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16 अक्टूबर 2026

कॉटन का उत्पादन घटकर 290–300 लाख गांठ होने का अनुमान = अतुल गणात्रा

नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों में प्रतिकूल मौसम के कारण चालू खरीफ सीजन में कॉटन का उत्पादन घटकर 290 से 300 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 335 लाख गांठ का हुआ था।


श्री राधालक्ष्मी ग्रुप के अध्यक्ष अतुल गणात्रा के अनुसार कम बारिश और पानी की किल्लत के कारण कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र (मराठवाड़ा) में 40–50 फीसदी तक फसल को नुकसान हुआ है। हालांकि गुजरात और मध्य प्रदेश की स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन वहां भी बढ़ते तापमान और बारिश की कमी से आगे फसल पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि पॉलिएस्टर के दाम 100 रुपये से बढ़कर 146 रुपये प्रति किग्राम होने से मिलों में कपास का उपयोग (मिश्रित धागे के लिए) बढ़ गया है। चीन और बांग्लादेश से 20 और 30 काउंट धागे की मांग बढ़ने से कपास की खपत अधिक हो रही है। इस साल कुल खपत 350 लाख गांठ होने का अनुमान है, जो अगले साल 375–380 लाख गांठ तक पहुंच सकती है।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 500 रुपये तेज होकर 65,300 से 65,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में नई रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,510 से 6,530 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,460 से 6,520 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 6,500 से 6,540 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 61,500 से 62,000 रुपये कैंडी बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 50,800 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी आई।

कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने मंगलवार 6 अक्टूबर, को कॉटन की बिक्री कीमत स्थिर रखी। निगम ने इस दौरान से स्पिनिंग मिलों ने 20,400 गांठ कॉटन की खरीद की जबकि ट्रेडर्स ने 16,400 गांठ कॉटन की खरीद की।

विश्व बाजार में कॉटन के दाम तेज होने के कारण उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी आई। हालांकि उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही मध्य प्रदेश तथा गुजरात और महाराष्ट्र की मंडियों में नई कपास की आवक पहले की तुलना में बढ़ी है, तथा मौसम अनुकूल रहा तो आगामी दिनों में आवकों में और बढ़ोतरी होगी। अन्य राज्यों की मंडियों में नई कपास की आवकों का दबाव चालू महीने में बनेगा। इसलिए इसकी कीमतों में तेजी आईसीई कॉटन वायदा के दाम पर भी निर्भर करेगी।

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