09 सितंबर 2008
हल्दी की पैदावार गिरने की आशंका
उत्पादक क्षेत्रों में कमजोर मानसून हल्दी के बाजार में तेज़ी का कारण बन सकता है। बारिश की कमी की वजह से प्रमुख उत्पादक क्षेत्र आंध्रप्रदेश में हल्दी के बुवाई क्षेत्रफल में 15 फीसदी की कमी आई है। साथ ही महाराष्ट्र में भी बुवाई क्षेत्रफल 10-12 फीसदी घट गया है। इस साल आंध्रप्रदेश में कुल 38,000 हैक्टेयर में हल्दी की बुवाई हुई है जबकि 2007 में हल्दी की बुवाई करीब 45000 हैक्टेयर क्षेत्रफल में हुई थी। बारिश की कमी की वजह से सबसे ज्यादा गिरावट काडापा जिले में आई है। जहां बुवाई क्षेत्रफल 47 फीसदी कम हुआ है। इसके अलावा वारंगल में 11 फीसदी और करीमनगर में 8 फीसदी की कमी आई है। इसके विपरीत निजामाबाद में 45 फीसदी और गुंटूर में 10 फीसदी बुवाई क्षेत्रफल बढ़ा है। दूसरी ओर तमिलनाडु और कर्नाटक में अच्छी बारिश के चलते हल्दी के बुवाई क्षेत्रफल में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन राज्यों में विशेषकर मैसूर और इरोड बुवाई बढ़ी है। बारिश की कमी के चलते महाराष्ट्र में भी बुवाई प्रभावित हुई है। महाराष्ट्र में बुवाई क्षेत्रफल करीब 10-12 फीसदी की कमी का अनुमान है। यहां सांगली और नांदेड़ में बारिश की कमी से किसानों ने बुवाई कम की है।बुवाई क्षेत्रफल में कमी को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल उत्पादन में 10 फीसदी कमी हो सकती है। पिछले साल कुल उत्पादन 45 लाख बोरी (एक बोरी 65 किलो) हुआ था जिसमें सबसे बड़े उत्पादक राज्य आंध्रप्रदेश में 23 लाख बोरी का उत्पादन हुआ था। दूसरी ओर इस समय तक पिछले साल का बकाया स्टॉक भी काफी कम है। निजामाबाद में हल्दी के व्यापारी पूनम चंद गुप्ता ने बताया कि इस समय स्टॉक करीब 18 लाख बोरी है। प्रति माह करीब दो से ढाई लाख बोरी की खपत के अनुसार नई फसल के आने तक स्टॉक 5-6 लाख बोरी का स्टॉक ही बचेगा। हल्दी की नई फसल फरवरी 2009 के अंत तक बाजार में आएगी। फरवरी 2008 में हल्दी का बकाया स्टॉक 9 लाख बोरी था। कमजोर स्टॉक को देखते हुए हल्दी के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है। सोमवार को निजामाबाद में हल्दी के दाम 3825 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर रहे। जबकि इरोड में दाम 3900 रुपये प्रति क्विंटल रहे। (Business Bhaskar)
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