से अक्टूबर 2007-08 में 56.08 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ। उससे पिछले वर्ष के मुकाबले आयात करीब 8.94 लाख टन ज्यादा रहा। देश में आयातित तेलों के स्टॉक के अलावा रबी तिलहनों की पैदावार भी अच्छी रहने की उम्मीद है। (business Bhaskar....R S Rana)

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