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14 दिसंबर 2008

आयात नियमों में बदलाव पर चीनी उद्योग में मतभेद

चीनी का कम उत्पादन होने की आशंका के बीच संभावित उपायों पर चीनी उद्योग के बीच मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। जहां एक ओर उत्तर भारत की चीनी मिलें आयात के जरिये देश में चीनी की सुलभता बढ़ाने के सरकार के संभावित उपायों के खिलाफ हैं वहीं दक्षिण भारत और महाराष्ट्र की चीनी मिलें नियमों में बदलाव चाहती हैं। सरकार चीनी की सुलभता बढ़ाने के लिए रॉ शुगर आयात के नियमों में बदलाव कर सकती है इस बदलाव से चीनी की देश में उपलब्धता बढ़ जायेगी।सूत्रों के अनुसार उत्तर भारत की चीनी मिलें ऐसे किसी भी बदलाव का विरोध कर रहीं हैं लेकिन दक्षिण भारत और महाराष्ट्र की मिलें आयात नियम में बदलाव में अपना फायदा देख रही है। इसलिए इसके पक्ष में हवा बनाने की कोशिश कर रही हैं। उधर भारतीय शुगर मिल एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार उत्पादन में कमी के बावजूद देश में चीनी की कुल उपलब्धता भरपूर है इसलिए आयात में अतिरिक्त छूट देने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस्मा का कहना है कि अगर आयात नियमों में छूट दी जाती है तो इससे उद्योग के साथ किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस्मा के अनुसार देश में घरेलू मांग के अलावा भी चीनी का पर्याप्त स्टॉक है। रॉ शुगर के आयात के लिए जो लाइसेंस दिया जाता है उसमें शर्त होती है कि रॉ शुगर का आयात करने के बाद दो साल के भीतर उसी चीनी को रिफाइंड करके निर्यात करना होगा। इस्मा के मुताबिक रॉ शुगर के आयात के नियमों में बदलाव करने से उद्योग को भारी नुकसान हो सकता है।इसके कारण मिलों द्वारा किसानों को भुगतान में दिक्कतें आ सकती है। नियमों में यह छूट दिए जाने की संभावना है कि मिलें रॉ शुगर आयात करके देश में बेच सकेंगी और अपनी सुविधा के अनुसार भारतीय चीनी दो साल के भीतर निर्यात कर सकेंगी। खाद्य मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन (2008-09) में देश में 204.97 लाख चीनी का उत्पादन होने की संभावना है तथा बकाया स्टॉक 110 लाख टन मिलाकर कुल उपलब्धता 315.97 लाख टन होगी। उधर उद्योग का मानना है कि चालू सीजन में चीनी का उत्पादन 200 लाख टन व बकाया 90 लाख टन मिलाकर कुल उपलब्धता 290 लाख टन की होगीगी। जबकि हमारी सालाना घरेलू खपत 220 लाख टन है इसलिए आगामी वर्ष में नए सीजन के शुरू में 70 लाख टन का बकाया स्टॉक बचेगा। ऐसे में उद्योग का तर्क है कि रॉ शुगर के आयात संबंधी नियम में बदलाव करके सुलभता बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है। (Business Bhaskar.......R S Rana)

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