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09 सितंबर 2008

एमएसपी और खरीद मूल्य को अलग करेगी सरकार

नई दिल्ली : भविष्य में सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और अनाज के खरीद मूल्य को अलग-अलग करने की योजना बना रही है। इस संबंध में प्रधानमंत्री की आथिर्क सलाहकार परिषद (ईएसी) की तरफ से आए प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। पिछले महीने आथिर्क मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) को भेजे नोट में यह प्रस्ताव दिया गया था। इसमें कहा गया है कि इससे सरकार खाद्य सब्सिडी पर बचत कर सकेगी, खासकर तब जब फसल खराब हो जाए। किसानों के लिए यह तब भी लाभकारी होगी, जब अधिक उत्पादन होने पर बाजार में कीमतें गिर जाती हैं। ऐसी स्थिति में किसान एमएसपी पर अपने उत्पाद बेच सकेंगे। दोनों कीमतों को अलग करने से फसल खराब होने पर किसान बाजार के मुताबिक कीमत और सरकार द्वारा घोषित लाभकारी मूल्य हासिल कर सकेंगे। इससे सरकार भी अपने बफर स्टॉक, जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) और दूसरे कल्याणकारी योजनाओं के लिए खरीद को बढ़ा सकेगी। इससे सरकार ऊंची कीमतों पर अनाजों के आयात से भी बच जाएगी। साल 2006 और 2007 में सरकार को ऊंची कीमत पर विदेशों से अनाज आयात करना पड़ा। इन 2 सालों में सरकार को करीब 4,000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े। ईएसी ने पिछले महीने सीसीईए को लिखे नोट में कहा है, 'पहले भी एमएसपी और खरीद मूल्य अलग-अलग होते थे, इसे फिर से शुरू करने की जरूरत है।' सीएसीपी द्वारा 2008-09 के लिए धान सहित अन्य खरीफ फसलों पर प्रस्तावित एमएसपी पर सरकार ने ईएसी का विचार जानना चाहा था। कुछ कृषि अर्थशास्त्री एमएसपी में लगातार बढ़ोतरी की मांग करते रहते हैं। इस कीमत पर राज्य अपनी कल्याणकारी योजनाओं और पीडीएस कार्यक्रमों के लिए अनाजों की खरीद करते हैं। यूपीए सरकार से पहले देश भर की भंडारण एजेंसियों के पास काफी अनाज रहता था। इसकी वजह से खाद्य सब्सिडी बिल भी बढ़ता रहता था। 2008-09 में कृषि की विकास दर 2.5 फीसदी रहने का अनुमान है। 2007-08 में यह 3.6 फीसदी थी। कृषि अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया है कि एमएसपी में सभी प्रबंधन लागत, पैदावार लागत को शामिल करना चाहिए। इससे एमएसपी पर राजनीतिक या किसी दूसरे दबाव का असर नहीं पड़ेगा। वहीं, दूसरी तरफ अनाज की खरीद मूल्य खुले बाजार के मुताबिक तय की जानी चाहिए। (E T Hindi)

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