नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने गुरुवार 9 अक्टूबर, को फसल सीजन 2025-26 में खरीदी हुई कॉटन की बिक्री कीमतों में लगातार दूसरे दिन 200 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की, जिस कारण हाजिर बाजार में भी इसके दाम मजबूत हुए।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 1,000 रुपये तेज होकर 66,800 से 67,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में नई रुई हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,560 से 6,580 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,500 से 6,550 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 6,540 से 6,580 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 62,000 से 62,500 रुपये कैंडी बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 58,800 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।
घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमत तेज हुई। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 27 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 7 रुपये तेज होकर 1,900 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी आई।
कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने गुरुवार 9 अक्टूबर, को फसल सीजन 2025-26 में खरीदी हुई कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने कुल 49,000 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 22,000 गांठ तथा ट्रेडर्स ने 27,000 गांठ कॉटन की खरीद की। इससे पहले निगम ने 8 अक्टूबर को भी कॉटन की बिक्री कीमतों में 100 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की थी।
फसल सीजन 2025-26 के दौरान सीसीआई ने न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 105 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की खरीद की थी, जिसमें से निगम अभी तक 95,81,500 गांठ कॉटन की बिक्री कर चुकी है। इसमें से स्पिनिंग मिलों ने 40.74 लाख गांठ और ट्रेडर्स ने 55.07 लाख गांठ कॉटन की खरीद की है।
विश्व बाजार में गुरुवार को कॉटन के दाम नरम हुए थे। हालांकि गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन के दाम तेज हुए है। व्यापारियों के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही मध्य प्रदेश तथा गुजरात और महाराष्ट्र की मंडियों में नई कपास की आवक अपेक्षा अनुरूप बढ़ नहीं पा रही है। हालांकि मौसम भी फसल के अनुकूल है लेकिन कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश की कमी से प्रति हेक्टेयर उत्पादकता कम बैठ रही है। इसलिए स्टॉकिस्ट कॉटन के दाम तेज कर रहे हैं।

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