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09 सितंबर 2008

बाढ़ व हिंसा से ड्राईफ्रूट की त्यौहारी खरीदारी गायब

बिहार सहित देश के कई इलाकों में आई बाढ़ और हिंसा का असर ड्राईफ्रूट पर ऐसा पड़ा है कि त्यौहार का रंग चढ़ ही नहीं पा रहा है। त्योहारों का सीजन शुरू होने के बावजूद मांग में भारी कमी देखी जा रही है जबकि इस समय परंपरागत रूप से त्योहारी मांग अधिक निकलती है। ड्राईफ्रूट की त्योहारी मांग में कमी होने से इनकी कीमतों में भी मंदी देखी जा रही है।ड्राईफ्रूट्स टड्रिंग फर्म आरके ओवरसीज के रविंदर कुमार अग्रवाल ने बिÊानेस भास्कर को बताया कि बिहार सहित देश के कई इलाकों में बाढ़ और हिंसा से त्योहारी सीजन शुरू होने के बावजूद ड्राईफ्रूट की मांग में भारी कमी देखी जा रही है जबकि हर साल इस समय अन्य राज्यों से इनकी जबरदस्त मांग रहती है। ड्राईफ्रूट कारोबारियोंके मुताबिक इस बार त्योहारी मांग पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 20 फीसदी ही है। दिल्ली के खारी बावली स्थित ड्राईफ्रूट बाजार में इनकी कीमतों में मंदी देखी जा रही है। खारी बाबली सर्व व्यापार महासंघ के सचिव ऋषि मंगला ने बताया कि बाजार में काजू पांच से सात रुपये गिरकर 350 से 500 रुपये, बादाम गिरी 15 रुपये गिरकर 335 रुपये और काबुल बादाम 315 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं।पिस्ता और किशमिश के भाव में स्थिरता देखी जा रही है। बाजार में किशमिश में इंडियन का भाव 70 से 300 और आयातित का 300 से 400 रुपये प्रति किलो और पिस्ता गिरी 550, पिस्ता डोडी का भाव 450 रुपये प्रति किलो है। उनका कहना है कि आगे त्योहारी मांग निकलने पर कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। त्योहार के सीजन में ड्राईफ्रूट की मांग 70 फीसदी तक बढ़ जाती है।अग्रवाल का कहना है कि इस समय दिल्ली के बाजार से राज्यों को ड्राईफ्रूट की जबरदस्त त्योहारी मांग निकलती है जबकि दिल्ली की स्थानीय त्योहारी मांग अक्टूबर के शुरुआत में निकलती है।खारी बावली मंडी ड्राईफ्रूट का देश का सबसे बडा बाजार है। इस बाजार में ड्राईफ्रूट का करीब 1000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार किया जाता है। देश में बादाम और पिस्ता का अमेरिका, ईरान, और अफगान से आयात किया जाता है जबकि देश में केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र उड़ीसा और गोवा में काजू का उत्पादन किया जाता है। किशमिश का उत्पादन नासिक में होता है। (Business Bhaskar)

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