08 सितंबर 2008
चार कमोडिटी पर पाबंदी बढ़ने से कारोबारी मायूस
मुंबई : सोया ऑयल, चना, रबर और आलू के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध बढ़ाने जाने से कारोबारी मायूस हैं। उनका कहना है कि इससे कामकाज पर असर पड़ेगा। कारोबारियों का यह भी कहना है कि पाबंदी की वजह से हेजिंग यानी जोखिम कम करने की ताकत उनके हाथ नहीं आएगी। सरकार ने मई में इन चार कमोडिटीज के वायदा कारोबार पर रोक लगाई थी। कारोबारियों की दलील है कि महंगाई और वायदा कारोबार के बीच कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि वायदा बाजार में रबर पर रोक लगाए जाने के चार महीने बाद भी इसकी कीमतें करीब 15 फीसदी ज्यादा यानी 120-141 रुपए के बीच हैं। केंद्र सरकार ने मई में सोया ऑयल, चना, रबर और आलू की फ्यूचर ट्रेडिंग पर 4 महीने के लिए पाबंदी लगा दी थी। कमोडिटी वायदा बाजार रेगुलेटर फॉरवर्ड मार्केट कमिशन (एफएमसी) ने अब प्रतिबंध की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी है। इससे पहले सरकार ने महंगाई दर के 2 अंकों में पहुंचने के बाद जून 2008 में चावल और गेहूं के वायदा कारोबार पर भी रोक लगा दी थी। वहीं कुछ ब्रोकरों का मानना है कि राजनीतिक दबाव के कारण सरकार को पाबंदी बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। आनंद राठी कमोडिटीज के रिसर्च हेड किशोर ने बताया, 'इन चार कमोडिटीज के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाए जाने से कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। सरकार इन कमोडिटीज के पर्याप्त भंडारण और नई फसल के आने के बाद इनसे प्रतिबंध हटाने के बारे में सोच रही है।' इंदौर स्थित सोयाबीन ऑयल प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसओपीए) के राजेश अग्रवाल ने बताया, 'उद्योग जगत सरकार से यही आस लगाए बैठा था कि इन कमोडिटीज पर प्रतिबंध हटाए जाने के बाद इनमें हेजिंग का रास्ता साफ हो जाएगा।' पल्स एम्पोर्ट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट के. सी. भारतीया का कहना है, 'सरकार ने महंगाई के देखते हुए प्रतिबंध की अवधि और बढ़ा दी है। हालांकि, इससे कारोबारियों को निराशा हुई है। जब कारोबारियों को हेजिंग का लाभ नहीं मिलेगा तो उनकी मुश्किलों और बढ़ेंगी।' विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े ब्रोकरों की वजह से वायदा कारोबार पर पाबंदी के बावजूद रबर की कीमतें कम नहीं हुई है। केरल के रबर कारोबारी बिजोष थॉमस का कहना है, 'वायदा कारोबार पर पाबंदी का सबसे ज्यादा असर उत्पादकों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। कीमतें बढ़ने के बाद ब्रोकिंग कमीशन लगभग दोगुना हो गया है।' इन कमोडिटीज पर प्रतिबंध लगाए जाने से कमोडिटी एक्सचेंजों के कारोबार पर भी असर पड़ा है। (ET Hindi)
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