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24 अक्टूबर 2026

सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की, हाजिर बाजार में भाव तेज

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को कॉटन की बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की, जिस कारण हाजिर बाजार में शाम के सत्र में कॉटन की कीमतों में तेजी आई।


सीसीआई ने गुरुवार को फसल सीजन 2025-26 में खरीदी हुई कॉटन की बिक्री कीमत 300 रुपये प्रति कैंडी तेज की। इस दौरान निगम ने 11,900 गांठ की बिक्री की जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 3,200 गांठ एवं ट्रेडर्स ने 8,700 गांठ कॉटन की खरीद की। चालू सप्ताह में सोमवार को निगम ने 100 रुपये और बुधवार को भी 200 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की थी।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण गुरुवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों तेजी आई। गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 300 रुपये तेज होकर 68,300 से 68,600 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,780 से 6,790 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,710 से 6,770 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम सुधरकर 6,760 से 6,690 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 64,200 से 64,700 रुपये कैंडी बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 60,900 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमत नरम हुई। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 27 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 7 रुपये नरम होकर 1,913 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में नरमी आई।

गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में शाम के सत्र में तेजी दर्ज की गई। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता कम बैठ रही है, जिस कारण कुल उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है। यही कारण है कि उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही मध्य प्रदेश तथा गुजरात और महाराष्ट्र की मंडियों में नई कपास की आवक अपेक्षा अनुरूप बढ़ नहीं पा रही है। इस समय मौसम भी फसल के अनुकूल है। इसलिए पिछले सप्ताह स्टॉकिस्टों की खरीद से कपास के दाम तेज हुए थे। हालांकि सूती धागे में ग्राहकी भी सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है।

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