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16 अक्टूबर 2026

चालू तेल वर्ष के पहले 11 महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 3 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों (नवंबर-25 एवं सितंबर-26) के दौरान देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 3 फीसदी बढ़कर 154.64 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 150.31 लाख टन का ही हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार इस दौरान खाद्य तेलों के आयात में भी बढ़ोतरी हुई, जो पिछले तेल वर्ष की समान अवधि के 146.83 लाख टन से बढ़कर 151.64 लाख टन का हो गया, यानी 3 फीसदी की बढ़ोतरी। नए आंकड़ों से पता चलता है कि चालू तेल वर्ष में खाद्य तेलों का कुल आयात ज्यादा हो रहा है।

एसईए के अनुसार सितंबर 2026 के दौरान देश में खाद्य तेलों का आयात 15.44 लाख टन और अखाद्य तेलों का आयात 35,196 टन का हुआ है। मासिक आधार पर, खाद्य तेलों का आयात सितंबर में थोड़ा कम होकर 15.44 लाख टन का रह गया, जबकि अगस्त 2026 में इनका आयात 15.72 लाख टन का हुआ था। यह कमी मुख्य रूप से आरबीडी पामोलिन के आयात में 22,700 टन से कम होकर 2,905 टन और क्रूड सूरजमुखी तेल का आयात 155,639 टन से कम होकर 104,984 टन के कारण हुई है।

एसईए के अनुसार नेपाल से रिफाइंड तेलों का आयात बड़े पैमाने पर जारी रहा। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान, नेपाल से देश में 682,452 टन रिफाइंड तेलों का आयात हुआ है, जिसमें 605,896 टन रिफाइंड सोया तेल, तथा 37,734 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल और 31,633 टन आरबीडी पामोलिन के अलावा 7,189 टन रेपसीड तेल शामिल हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि नेपाल मुख्य रूप से क्रूड सोया तेल, थोड़ी मात्रा में क्रूड सूरजमुखी तेल और सीपीओ भी आयात कर रहा है और रिफाइनिंग के बाद, भारत को रिफाइंड तेलों का निर्यात कर रहा है। नेपाल से देश में खाद्य तेलों का आयात साफ्टा एग्रीमेंट के तहत शून्य आयात शुल्क पर हो रहा है।

नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान, देश में रिफाइंड तेलों का आयात घटकर 740,441 टन का रह गया, जबकि पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में यह 1,689,228 टन का हुआ था। इसलिए, इंडोनेशिया और मलेशिया से रिफाइंड पामोलिन के बहुत कम आयात की वजह से इसका हिस्सा 12 फीसदी से घटकर 5 फीसदी का रह गया। इस दौरान, क्रूड खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 14,423,939 टन का हो गया, जबकि पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में इनका आयात 12,993,972 टन का हुआ था। अत: इसकी हिस्सेदारी 88 फीसदी से बढ़कर 95 फीसदी की हो गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से क्रूड पाम तेल के ज्यादा आयात की वजह से हुई, जिसने रिफाइंड पामोलिन के आयात की जगह ले ली। नेपाल से भारत को रिफाइंड सोया तेल का निर्यात भी बढ़ा है।

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