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18 अक्टूबर 2025

चालू तेल वर्ष के पहले 11 महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 3 फीसदी कम - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष के पहले 11 महीनों नवंबर-24 से सितंबर-25 के दौरान देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 3 फीसदी कम होकर 14,330,723 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 14,775,000 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2024-25 के सितंबर 2025 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 51 फीसदी बढ़कर 1,639,743 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल सितंबर में इनका आयात 1,087,489 टन का हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 1,604,643 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 35,100 टन का हुआ है।

इसके अलावा नेपाल से साफ्टा समझौते के तहत देश में मुख्य रूप से रिफाइंड सोया तेल और सूरजमुखी तेल तथा थोड़ी मात्रा में आरबीडी पामोलिन और रेपसीड तेल का आयात शून्य शुल्क पर हुआ है। नवंबर 2024 से अगस्त 2025 (10 महीने) के दौरान नेपाल से कुल आयात 6.46 लाख टन का हुआ।

अत: नवंबर 2024 से सितंबर 2025 के दौरान देश में कुल खाद्य तेलों का आयात 139.8 लाख टन + नेपाल से 6.46 लाख टन को मिलाकर कुल 146.26 लाख टन का हुआ है।

एसईए के अनुसार सीपीओ और आरबीडी पामोलिन के बीच आयात शुल्क अंतर को 31 मई, 2025 से 8.25 फीसदी से बढ़ाकर 19.25 फीसदी करने के बाद, रिफाइंड तेल का आयात धीरे-धीरे कम हो गया और वास्तव में सितंबर '25 में शून्य आयात (अप्रैल 21 के बाद) की सूचना मिली है जबकि सितंबर 24 में 84,279 टन का आयात हुआ था। शुल्क अंतर बढ़ाने का सरकार का फैसला एक साहसिक और समय पर लिया गया कदम है। इसने रिफाइंड पामोलिन के आयात को हतोत्साहित करना शुरू कर दिया और मांग को वापस क्रूड तेल की ओर मोड़ दिया है, जिससे घरेलू रिफाइनिंग क्षेत्र को पुनर्जीवित किया गया। यह कदम प्रधानमंत्री के "मेक इन इंडिया" के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ ही रोजगार के अवसर पैदा करता है।

चालू खरीफ सीजन में देश देश में मानसूनी बारिश सामान्य से अधिक हुई है। 3 अक्टूबर 2025 तक कुल खरीफ तिलहन की फसलों का रकबा 190.13 लाख हेक्टेयर था, जो पिछले वर्ष के 200.75 लाख हेक्टेयर की तुलना में 10.62 लाख हेक्टेयर कम है। चालू खरीफ में मूंगफली की बुआई 48.36 लाख हेक्टेयर में (पिछले वर्ष 49.96 लाख हेक्टेयर की तुलना में), सोयाबीन की 120.45 लाख हेक्टेयर में (129.55 लाख हेक्टेयर की तुलना में) और कपास की 110.03 लाख हेक्टेयर में (112.97 लाख हेक्टेयर की तुलना में) कम है। सोयाबीन और कपास के रकबे में कमी मुख्यतः मक्का की ओर किसानों का रुख रहा, जो पिछले साल के 84.30 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 94.95 लाख हेक्टेयर हो गया। इस बीच सोपा ने 2025 तक सोयाबीन खरीफ का उत्पादन 105 लाख टन होने का अनुमान लगाया है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 125.81 लाख टन हुआ था। इसके अलावा, एसईए ने गुजरात में मूंगफली फसल सर्वेक्षण के अनुसार, खरीफ सीजन 2025-26 में मूंगफली का उत्पादन 46.07 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 2024-25 के 42.19 लाख टन से ज्यादा है।

नवंबर 2024 से सितंबर 2025 के दौरान 995,711 टन रिफाइंड तेल (आरबीडी पामोलीन) का आयात किया गया, जबकि नवंबर 2023 से सितंबर 2024 के दौरान 1,695,080 टन रिफाइंड तेल (आरबीडी पामोलीन) का आयात किया गया था। नवंबर 2023 से सितंबर 2024 के दौरान 12,840,875 टन रिफाइंड तेल (आरबीडी पामोलीन) के आयात की तुलना में इस दौरान 12,987,089 टन क्रूड तेल का आयात किया गया। आरबीडी पामोलीन के कम आयात के कारण रिफाइंड तेल का अनुपात 12 फीसदी से घटकर 7 फीसदी रह गया, जबकि सोया तेल के आयात में वृद्धि के कारण क्रूड तेल का अनुपात 88 फीसदी से बढ़कर 93 फीसदी हो गया।

अगस्त के मुकाबले सितंबर में आरबीडी पामोलीन और क्रूड पाम तेल के दाम भारतीय बंदरगाह पर तेज हुए हैं। सितंबर में आरबीडी पामोलिन का भाव भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 1,119 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि अगस्त में इसका भाव 1,105 डॉलर प्रति था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर सितंबर में बढ़कर 1,164 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि अगस्त में इसका भाव 1,151 डॉलर प्रति टन था। हालांकि क्रूड सोया तेल का भाव अगस्त में भारतीय बंदरगाह पर 1,195 डॉलर प्रति टन था, जोकि सितंबर में घटकर 1,182 डॉलर प्रति टन रह गया।

गुजरात में कपास की बुआई 11.59 फीसदी घटी, मूंगफली के साथ ही अरहर की बढ़ी

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में गुजरात में कपास की बुआई में 11.59 फीसदी की कमी आई है, लेकिन खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई 15.40 फीसदी बढ़ी है। इस दौरान अरहर की बुआई पिछले साल की तुलना में 27 फीसदी से ज्यादा क्षेत्रफल में हुई है।


राज्य की कृषि निदेशालय के अनुसार 13 अक्टूबर तक राज्य में मूंगफली की बुआई बढ़कर 2,202,337 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 1,908,388 हेक्टेयर में ही हुई थी। इसी तरह से कैस्टर सीड की बुआई बढ़कर 683,080 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 646,334 हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। सोयाबीन की बुआई राज्य में 277,702 हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 300,773 हेक्टेयर की तुलना में कम है। राज्य में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 3,204,689 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई केवल 2,905,716 हेक्टेयर में ही हुई थी।

कपास की बुआई राज्य में 2,096,513 हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2,371,474 हेक्टेयर की तुलना में 11.59 फीसदी कम है।

खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 310,247 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 244,250 हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य दालों में उड़द की बुआई 83,743 हेक्टेयर में तथा मूंग की बुआई 48,914 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 83,859 हेक्टेयर एवं 55,222 हेक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में राज्य में 465,169 हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल के 406,711 हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में 1,381,492 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 1,374,062 हेक्टेयर में ही हुई थी। धान की रोपाई 905,382 हेक्टेयर में, बाजरा की 172,588 हेक्टेयर में, मक्का की 280,978 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 886,779 हेक्टेयर में, 168,315 हेक्टेयर में तथा 286,060 हेक्टेयर में हुई थी।

ग्वार सीड की बुआई 75,180 हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 85,221 हेक्टेयर की तुलना में कम है।

14 अक्टूबर 2025

चालू खरीफ सीजन में गुजरात में 46.07 लाख टन मूंगफली के उत्पादन का अनुमान - एसईए

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान गुजरात में मूंगफली का आरंभिक उत्पादन अनुमान 46.07 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इससे पिछले साल कुल उत्पादन 46 लाख टन के लगभग बराबर ही है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने 9 से 11 अक्टूबर 2025 के दौरान गुजरात के गोंडल, अमरेली, जूनागढ़, केशोद, मांगरोल, पोरबंदर और अडवाना सहित सौराष्ट्र के विभिन्न स्थानों पर किसानों, तेल मिल मालिकों, एस ई इकाइयों, एचपीएस निर्माताओं, व्यापारियों, कमीशन एजेंटों, दलालों आदि के साथ बैठक आयोजित की। बैठकों में फसल की संभावनाओं और फसल से उनकी अपेक्षाओं तथा अन्य विवरणों पर चर्चा की गई।

पिछले फसल सीजन में गुजरात में मूंगफली के उत्पादन का आरंभिक अनुमान 42.2 लाख टन आंका गया था। हालांकि, उपलब्धता के आंकड़ों और प्रसंस्करण के आंकड़ों को संशोधित करने के बाद, यह संख्या 46 लाख टन हो गई थी, जो कि आरंभ अनुमान से 10 फीसदी अधिक है। इस प्रकार, 2024-25 के लिए अंतिम उत्पादन आंकड़ा 46 लाख टन है।

चालू खरीफ सीजन 2025-26 में राज्य में मूंगफली की खेती का क्षेत्रफल लगभग 3 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, लेकिन कुल उत्पादकता में गिरावट आने का अनुमान है। उत्पादकता पिछले वर्ष के 2,210 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर 2,092 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने की आशंका है। यह गिरावट मुख्यतः मध्य जुलाई से मध्य अगस्त तक सूखे के कारण हुई है, जिसके बाद अत्यधिक वर्षा हुई जिससे पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

एसईए के अनुसार चालू खरीफ सीजन में बढ़े हुए रकबे के बावजूद मूंगफली का उत्पादन पिछले सीजन के समान लगभग 46 लाख टन ही होने का अनुमान। क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है, लेकिन इस बार उत्पादकता में कमी कमी आने की आशंका है।

केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन के लिए मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 7,263 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है, जबकि अच्छी गुणवत्ता (एफएक्यू) और बोल्ड किस्म की मूंगफली का वर्तमान मंडी मूल्य 3,600 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि चालू खरीफ में मंडियों में कीमतों को समर्थन देने के लिए नेफेड द्वारा अधिक मात्रा में खरीद की जाएगी।

चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में बासमती चावल का निर्यात 19 फीसदी बढ़ा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान बासमती चावल का निर्यात 18.91 फीसदी बढ़कर 27.37 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 23 लाख टन का हुआ था।


कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से अगस्त के दौरान बासमती चावल का निर्यात 20,479.89 करोड़ रुपये का हुआ है।

गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में 5,616,904 टन का हुआ है, जोकि मूल्य के हिसाब से 20,034.62 करोड़ रुपये का है।

पंजाब और हरियाणा में पिछले दिनों हुई भारी बारिश एवं बाढ़ से बासमती एवं गैर बासमती धान की फसल को नुकसान हुआ है। इसके बावजूद भी जानकारों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश से चावल का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश से बासमती चावल का निर्यात 60.65 लाख टन और गैर बासमती चावल का निर्यात 141.28 लाख टन का हुआ था।

चालू खरीफ सीजन में देश के बासमती चावल के कुल उत्पादन में हल्की कमी आने का अनुमान है। पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख बासमती उत्पादक राज्यों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान भारी बारिश एवं बाढ़ जैसे हालात बनने से कुल उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि अन्य राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में उत्पादन बढ़ने की संभावना है। पंजाब में बासमती धान की फसल को 5 से 7 फीसदी और हरियाणा में 2 से 3 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है।

पंजाब एवं हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश और राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश की मंडियों में पूसा 1,509 किस्म के धान के साथ ही परमल आदि किस्मों की आवकों का दबाव बना हुआ है। इन राज्यों में मौसम साफ है इसलिए आगामी दिनों 1,718 के साथ 1,121 एवं 1,409 किस्म के धान की आवक बढ़ेगी। बासमती धान की आवक मध्य नवंबर के बाद बनने की उम्मीद है।

पिछले सप्ताह उत्पादक मंडियों में बासमती धान के साथ ही चावल की कीमतों में मंदा आया था, हालांकि नीचे दाम पर बिकवाली कम होने से इनकी कीमतों में हल्का सुधार आया है। पूसा 1,121 स्टीम बासमती चावल के भाव 8,300 से 8,500 रुपये और इसके सेला चावल के दाम 7,300 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे। 1,121 किस्म के गोल्डन सेला चावल के दाम 8,000 से 8,200 रुपये प्रति क्विंटल रहे। पूसा 1,509 किस्म के स्टीम चावल के भाव 6,500 से 6,700 रुपये और इसके सेला चावल के 6,200 से 6,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

हरियाणा की करनाल मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान के दाम शनिवार को 2,900 से 3,050 रुपये और बरवाला मंडी में 3,075 रुपये तथा 1,847 किस्म के दाम 2,600 से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल रहे। पंजाब की कोटकपूरा मंडी में 1,509 किस्म के धान के दाम 3,275 रुपये और 1,718 किस्म के 3,160 रुपये तथा राजस्थान की बूंदी मंडी में 1,509 किस्म के धान के दाम 2,550 से 2,931 रुपये तथा सुगंधा के 2,300 से 2,531 रुपये और 1,847 किस्म के 2,350 से 2,600 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

11 अक्टूबर 2025

गुजरात में मूंगफली एवं कैस्टर सीड का उत्पादन अनुमान ज्यादा, कपास का कम - कृषि निदेशालय

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान गुजरात में मूंगफली के साथ ही कैस्टर सीड का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है, जबकि इस दौरान कपास के उत्पादन में कमी आने की आशंका है।

राज्य के कृषि निदेशालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार राज्य में मूंगफली का उत्पादन बढ़कर 66.1 लाख टन होने की उम्मीद है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 14 फीसदी अधिक है। इसी तरह से अरंडी का उत्पादन बढ़कर 14.35 लाख टन होने का अनुमान है, जो कि पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी अधिक है।

राज्य में कपास का उत्पादन 73.32 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलोग्राम) होने का अनुमान है, जो कि पिछले खरीफ सीजन के 88.31 लाख गांठ से कम है। इसका मुख्य कारण सौराष्ट्र और उत्तरी गुजरात में पैदावार में आई कमी है।

राज्य में चालू खरीफ सीजन में दालों का उत्पादन 4.85 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 3.77 लाख टन से अधिक है। इनमें से, अरहर का उत्पादन पिछले सीजन की तुलना में 27 फीसदी बढ़कर 3.6 लाख टन होने का अनुमान है। बुआई रकबे में हुई बढ़ोतरी के कारण इसका उत्पादन अनुमान ज्यादा है। अनुकूल मौसम और समय पर बुवाई ने प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में दालों के उत्पादन में बढ़ोतरी में योगदान दिया है।

राज्य में सोयाबीन का उत्पादन 5.52 लाख टन से घटकर 4.71 लाख टन रह गया है, जो सौराष्ट्र और मध्य गुजरात के कुछ हिस्सों में कम बुवाई क्षेत्र और कम उत्पादकता को दर्शाता है।

चावल का उत्पादन 22.25 लाख टन पर लगभग अपरिवर्तित रहा, जबकि पैदावार में कमी आने के कारण मक्का का उत्पादन 5.82 लाख टन से घटकर 5.34 लाख टन रह गया। बाजरा का उत्पादन 3.03 लाख टन होने का अनुमान है। बाजरा और ज्वार के रकबे और उत्पादन दोनों में मामूली वृद्धि की उम्मीद है।

आरंभिक अनुमान के अनुसार राज्य में ग्वार सीड का उत्पादन लगभग 60,950 टन होने का अनुमान है।


बेमौसम बारिश से कपास की पिकिंग में देरी से उत्तरी महाराष्ट्र में जिनर्स मुश्किल में

नई दिल्ली। उत्तरी महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में हाल ही में हुई भारी बारिश एवं जलभराव से कपास की नई फसल की पिकिंग में देरी से क्षेत्र की जिनिंग मिलों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश जिनर्स ने अगले पंद्रह से 20 दिनों के लिए संचालन बंद कर दिया है।


जानकारों के अनुसार महाराष्ट्र में आमतौर पर अक्टूबर के पहले सप्ताह में नई कपास की पहली पिकिंग आरंभ हो जाती है, तथा जिनिंग मिलें पहले से दूसरे सप्ताह तक ओटाई का कार्य शुरू कर देती है। इस बार उत्तरी महाराष्ट्र में हाल ही में हुई भारी बारिश से जहां नई फसल की आवकों में देरी की आशंका है, वहीं नई फसल की क्वालिटी के साथ ही जलभराव वाले क्षेत्रों में उत्पादकता में भी कमी आने की आने की आशंका है।

इस समय महाराष्ट्र में कपास की आवक करीब 5,000 गांठ, एक गांठ 170 किलो की हो रही है, तथा हाल ही में मौसम साफ हुआ है। ऐसे में व्यापारियों को उम्मीद है कि दीपावली के बाद ही नई कपास की आवकों में बढ़ोतरी होगी। अत: जिनिंग मिलें दीपावली के बाद ही ओटाई का कार्य आरंभ कर पायेंगी। क्षेत्र में स्थित करीब 150 जिनिंग मिलें अक्टूबर मध्य के बाद या फिर फिर नवंबर के पहले सप्ताह में 100 फीसदी चल पायेंगी।

खानदेश जिनिंग एंड प्रेसिंग फैक्ट्री ओनर्स एसोसिएशन (केजीपीएफओए) के एक बयान के अनुसार इस साल जिनिंग मिलों द्वारा कच्चे कपास का प्रसंस्करण करके 10 लाख गांठ उत्पादन की उम्मीद है, जबकि पिछले सीजन में यह 13 लाख गांठ थी। आमतौर पर, जिनिंग मिलें पहली अक्टूबर से अपना कार्य आरंभ कर देती हैं, लेकिन उत्तरी महाराष्ट्र की अधिकांश जिनिंग मिल 25-40 फीसदी से ज्यादा नमी वाले कपास की कम आवक के कारण अभी तक काम शुरू नहीं कर पाए हैं।

हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण पहली पिकिंग में देरी हुई है, जबकि ओटाई के लिए कच्चे कपास में नमी का स्तर 8 फीसदी से कम होना चाहिए। माना जा रहा है कि मौसम अनुकूल रहा तो दिवाली के बाद नई कपास की आवक शुरू हो जायेगी। इस समय नमी युक्त कपास के दाम 6,000 से 6,310 प्रति क्विंटल है, जोकि समर्थन मूल्य से काफी नीचे हैं।

केंद्र सरकार ने फसल सीजन 2025-26 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मध्यम रेशे वाली कपास का 7,710 रुपये और लंबे रेशे वाली कपास का 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा है।

सूत्रों के अनुसार पिछले खरीफ सीजन में उत्तरी महाराष्ट्र के चार जिलों जलगांव, धुले और नंदुरबार के साथ ही नासिक में कपास की बुआई 8.86 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो कि चालू खरीफ सीजन में घटकर 7.54 लाख हेक्टेयर रह गई।

तेल विपणन कंपनियों को इथेनॉल की आपूर्ति के लिए मांग से अधिक प्रस्ताव मिले

नई दिल्ली। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के इथेनॉल की आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए चक्र एक के दौरान लगभग 1,050 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति के लिए बोलियां आमंत्रित की थी। देश भर के निर्माताओं द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों की संख्या 1,050 करोड़ लीटर की आवश्यक मात्रा से अधिक रही और 1,776 करोड़ लीटर से अधिक के प्रस्ताव प्राप्त हुए है।


जानकारों के अनुसार कुल मिलें 1,776.49 करोड़ लीटर के प्रस्तावों में से 471.63 करोड़ लीटर गन्ना आधारित फीडस्टॉक्स से और 1,304.86 करोड़ लीटर अनाज आधारित फीडस्टॉक्स से प्रस्ताव मिले हैं।

सरकार पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिश्रित (ईबीपी) कार्यक्रम को सक्रिय रूप से लागू कर रही है, जो कि तेल विपणन कंपनियों को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने में सक्षम बनाता है। इथेनॉल निर्माताओं की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक रही है, खासकर जब सरकार ने हाल ही में एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

केंद्र सरकार ने अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादकों को राहत देते हुए, भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई ने चावल आधारित एथेनॉल की कीमत बढ़ा दी है। एफसीआई से प्राप्त अधिशेष चावल से उत्पादित एथेनॉल की कीमत ईएसवाई 2025-26 के लिए, ईएसवाई 2024-25 की तुलना में बढ़ाई है।

चीनी आधारित फीडस्टॉक से उत्पादित एथेनॉल की कीमत अपरिवर्तित बनी हुई है। हालांकि, उद्योग पहली अक्टूबर से शुरू हुए पेराई सीजन 2025-26 के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में वृद्धि का हवाला देते हुए सरकार से कीमत बढ़ाने की मांग कर रहा हैं।

पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, सरकार एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, जिससे गन्ना किसानों को लाभ हो रहा है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो रही है।