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08 सितंबर 2008

ग्वार में कारोबार

मौसम में हो रहे बार-बार बदलाव का असर ग्वार की कीमतों में उतार-चढ़ाव के रुप में देखा जा रहा है। पिछले एक महीने के दौरान उत्पादक मंडियों में ग्वार की कीमतें 140-170 रुपये प्रति `िंटल तक घट-बढ़ चुकी हैं। पिछले सप्ताह के दौरान ग्वार के भाव में गिरावट देखी गई है। यह गिरावट मुख्य रुप से उत्पादक इलाकों में बारिश की संभावना की वजह से हुई है। जबकि पिछले महीने के दूसर पखवाड़े के दौरान उत्पादक इलाकों में बारिश कम होने की वजह से ग्वार के भाव के भाव में 170 रुपये तक की बढ़त देखने को मिली थी। जबकि इससे पहले ग्वार का रकबा बढ़ने को लेकर हुए कारोबार के दौरान कीमतों में करीब 400 रुपये `िंटल की गिरावट देखी गई थी। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिवस को बीकानेर में ग्वार सीड 1735 रुपये, श्रीगंगानगर में 1695 रुपये और जोधपुर व जैसलमेर की मंडियों में इसका भाव करीब 1790-1820 रुपये `िंटल रहा। पिछले महीनें के दूसर पखवड़े के दौरान इसके भाव 1870-1890 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर देखे गए थे।दरअसल इस साल मानसून जल्दी आने और ग्वार उत्पादक क्षेत्रों में समय से पहले बुवाई तथा उत्पादन में 20 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी के पूर्वानुमान से एक माह पहले ग्वार के भाव 1700 रुपए और कहीं-कहीं इससे भी नीचे आ गए थे। लेकिन अगस्त के दूसरे पखवाड़े में ग्वार उत्पादक राज्यों में बारिश नहीं होने से ग्वार ने तेजी की राह पकड़ ली व एक महीने में इसके भाव करीब 1890 रुपए `िंटल पहुंच गये। अब बादलों के लौटने से ग्वार की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। उत्पादक इलाकों में बारिश की दरकार है। यदि आठ-दस दिनों में ग्वार उत्पादक राज्यों में बारिश नहीं होती है तो ग्वार के अनुमानित उत्पादन में गिरावट आनी तय है। एमसीएक्स में पिछले सप्ताह शनिवार को ग्वार सीड अक्टूबर वायदा 1765 रुपए क्विंटल पर बंद हुआ। जबकि एक महीना पहले यह 1803 रुपये प्रति `िंटल पर था। स्टॉक पर नजर डालें तो अक्टूबर से शुरू होने वाले सीजन के लिए करीब 25 लाख बोरी बकाया स्टॉक रहने की उम्मीद है। यदि बारिश होती है तो अगले सीजन में ग्वार की कुल उपलब्धता करीब 1.15 करोड़ बोरी रह सकती है। पिछले साल यहां से करीब 2.15 लाख टन ग्वार गम का निर्यात हुआ है। वहीं इस साल मई तक देश से करीब डेढ़ लाख टन ग्वार गम का निर्यात हो चुका है। आगामी सीजन के दौरान घरलू मांग के साथ निर्यात मांग में भी इजाफा हो सकता है।वैश्विक स्तर पर भारत व पाकिस्तान ग्वार के प्रमुख उत्पादक व निर्यातक हैं। दुनियाभर में ग्वार के सकल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी जहां 80 प्रतिशत है वहीं पाकिस्तान की हिस्सेदारी 20 फीसदी है। भारत और पाकिस्तान अमरीका, यरोपीय संघ, अरब देशों तथा चीन को ग्वारगम का निर्यात करते हंै। ग्वार का प्रयोग माइनिंग, पेट्रोलियम ड्रिलिंग, टेक्सटाइल इंडस्ट्री, स्वास्थ्यवर्घक दवाओं और पशुओं के भोजन के लिए किया जाता है। देश में ग्वार का उत्पादन राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, पंजाब व मध्यप्रदेश में होता है। राजस्थान की हिस्सेदारी साठ फीसदी से ज्यादा है। इसके बाद हरियाणा है। राजस्थान में सौ से ज्यादा ग्वारगम फैक्ट्रियों में ग्वारगम व अन्य सह उत्पादों का उत्पादन किया जा रहा है। (Business Bhaksar)

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