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15 दिसंबर 2008

इस्पात उद्योग में आने लगी मजबूती

कोलकाता December 15, 2008
पिछले एक पखवाड़े में कुछ चुनिंदा स्टील उत्पादों की कीमतों में उछाल आया है। जमा भंडार धीरे-धीरे कम हो रहा है और माल भाड़े में भी बढ़ोतरी होने लगी है।
लोहा और इस्पात उद्योग इन परिस्थितियों को बड़ी संजीदगी और उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। उद्योग को उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में मांग जोर पकड़ेगी। स्टेनलेस स्टील में इस्तेमाल होने वाले कच्चा माल फेरोक्रोम की कीमत पिछले 15 दिनों में 40 हजार रुपये प्रति टन से 45 हजार रुपये प्रति टन के स्तर पर आ गई है और इसका असर स्टेनलेस स्टील की कीमत पर दिखने लगा है।जिंदल स्टील के निदेशक (बिजनेस डिवेलपमेंट) अरविंद प्रकाश ने कहा कि वर्तन बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले स्टेनलेस स्टील की कीमत 2-3 रुपये प्रति किलो बढ़ी है और यह 51 रुपये प्रति किलो पर जा पहुंची है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में उत्पादन में कटौती होने के वजह से स्टील की कीमतें मजबूत हो रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्टील उत्पादकों ने उत्पादन में 20 से 40 फीसदी तक की कटौती की थी और इस वजह से कच्चे माल व तैयार माल की कीमतें स्थिर हुई हैं। प्रकाश ने कहा कि माल भाड़ा बढ़ने की वजह से मालों की आवाजाही कम हो गई है। स्टॉकिस्ट के पास, सर्विस सेंटर पर और उपभोक्ता के स्तर पर माल काफी कम है यानी वहां स्टॉक काफी कम हो गया है। उत्तम गैल्वा स्टील के निदेशक (वाणिज्य) अंकित मिगलानी ने कहा कि फिलहाल किसी के पास स्टॉक नहीं है। गौरतलब है कि उत्तम गाल्वा पश्चिमी भारत में हॉट रोल्ड कॉयल व गैलवनीकृत इस्पात के बड़े उत्पादक व निर्यातकों में से एक है। मिगलानी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें अपने निचले स्तर को छूकर वापस होने लगी हैं। उन्होंने कहा कि पीक सीजन में हॉट रोल्ड कॉयल की कीमत 1200 रुपये प्रति टन थी, जो फिलहाल 600 रुपये प्रति टन पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि एक बार छुट्टी का सीजन समाप्त हो जाएगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के मुकाबले घरेलू कीमतें कम होंगी तब इस सेक्टर में जान आ जाएगी क्योंकि हॉट रोल्ड कॉयल के आयात पर पाबंदी लगा दी गई है। (BS Hindi)

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