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11 सितंबर 2008

दाम गिरने से भारतीय काली मिर्च की विदेशी बाजारों में बढ़ी पूछ

मुंबई : देश में काली मिर्च की कीमतों में गिरावट विदेश में इसकी मांग बढ़ रही है। हफ्ते भर में इसके दाम में 200 डॉलर प्रति टन की कमी आ चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी काली मिर्च सस्ती हुई है और इसी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर पड़ने की वजह से भी काली मिर्च के दाम में यह गिरावट आई है। इसका फायदा उठाकर विदेशी खरीदार अगले दो महीनों तक का शिपमेंट बुक कर चुके हैं। भारतीय काली मिर्च की क्वालिटी बेहतर होती है। इसलिए विदेशों में इसकी काफी मांग है। भारत में काली मिर्च की कीमत जब बढ़ी हुई थी, तब यहां के आयातक ब्राजील और वियतनाम से इसे खरीद रहे थे। अब घरेलू बाजार से काली मिर्च के निर्यात का बाजार जोर पकड़ रहा है। भारत में एस्टा ग्रेड की काली मिर्च की कीमत 3400 डॉलर प्रति टन से घटकर 3150 डॉलर प्रति टन रह गई है। कोच्चि के कारोबारी जोजान मलायिल का कहना है कि घरेलू बाजार में काली मिर्च अभी भी वियतनाम से ज्यादा है। हालांकि, अच्छी क्वालिटी की वजह से भारतीय काली मिर्च में विदेशी खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ी है। वियतनाम में एस्टा ग्रेड काली मिर्च की कीमत 3100 डॉलर प्रति टन है।घरेलू बाजार में ऊंची कीमतों की वजह से काली मिर्च निर्यातकों को 2008 के पहले चार महीनों में जबरदस्त झटका लगा था। पिछले साल के शुरू के चार महीनों से तुलना की जाए तो इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच निर्यात 21 परसेंट कम यानी सिर्फ 9500 टन रहा। स्पाइस बोर्ड ने पूरे साल के लिए 35,000 टन काली मिर्च के निर्यात का लक्ष्य रखा किया है। कारोबारियों का मानना है कि स्टॉक की कमी की वजह से इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है। स्पाइस बोर्ड का दावा है कि इस साल करीब 50,000 टन काली मिर्च की पैदावार होगी। हालांकि, जानकारों के मुताबिक इस लक्ष्य को हासिल करने में दिक्कत आएगी। मलायिल का कहना है, 'काली मिर्च की कीमत एक स्तर से नीचे नहीं आएगी।' कोच्चि में एनसीडीईएक्स क्वालिटी काली मिर्च का हाजिर भाव 138-140 रुपए प्रति किलो है। एक अन्य कारोबारी ने बताया कि इस भाव पर भी लोग काली मिर्च बेचने के लिए आगे नहीं आ रहे। उन्हें इसके दाम में और तेजी आने की उम्मीद है। (ET Hindi)

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