11 सितंबर 2008
आंध्र में भी नई मक्का की आवक शुरू
उत्तर प्रदेश के बाद आंध्र प्रदेश की निजामाबाद मंडी में मक्का की नई फसल की आवक शुरू हो गई है तथा उम्मीद की जा रही है कि चालू माह के आखिर तक राज्य की अन्य मंडियों में भी आवक का दबाव बनेगा, जिससे इसके मौजूदा भावों में 80 से 100 रुपये प्रति `िंटल की गिरावट आ सकती है। केंद्र सरकार ने मक्का के निर्यात पर 15 अक्टूबर तक रोक लगा रखी है जबकि आगामी दिनों में अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व राजस्थान में नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी। अत: आगामी दिनों में मक्का की तेजी-मंदी काफी हद तक इस पर निर्भर करगी कि क्या केंद्र सरकार मक्का के निर्यात पर लगी रोक को हटाती है या नहीं। कोलकाता के प्रमुख मक्का व्यापारी बिमल बंगानी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि अगर केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर के बाद मक्का के निर्यात पर लगी रोक को हटा लिया तो फिर इसके भाव उत्पादक मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर ही बने रहेंगे लेकिन अगर निर्यात पर लगी रोक की अवधि को आगे बढ़ा दिया गया तो फिर अक्टूबर माह में लगभग सभी उत्पादक राज्यों में आवकों का दबाव बन जाएगा। ज्ञात हो कि सरकार ने मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 220 रुपये प्रति `िंटल की बढ़ोतरी कर भाव 840 रुपये प्रति `िंटल तय किया है। उन्होंने बताया कि चालू फसल सीजन में देश में मक्का के बुवाई क्षेत्रफल में कमी जरूर आई है लेकिन प्रमुख उत्पादक राज्यों कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, राजस्थान व मध्य प्रदेश में मौसम फसल के अनुकूल रहा है इसलिए इन राज्यों में इसके उत्पादन में गत वर्ष के मुकाबले बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। हालांकि महाराष्ट्र में मानसून लेट होने से बुवाई लेट हुई है लेकिन हाल ही में हुई वर्षा पछेती फसल के लिए काफी अच्छी मानी जा रही है। उनका मानना है कि चालू खरीफ सीजन में देश में मक्का का कुल उत्पादन 135 से 140 लाख टन होने की संभावना है। ज्ञात हो कि 2007-08 में देश में खरीफ व रबी सीजन में मक्का का कुल उत्पादन193 लाख टन का हुआ था। कृषि मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन में देश में मक्का की बुवाई 69.93 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जो कि गत वर्ष के मुकाबले कम है। मालूम हो कि बीते वर्ष की समान अवधि में देश में इसकी बुवाई 72.85 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।दिल्ली के नया बाजार स्थित मक्का के प्रमुख व्यापारी राजेश गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में दिल्ली बाजार में मक्का की आवक उत्तर प्रदेश से हो रही है जबकि इस समय हरियाणा व पंजाब के पोल्ट्री फीड निर्माताओं की मांग बराबर आ रही है। उनके मुताबिक आने वाले दिनों में दिल्ली बाजार में उत्तर प्रदेश से तो आवक का दबाव बनेगा ही, साथ अन्य उत्पादक राज्यों से भी आवक बनेगी, जिससे मक्का के मौजूदा भावों में गिरावट तो आ सकती है लेकिन अगर केंद्र सरकार ने मक्का के निर्यात पर लगी रोक को हटा लिया तो फिर निर्यातकों की मांग निकलने से भविष्य में तेजी बन सकती है। (Business Bhaksar)
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