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09 सितंबर 2008

पूसा 1121 चावल निर्यात करने की मंजूरी

पूसा 1121 चावल निर्यात करने की मंजूरी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पूसा 1121 चावल के लिए निर्यात दरवाजे तत्काल प्रभाव से खोल दिए हैं। पिछले सप्ताह शनिवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस संबंध अधिसूचना जारी की है। सरकार ने पहले 15 अक्टूबर से गैर बासती पूसा 1121 चावल निर्यात की अनुमति दी थी। उधर बासमती का दिलाने की कोशिश में जुटे राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन का मानना है कि इससे किसानों को कोई फायदा होने वाला नहीं है।इससे पहले डीजीएफटी ने पूसा 1121 चावल को 15 अक्टूबर से निर्यात होने की अधिसूचना जारी की थी। लेकिन बाद में इसे निरस्त करते हुए तत्काल प्रभाव से निर्यात को मंजूरी दे दी है। हालांकि केंद्र सरकार ने अपने इस नए फैसले के किसी कारण का खुलासा नहीं किया है। चालू साल के दौरान महंगाई का हवाला देकर सरकार ने चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि सरकार के इस फैसले के बावजूद देश भर के हाजिर बाजारों में चावल के कारोबार पर कोई असर नही देखा जा रहा है।कारोबारियों के मुताबिक चूंकि चालू सीजन समाप्ति की ओर है। मौजूदा समय में निर्यात भी कम हो जाता है। वहीं आगामी सीजन में चावल के उत्पादन में तगड़ी बढ़त की संभावना से कीमतों पर काफी दबाव है। रकबा बढ़ने की वजह से आगामी सीजन के दौरान घरलू स्तर पर चावल का रिकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि इससे किसानों को किसी तरह का फायदा होने वाला नहीं है। पूसा 1121 उगाने वाले किसानों को फायदा तभी हो सकता है जब इसे बासमती दिया जाए। पंजाब सरकार भी इस मांग लेकर काफी सक्रिय है। उसने कई बार केंद्र के समक्ष यह मुद्दा उठाया। पंजाब सरकार ने अपने स्तर पर पूसा 1121 को बासमती का दर्जा दे भी दिया है लेकिन केंद्र से दर्जा मिलने के बाद ही बासमती के रूप में इसके निर्यात का रास्ता खुलेगा। सेतिया के अनुसार पिछले अप्रैल में रोक लगने से पहले 42 से 45 रुपये प्रति किलो के मूल्य पर पूसा 1121 चावल का निर्यात किया गया था। इसमें किसानों को ज्यादा फायदा नहीं हुआ। इस बार भी बासमती का दर्जा दिए बगैर निर्यात की अनुमति दिए जाने से किसानों को कोई लाभ नहीं होगा। सरकार ने दूसरे मोटे चावलों का निर्यात अभी भी प्रतिबंधित कर रखा है। (Business Bhaskar)

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