नई दिल्ली। देश में 2027-28 के पेराई सीजन में गन्ने की कुल उपलब्धता को लेकर आशंका बनी हुई है। प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में अल नीनो के प्रभाव से गन्ना की नई फसल की बुवाई प्रभावित होने की डर बना हुआ है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एनएफसीएसएफ) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे के अनुसार महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में नई गन्ना बुवाई कम होने से 2027-28 सीजन में गन्ने की उपलब्धता सीमित हो सकती है। इससे चीनी उत्पादन को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि, मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए उस सीजन में गन्ने की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है।
देश में चालू पेराई सीजन 2026-27 में चीनी उत्पादन में गिरावट आने का अनुमान है। एनएफसीएसएफ ने सकल चीनी उत्पादन करीब 290 लाख टन ही होने का अनुमान लगाया है, जो कि पिछले सीजन के 309 लाख टन की तुलना में कम है। हालांकि, चीनी उत्पादन में संभावित गिरावट का कुछ असर इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के कम डायवर्जन से संतुलित होने की उम्मीद है। इससे घरेलू खपत के लिए अधिक चीनी उपलब्ध रह सकती है। एनएफसीएसएफ के अनुसार, 2026-27 में देश में कुल चीनी उपलब्धता की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी बेहतर रह सकती है।
फेडरेशन ने चीनी की घरेलू खपत करीब 285 लाख टन होने का अनुमान लगाया है और इस सीजन में चीनी के निर्यात या आयात की संभावना नहीं मानी है। सितंबर 2027 के अंत तक चीनी का क्लोजिंग स्टॉक करीब 42.53 लाख टन रहने का अनुमान है।
नाइकनवरे के अनुसार निकट अवधि में अक्टूबर महीने में चीनी की कमी की संभावना नहीं है। महीने की शुरुआत में चीनी का स्टॉक करीब 37.53 लाख टन था, जबकि मासिक खपत लगभग 22-24 लाख टन होने का अनुमान है। अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए करीब 14 लाख टन चीनी पहले ही आवंटित की जा चुकी है। इस बीच, महाराष्ट्र और कर्नाटक में बिगड़ती सूखे की स्थिति को देखते हुए, चीनी उद्योग पेराई सीजन को समय से पहले शुरू करने पर विचार कर रहा है।
नाइकनवरे के अनुसार पेराई जल्दी शुरू करने से किसान, पानी की कमी और गंभीर होने से पहले खेतों में खड़े गन्ने की कटाई कर सकेंगे। इससे उन क्षेत्रों में पशुओं के चारे के लिए भी अतिरिक्त गन्ना उपलब्ध हो सकता है, जहां चारे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, समय से पहले पेराई शुरू करने से चीनी रिकवरी और कुल गन्ना उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे चीनी मिलों और किसानों दोनों पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है। इसी वजह से एनएफसीएसएफ सरकार से मुआवजे की मांग कर रहा है, ताकि निर्धारित समय से पहले पेराई शुरू करने के कारण रिकवरी में होने वाली संभावित कमी के प्रभाव को कम किया जा सके।
वैश्विक चीनी बाजार में भी ब्राजील की फसल को लेकर चिंता के बीच कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। ब्राजील के सेंटर-साउथ क्षेत्र में भारी बाढ़ के कारण गन्ने की कटाई प्रभावित हुई है। इस क्षेत्र में आमतौर पर अप्रैल से नवंबर तक पेराई सीजन चलता है। उन्होंने बताया कि ब्राजील में कटाई प्रभावित होने से दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातक देश के उत्पादन में संभावित कमी को लेकर चिंता बढ़ी है। वैश्विक आपूर्ति कम रहने की आशंका ने कच्ची चीनी की कीमतों को भी समर्थन दिया है।
देश के लिए सबसे बड़ी चिंता मौजूदा सीजन के बजाय, 2027-28 के सीजन को लेकर हो सकती है। यदि अल नीनो की स्थिति का असर महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में नई गन्ना बुवाई पर पड़ता है, तो 2027-28 में गन्ने की उपलब्धता में भारी कमी आ सकती है।

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