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22 दिसंबर 2020

बढ़े भाव में मांग कमजोर होने से चावल के साथ ही बासमती धान के दाम स्थिर

नई दिल्ली। चावल मिलों की मांग कमजोर होने से मंगलवार को पंजाब, हरियाणा के साथ ही दिल्ली की नरेला मंडी में धान के दाम स्थिर हो गए, जबकि उत्पादक मंडियों में आवकों में कमी आई है। इस दौरान बासमती चावल के दाम भी रुक गए।

व्यापारियों के अनुसार स्टॉकिस्टों ने सोमवार को भाव बढ़ाये थे, लेकिन हाजिर मांग कमजोर होने के कारण बढ़े हुए भाव में व्यापार कम रहा। दिल्ली की नरेला मंडी में मंगलवार को धान की आवक घटकर 10 से 12 हजार बोरियों की ही हुई, जबकि स्थानीय मिलों की मांग कमजोर होने के कारण पूसा 1,121 धान के दाम 2900 से 3210 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। व्यापारियों ने बताया कि स्थानीय मिलों ने सीमित मात्रा में ही खरीद की, तथा किसानों के आंदोलन के कारण रास्ते बंद होने की वजह से बाहर की चावल मिले खरीद कम रही है। उन्होंने बताया कि बाहर की वहीं चावल मिलें धान खरीद रही हैं, जिनके गोदाम दिल्ली में है।
भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 422.01 लाख टन धान की खरीद कर चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 21.93 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि में 346.10 लाख टन धान की खरीद ही हुई थी। अभी तक हुई कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 202.77 लाख टन की है, जोकि कुल खरीद का 48.05 फीसदी है।
हरियाणा से धान की एमएसपी पर 56.13 लाख टन, उत्तर प्रदेश से 40.41 लाख टन और तेलंगाना से 34.44 लाख टन तथा छत्तीसगढ़ से 28.83 लाख टन धान की खरीद हुई है। अन्य राज्यों में ओडिशा से 13.13 लाख टन, मध्य प्रदेश से 10.48 लाख टन, उत्तराखंड से 9.80 लाख टन और आंध्रप्रदेश से 7.83 लाख टन तथा तमिलनाडु से 5.30 लाख टन धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जा चुका है।

बासमती चावल की कीमतों में सोमवार को 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई थी, लेकिन बढ़े दाम पर ​निर्यातकों के साथ ही स्टॉकिस्टों की मांग कमजोर होने से मंगलवार को दाम स्थिर हो गए। जानकारों के अनुसार किसानों के आंदोलन के कारण बासमती चावल में व्यापार काफी कम हो रहा है। चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 27.44 लाख टन का हो चुका है जबकि ​वित्त वर्ष 2019-20 में कुल निर्यात 44.54 लाख टन का ही हुआ था, अत: आगामी महीनों में भी निर्यात की यही गति बनी रही तो कुल निर्यात पिछले साल की तुलना में ज्यादा ही होने का अनुमान है।

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