नई दिल्ली, चालू खरीफ सीजन में कपास की बुआई में आई कमी के साथ ही उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम हुई है। अत: पहली अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले फसल सीजन 2026-27 में कॉटन का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी घटने की आशंका है।
एल-नीनो की वजह से, चालू खरीफ सीजन में जून से सितंबर महीनों में देशभर में बारिश सामान्य की तुलना में कम बारिश हुई है, इसलिए कपास की फसल को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाया जिस कारण इसकी प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आशंका है।
राधा लक्ष्मी ग्रुप के सीएमडी अतुल गणात्रा ने कपास उगाने वाले सभी 10 राज्यों में सर्वे किया है। उन्होंने कहा कि अगले 20 से 30 दिनों के मौसम पर ध्यान देना होगा और इसे बहुत ही करीब से देखना होगा। उन्होंने बताया कि हम 15 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर फसल का सर्वे करेंगे।
भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 25 सितंबर तक देशभर में मानसूनी बारिश सामान्य की तुलना में 13 फीसदी कम हुई है। इस दौरान मराठवाड़ा में बारिश सामान्य की तुलना में 38 फीसदी और विदर्भ में 27 फीसदी कम हुई है। गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में सामान्य की तुलना में 21 फीसदी कम, तेलंगाना में 15 फीसदी कम, उत्तरी कर्नाटक में 28 फीसदी तथा दक्षिणी कर्नाटक में 31 फीसदी कम हुई है।
पूर्वी राजस्थान में सामान्य की तुलना में 30 फीसदी तथा पश्चिमी राजस्थान में 18 फीसदी, पंजाब में 41 फीसदी तथा हरियाणा में 24 फीसदी कम बारिश हुई है।
अतुल गणात्रा के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों में कपास की बुआई 18 फीसदी कम हुई है। खड़ी फसल की क्वालिटी अच्छी है। जमीन में कम नमी और ज्यादा तापमान से पैदावार और फसल का साइज कम हो सकता है।
गुजरात में कपास की बुवाई 3 फीसदी ज्यादा हुई है, तथा अभी तक फसल की हालत अच्छी है। पिछले साल के मुकाबले प्रेसिंग 5 से 7 फीसदी ज्यादा होने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र में कपास की बुवाई पिछले साल से थोड़ी कम हुई है तथा अभी तक विदर्भ और खानदेश में फसल की हालत अच्छी है लेकिन, मराठवाड़ा में फसल की हालत बहुत-बहुत खराब है। कुल मिलाकर महाराष्ट्र में पिछले सीजन की तुलना में उत्पादन 12 से 15 फीसदी कम होने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश में कपास की बुआई का क्षेत्रफल 5 फीसदी बढ़ा है, तथा अभी तक फसल की हालत अच्छी है। अगले एक महीने में प्रेसिंग के नंबर साफ हो जाएंगे, पिछले साल के नंबर जैसे ही या उसके आस-पास दिख रहे हैं।
तेलंगाना में कपास की कपास की बुआई पिछले साल से 5 फीसदी ज्यादा हुई है, इसलिए हम कह सकते हैं कि तेलंगाना में अभी तक आधा क्षेत्रफल अच्छा है और आधा खराब है। आदिलाबाद और वारंगल जिले अच्छे हैं लेकिन कम बारिश के कारण महबूबनगर और नाला गोड्डा जिले में फसल की हालत खराब है। पिछले साल जैसा ही साइज या फिर 5 से 10 फीसदी कम प्रेसिंग की उम्मीद है लेकिन अगले एक महीने में स्थिति और साफ हो जाएगी।
आंध्र प्रदेश में पिछले 3 महीनों में बहुत कम बारिश की वजह से कपास की फसल पर बुरा असर पड़ा है और इसकी पैदावार बहुत कम होने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले इस साल उत्पादन में 30 से 35 फीसदी कमी आने की आशंका है।
कर्नाटक में कपास की बुआई ठीक-ठाक हुई है, लेकिन राज्य में कम बारिश की वजह से इसकी पैदावार में भारी कमी आने की संभावना है। कर्नाटक में इस समय कॉटन प्रेसिंग की संख्या पिछले साल के मुकाबले 20-25 फीसदी कम हो सकती है।
तमिलनाडु में कपास की बुआई दिवाली के बाद ही होगी।
उड़ीसा में कपास की बुआई 1-2 फीसदी कम हुई है, लेकिन ज्यादा बारिश की वजह से फसल की हालत बहुत खराब है। उड़ीसा में प्रेसिंग की संख्या 30 फीसदी तक कम होने की उम्मीद है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में देशभर में कपास की बुआई 0.9 फीसदी घटकर 110 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 111 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

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