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15 दिसंबर 2008

राहत पैकेज से भी मक्का निर्यात में बढ़त के आसार नहीं

केंद्र सरकार यदि कृषि क्षेत्र के लिए राहत पैकेज का ऐलान करती भी है तो, मक्के के निर्यात को राहत मिलने के आसर कम हैं। इस बात की संभावना जताते हुए यूएस ग्रेन काउंसिल में भारत के प्रतिनिधि अमित सचदेव ने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय मक्के की कीमतें वैव्श्रिक बाजारों मे तुलनात्मक रुप से ज्यादा हैं। गौरतलब है कि केंद सरकार की तरफ से कृषि क्षेत्र को भी राहत पैकेज दिए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पिछले सप्ताह केंद्रीय वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने भी इस बात का सकेंत दिया था। अमित सचदेव के मुताबिक भारत यदि कृषि क्षेत्र के लिए राहत पैकेज की घोषणा करता है तो इसमें सोयामील और मक्के के निर्यात पर करीब दस फीसदी की छूट दिए जाने की ज्यादा संभावना है। उन्होंने बताया कि यह निर्यात छूट जिंसों के निर्यात के फ्री ऑन बोर्ड (एफओबी) भाव पर दी जा सकती है। लेकिन मौजूदा समय में घरलू बाजारों में मक्के की कीमतें तुलनात्मक रुप से ऊंची हैं। ऐसे में दस फीसदी की छूट दिए जाने के बावजूद भारतीय मक्का वैव्श्रिक बाजार में ज्यादा प्रतिस्र्धी नहीं हो सकेगा। मौजूदा समय में घरलू बाजारों में मक्के का भाव करीब 7,900 रुपये प्रति टन है। हालांकि यह भाव केंद्र सरकार द्वारा घोषित मक्के के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम है। सरकार ने इस साल के लिए मक्के का एमएसपी 840 रुपये `िंटल घोषित किया है। वहीं वैव्श्रिक बाजारों में मौजूदा समय में मक्के का का भाव तुलनातमक रुप से कम है। इस साल वैव्श्रिक बाजारों में मक्के की कीमतों में भारी गिरावट आई है। पिछले सप्ताह शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड मक्का दिसंबर वायदा करीब 141.48 डॉलर प्रति टन पर कारोबार किया। जबकि मार्च वायदा 146.99 डॉलर प्रति टन पर कारोबार किया। अमेरिकी कृषि विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मक्के के उत्पादन में गिरावट की संभावना नहीं है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि बायोफ्यूल में मक्के की मांग में करीब 7.62 फीसदी की कमी आ सकती है। वहीं निर्यात में करीब 2.54 फीसदी की कमी आने की संभावना जताई गई है। इस साल चीन में मक्का उत्पादन अनुमान में इजाफा हुआ है। यहां करीब 16 करोड़ टन मक्के का उत्पादन होने की संभावना है। इससे पहले करीब 15.6 करोड़ टन मक्के का उत्पादन होने के आसार थे। सचदेव के मुताबिक चीन में भी मक्का निर्यात पर करीब 13 फीसदी की छूट दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।लेकिन चीन का मक्का भी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका की तुलना में काफी महंगा है। ज्ञात हो कि चालू साल के दौरान हालांकि भारत के मक्का उत्पादन में गिरावट आई है। लेकिन इसके बावजूद भाव नरम हैं। वैव्श्रिक बाजारों में मक्के की कीमतों में आई गिरावट का असर घरलू करोबार पर भी देखा जा रहा है। वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट की वजह से मक्के की कीमतों में भी गिरावट आ रही है। कच्चे तेल के भाव गिरने से बायोफ्यूल की मांग बढ़ने को लेकर हो रही सट्टेबाजी में कमी आई है। जिसका असर मक्के के कारोबार पर देखा जा रहा है। इस साल 12 जुलाई को न्यूयार्क र्मेकटाईल एक्सचेंज में कच्चा तेल 147 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर कारोबार किया था। जो अब गिरकर करीब 45 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। दुनिया भर में औद्योगिक विकास की रफ्तार में आ रही कमी की वजह से माना सयह ता रहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में आने वाले दिनों के दौरान और गिरावट आ सकती है। (Business Bhaskar)

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