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16 अक्टूबर 2026

डीलर्स के लिए चीनी का स्टॉक रखने की अवधि घटाकर 15 दिन की, मात्रा 1,000 क्विंटल तय

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चीनी डीलर्स के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम अवधि को घटाकर 15 दिन कर दिया है और स्टॉक की मात्रा 1,000 क्विंटल तय कर दी है। यह संशोधित व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि, कोलकाता और इसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों तथा असम को इससे अलग रखा गया है।


संशोधित प्रावधानों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से चीनी डीलरों को निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा। किसी डीलर के पास चीनी का स्टॉक प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों से अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। देश में किसी भी स्थान पर किसी भी समय डीलर के पास 1,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं होना चाहिए। हालांकि क्षेत्र की विशेष बाजार आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कोलकाता और इसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों तथा असम में स्टॉक सीमा 2,000 क्विंटल तय की गई है।

कोलकाता को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी की आपूर्ति होती है और यहां से देश के पूर्वी हिस्सों के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में भी चीनी भेजी जाती है। असम के लिए अधिक स्टॉक सीमा तय करने के पीछे भौगोलिक परिस्थितियों के साथ ही परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखा गया है।

केंद्र सरकार के अनुसार संशोधित नियमों का उद्देश्य वितरण श्रृंखला में चीनी के अनावश्यक संचय को रोकना और चीनी मिलों से डीलरों के माध्यम से अंतिम उपभोक्ताओं तक इसकी आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना है। यह कदम विशेष रूप से जमाखोरी पर अंकुश लगाने, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने और डीलरों द्वारा चीनी के अत्यधिक स्टॉक जमा करने से रोकने के उद्देश्य से उठाया गया कदम है। स्टॉक की मात्रा और उसे रखने की अवधि सीमित करके सरकार का उद्देश्य चीनी की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के लिए उचित कीमतों पर इसकी निरंतर उपलब्धता बनाए रखना है।

केंद्र सरकार के अनुसार चीनी की औसत खुदरा कीमतों में अगस्त के उच्चतम स्तर की तुलना में 15 फीसदी की गिरावट आई है। आने वाले समय में कीमतों में और कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि मिल स्तर पर कम हुई कीमतों का लाभ धीरे-धीरे पूरी आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचने की संभावना है। एक्स-मिल चीनी कीमतों में इस दौरान करीब 28 फीसदी की गिरावट आई है और पिछले तीन सप्ताह से इनमें स्थिरता बनी हुई है। केंद्र सरकार के अनुसार चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार में इसकी व्यवस्थित आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों का असर कीमतों में आई इस गिरावट में दिखाई दे रहा है।

केंद्र सरकार ने दोहराया है कि चीनी मिलों, डीलरों, थोक विक्रेताओं और अन्य बाजार सहभागियों को आपूर्ति श्रृंखला में चीनी का लगातार प्रवाह सुनिश्चित करना चाहिए तथा कृत्रिम रूप से स्टॉक जमा करने या सट्टेबाजी के लिए जमाखोरी से बचना चाहिए। थोक और खुदरा विक्रेताओं से भी अपील की गई है कि एक्स-मिल चीनी कीमतों में हुई महत्वपूर्ण गिरावट का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।

केंद्र सरकार चीनी उत्पादक क्षेत्रों में एल-नीनो परिस्थितियों से जुड़ी असमान और अपर्याप्त बारिश के गन्ने की फसल पर पड़ने वाले प्रभाव की लगातार निगरानी करेगी। सरकार ने कहा है कि घरेलू चीनी उपलब्धता, उपभोक्ताओं के हित और गन्ना किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक और समयबद्ध कदम उठाए जाएंगे। संबंधित राज्य सरकारों को भी मौजूद खेत और कृषि परिस्थितियों के आधार पर चीनी मिलों की पेराई गतिविधियों को लेकर उचित कदम उठाने की सलाह दी गई है।

चालू महीनें में चीनी का नया पेराई सीजन 2026-27 आरंभ हो जायेगा। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र की कई चीनी मिलों मध्य अक्टूबर तक पेराई आरंभ कर देंगी।

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