कुल पेज दृश्य

24 अक्टूबर 2026

महाराष्ट्र में 19 फीसदी कम बारिश से चना के साथ रबी फसलों की बुआई पर संकट

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में चालू मानसूनी सीजन के दौरान सामान्य से 19 फीसदी कम बारिश होने के कारण रबी दलहन की प्रमुख फसल चना के साथ ही रबी की अन्य फसलों की बुआई को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी है। अल नीनो के मजबूत होने की आशंका ने जल संकट और सर्दियों में सामान्य से कम बारिश की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली अक्टूबर से 16 अक्टूबर के दौरान मध्य महाराष्ट्र में सामान्य की तुलना में 97 फीसदी, मराठवाड़ा में में 100 फीसदी और विदर्भ में 99 फीसदी कम बारिश हुई है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

आईएमडी के अनुसार जून से सितंबर के मानसून के दौरान महाराष्ट्र में सामान्य 994.5 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 804.4 मिमी बारिश हुई थी। राज्य के 36 में से 19 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। मराठवाड़ा में सामान्य से 39 फीसदी कम बारिश, विदर्भ में सामान्य के मुकाबले 27 फीसदी कम बारिश के साथ ही कोंकण के सात जिलों में से केवल एक जिले में कम बारिश दर्ज की गई। बारिश की इस कमी से कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता और रबी फसलों की बुआई पर दबाव बढ़ रहा है।

महाराष्ट्र उन पांच राज्यों में शामिल है, जिन्होंने सूखे की घोषणा की है। सूखे से प्रभावित अन्य राज्यों में तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। बारिश की कमी के कारण मिट्टी में नमी घट सकती है और भूजल का पुनर्भरण प्रभावित हो सकता है। इससे रबी फसलों की बुआई के लिए सिंचाई पर निर्भरता बढ़ने की आशंका है।

केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार 8 अक्टूबर तक निगरानी वाले 178 जलाशयों में जल भंडारण सामान्य स्तर का 87.08 फीसदी था। वहीं पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों में पानी का भंडारण सामान्य स्तर के 82.42 फीसदी है। जलाशयों में पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी आगामी रबी फसलों के लिए महत्वपूर्ण होगी। अत: सर्दियों में बारिश कम होती है, तो किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

देश में इस साल मानसून का समापन सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश के साथ हुआ है, जोकि एक दशक में मानसून का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। अक्टूबर से दिसंबर के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने की 83 फीसदी संभावना बताई गई है। यह घटना 1950 के बाद सबसे मजबूत अल नीनो घटनाओं में से एक हो सकती है। इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बने रहने की आशंका भी जताई गई है। अल नीनो के कारण वैश्विक मौसम प्रणालियों में बदलाव हो सकता है, जिससे देश में वर्षा और तापमान का संतुलन प्रभावित होने की आशंका रहती है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान कि देश के अधिकांश हिस्सों में सर्दियों के दौरान सामान्य से कम बारिश और औसत से अधिक तापमान रहने की आशंका है। इससे रबी फसलों खासकर के चना एवं गेहूं तथा अन्य फसलों की बुआई पर असर पड़ने का डर है। खासकर कम बारिश वाले क्षेत्रों में सिंचाई की जरूरत होने से किसानों की उत्पादन लागत में भी बढ़ोतरी का खतरा है।

कोई टिप्पणी नहीं: