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11 अक्टूबर 2025

खरीफ फसलों की बुआई बढ़कर 1,121 लाख हेक्टेयर के पार, कपास एवं तिलहन की कम

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई की बढ़कर 1,121.46 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 1,114.95 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। चालू खरीफ में धान एवं दलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है जबकि तिलहन एवं कपास की कम हुई है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 3 अक्टूबर तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई बढ़कर 441.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 435.68 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में थोड़ी बढ़कर 120.41 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 119.04 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। इस दौरान अरहर की बुआई 46.60 लाख हेक्टेयर में, मूंग की बुआई 34.87 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 24.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन में इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 46.45 लाख हेक्टेयर में, 34.96 लाख हेक्टेयर और 22.87 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

मोठ की बुवाई चालू खरीफ में 9.24 लाख हेक्टेयर में तथा अन्य दलहन की 4.62 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 9.63 और 4.58 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई घटकर 190.13 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय 200.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 48.36 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 120.45 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 71,000 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 49.96 लाख हेक्टेयर में, 129.55 लाख हेक्टेयर में तथा 73,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

शीशम सीड की बुआई चालू खरीफ में 10.51 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 11.07 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। कैस्टर सीड की बुआई 8.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.39 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर चालू खरीफ सीजन में 194.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 183.54 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। मोटे अनाजों में मक्का की 94.95 लाख हेक्टेयर में तथा बाजरा की 68.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 84.30 और 68.65 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। ज्वार की बुआई 14.07 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 14.21 लाख हेक्टेयर की तुलना में घटी है।

चालू खरीफ में गन्ने की बुआई 59.07 लाख हेक्टेयर में और कपास की 110.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 57.22 लाख हेक्टेयर और 112.97 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

नेफेड और एनसीसीएफ के साथ समझौता करके सहकारी चीनी मिलों को बहुआयामी बनना होगा - अमित शाह

महाराष्ट्र। सहकारी चीनी मिलों को गैर-पेराई सत्र के दौरान भी मल्टी-फीड एथेनॉल का उत्पादन जारी रखने के साथ ही फ्रोजन सब्जियां, फल, जूस, फलों के गूदे और इसी तरह के अन्य उत्पादों के उत्पादन का भी विस्तार करना चाहिए।


केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में प्रवरा शुगर फैक्ट्री की विस्तारित सुविधा के अवसर पर कहा कि नेफेड और एनसीसीएफ के साथ समझौता करके सहकारी चीनी मिलों को बहुआयामी बनना होगा।

शाह ने कहा कि पद्म विभूषण डॉ. विट्ठलराव विखे पाटिल ने दुनिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी और इस पहल से न केवल महाराष्ट्र, बल्कि गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों के किसानों की समृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि डॉ. विट्ठलराव विखे पाटिल ही थे जिन्होंने उस प्रणाली की शुरुआत की जिसके माध्यम से चीनी मिलों का लाभ व्यापारियों की जेबों के बजाय किसानों के बैंक खातों में जाता था।

डॉ. विठ्ठलराव विखे पाटील सहकारी चीनी मिल का जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने बताया कि 1950-51 में जब इस मिल की स्थापना हुई थी, तब इसकी प्रसंस्करण क्षमता 500 टन प्रतिदिन गन्ना पेराई क्षमता की थी, जो अब बढ़कर 7,200 टन प्रतिदिन हो गई है। आने वाले वर्षों में इसकी पेराई क्षमता 7,200 टन से बढ़कर 15,000 टन गन्ना प्रतिदिन हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की थी, तब राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने सहकारी चीनी मिलों को मजबूत करने के लिए एक योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत अच्छा प्रदर्शन करने वाली इकाइयों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिनमें डॉ. विठ्ठलराव विखे पाटील सहकारी चीनी मिल का अब विस्तार किया जा रहा है।

शाह ने बताया कि इस चीनी मिल के अल्कोहल आसवन प्लांट की क्षमता 15 किलोलीटर प्रतिदिन से बढ़कर 92 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलपीडी) हो गई है और इसे आगे बढ़ाकर 240 किलोलीटर प्रतिदिन करने की मंज़ूरी मिल गई है। इसी प्रकार एथेनॉल प्लांट की क्षमता 20 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलपीडी) से बढ़कर 150 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलपीडी) हो गई है। बायोगैस प्लांट की क्षमता 12,000 घन मीटर प्रतिदिन से बढ़कर 30,000 घन मीटर प्रतिदिन हो गई है, और सह-उत्पादन प्लांट की क्षमता 30 मेगावाट से बढ़कर 68 मेगावाट हो गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में चीनी मिलों की संख्या में 67 की बढ़ोतरी हुई है और चीनी उत्पादन में 10 लाख टन की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि डिस्टिलरी की संख्या दोगुनी हो गई है, एथेनॉल उत्पादन क्षमता पाँच गुना और इसकी आपूर्ति दस गुना बढ़ गई है। इसके अलावा, पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण अब 20 फीसदी तक पहुंच गया है।

शाह ने कहा कि पहली बार मोदी सरकार ने सहकारी समितियों को नियमित करने के लिए एक निपटान अधिनियम बनाया है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस पहल से अब सहकारी चीनी मिलों को 4,400 करोड़ रुपये के वार्षिक वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी। उन्होंने सहकारी चीनी मिलों को अपने इथेनॉल संयंत्रों को बहु-फीड इथेनॉल इकाइयों में बदलने और सब्जी अपशिष्ट, मक्का और चावल से इथेनॉल उत्पादन प्रणाली स्थापित करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि इसके लिए आवश्यक वित्तीय सहायता राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी सहकारी समितियों को इथेनॉल खरीद में प्राथमिकता दी गई है। इसी प्रकार, मोदी सरकार ने एनसीडीसी की ऋण योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं और गुड़ पर जीएसटी को 28 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

06 अक्टूबर 2025

प्रतिकूल मौसम से महाराष्ट्र में चीनी की रिकवरी घटने की आशंका, 7 अक्टूबर तक बारिश की संभावना

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के कई जिलों में हाल ही हो रही अत्याधिक बारिश से चीनी की रिकवरी की में कमी आने की आशंका है। अत: रिकवरी में गिरावट से राज्य भर में चीनी का उत्पादन कम होने की संभावना है, जिससे किसानों और मिल मालिकों, दोनों को भारी आर्थिक नुकसान होगा।


भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने महाराष्ट्र के कुछ जिलों के लिए चक्रवात ‘शक्ति’ की चेतावनी जारी की है, जिसमें 7 अक्टूबर तक उच्च से मध्यम चक्रवात की चेतावनी दी गई है।

आईएमडी ने महाराष्ट्र के आंतरिक भागों, विशेष रूप से पूर्वी विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। साथ ही, घने बादलों के निर्माण और वातावरण में नमी के प्रवेश के कारण उत्तरी कोंकण के निचले इलाकों में बाढ़ आने की संभावना है।

महाराष्ट्र सरकार की मंत्रिस्तरीय समिति ने 1 नवंबर से गन्ना पेराई सत्र शुरू करने को मंज़ूरी दे दी है। समिति ने कई क्षेत्रों में बाढ़ से गन्ने की खेती को हुए नुकसान की भी समीक्षा की।

मिल मालिकों ने कहा कि रिकवरी दर में गिरावट से चीनी उत्पादन प्रभावित होगा और उन्होंने राज्य सरकार से सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए सहायता देने का आग्रह किया। कई मिल मालिकों ने कहा कि वित्तीय संकट के कारण उन्होंने अभी तक किसानों को पिछले सीजन का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) भी नहीं दिया है, और आने वाले सीजन में उनका बोझ और बढ़ जाएगा।

इन चिंताओं के बावजूद सरकार ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए चीनी मिलों पर 10 रुपये प्रति टन और बाढ़ प्रभावित किसानों की सहायता के लिए 5 रुपये प्रति टन का शुल्क लगाने का फैसला किया। मिल मालिकों ने इस कदम का विरोध करते हुए तर्क दिया कि गन्ना किसानों पर भी भारी असर पड़ा है, क्योंकि उनकी फसल का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अतिरिक्त शुल्क गन्ना किसानों पर दोहरा प्रहार होगा।

राज्य में गन्ने का नया पेराई सत्र दीपावली के बाद शुरू होगा, क्योंकि गन्ना काटने वाले किसान त्योहार से पहले काम शुरू करने के लिए तैयार नहीं है।

केंद्र ने डिऑयल्ड राइस ब्रान के निर्यात पर लगी रोक हटाई, प्रसंस्करणकर्ताओं को मिलेगी राहत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को मवेशियों के चारे में इस्तेमाल होने वाले डी ऑयल्ड राइस ब्रान (चोकर) के निर्यात पर लगी रोक तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। सरकार ने यह घोषणा विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की एक अधिसूचना के माध्यम से की, जिसमें डीओआरबी की निर्यात नीति को प्रतिबंधित से मुक्त श्रेणी में संशोधित किया गया।


डी-ऑयल्ड राइस ब्रान चावल की भूसी से तेल निकालने के बाद बचा हुआ ठोस हिस्सा होता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं जिस कारण इसे मवेशियों, मुर्गियों और मछलियों के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह प्रोटीन का सस्ता और अच्छा स्रोत है। इसकी विदेशों में बहुत मांग है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार डी ऑयल्ड राइस ब्रान का निर्यात, जिस पर पहले जुलाई 2023 में और फिर 30 सितंबर, 2025 तक प्रतिबंध लगाया गया था, अब बिना किसी प्रतिबंध के स्वतंत्र रूप से निर्यात की अनुमति होगी।

एसईए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संबंधित मंत्रालयों भारत के माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारत के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ललन सिंह को उनके प्रगतिशील और दूरदर्शी निर्णय के लिए हार्दिक बधाई दी। एसईए उद्योग की इस लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने में सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप की ईमानदारी से सराहना करता है।

गौरतलब है कि प्रतिबंध से पहले, भारत सालाना 5 से 6 लाख टन डी ऑयल्ड राइस ब्रान का निर्यात करता था, जिसका मूल्य प्रति वर्ष लगभग 1,000 करोड़ रुपये था। इसका निर्याति मुख्य रूप से वियतनाम, थाईलैंड और अन्य एशियाई देशों को किया जाता था। भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित था। एसईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीवी मेहता कहते हैं कि एक बार फिर, इससे भारत के कृषि-प्रसंस्करण निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक चारा बाजारों में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में देश की प्रतिष्ठा मजबूत होगी।

केंद्र सरकार के इस कदम से चावल मिलिंग और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन उद्योग को, विशेष रूप से पूर्वी भारत में, निर्यात के अवसर खुलने से लाभ होने की उम्मीद है, साथ ही किसानों और प्रसंस्करणकर्ताओं को डी ऑयल्ड राइस ब्रान के उप-उत्पादों की बेहतर कीमत प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। इससे डी ऑयल्ड राइस ब्रान के प्रसंस्करण को भी बढ़ावा मिलेगा। इस बहुप्रतीक्षित कदम से उद्योग, किसानों और देश के कृषि-व्यापार जगत को व्यापक लाभ होगा।

डॉ. मेहता ने कहा कि हम पूरी कोशिश करेंगे और अपने 1,000 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार को फिर से हासिल करेंगे।

रबी विपणन सीजन 2026-27 की फसलों के एमएसपी को मंजूरी, गेहूं का 160 रुपये बढ़ा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी को मंजूरी दे दी है। रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं के समर्थन मूल्य में 160 रुपये और रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों के समर्थन मूल्य में 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए 6 रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि किसानों के लिए रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं, चना, सरसों समेत 6 फसलों का एमएसपी बढ़ाने की घोषणा की गई है यह बढ़ोत्तरी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग,सीएसीपी की सिफारिशों के तहत की गई है।

सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए रबी फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है, ताकि उत्पादकों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके। सरसों के एमएसपी में बढ़ोतरी 250 रुपये तथा मसूर के एमएसपी में 300 रुपये प्रति क्विंटल की घोषणा की गई है। चना, गेहूं, कुसुम और जौ के लिए क्रमश: 225 रुपये, 160 रुपये और 600 रुपये तथा 170 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 160 रुपये बढ़ाकर 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसी तरह से जौ के एमएसपी में 170 रुपये की बढ़ोतरी कर 2,150 रुपये, चना के एमएसपी में 225 रुपये की बढ़ोतरी कर 5,875 रुपये तथा मसूर के एमएसपी में 300 रुपये की बढ़ोतरी कर 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। केंद्र सरकार ने सरसों के एमएसपी में 250 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। कुसुम के एमएसपी में 600 रुपये की बढ़ोतरी कर 6,540 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

रबी फसलों के एमएसपी में की गई इस वृद्धि से किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होगा और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्र ने राष्ट्रीय दलहन मिशन को दी मंजूरी, लक्ष्य 2030-31 तक 350 लाख टन का

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय दलहन मिशन को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को हुई बैठक में इस आशय को मंजूरी दी।


“राष्ट्रीय दलहन मिशन” का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 242 लाख टन से बढ़ाकर 350 लाख टन करने का रखा गया है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि “राष्ट्रीय दलहन मिशन” को मंजूरी देने के साथ ही रबी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के इन प्रस्तावों को मंजूरी देने पर शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री का देश के किसानों की ओर से आभार मानते हुए कहा कि यह दोनों निर्णय देश की खाद्य, पोषण सुरक्षा, किसान कल्याण व कृषि उत्पादन क्षेत्र में दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव डालने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान-हित को सर्वोपरि मानते हुए संसाधनों व योजनाओं को समग्र रूप से जोड़ने की दिशा बनाई है, जो किसानों के प्रति मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता व संवेदनशीलता को दर्शाता है। राष्ट्रीय दलहन मिशन की मंजूरी के बारे में शिवराज सिंह ने बताया कि देश में दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, पोषण एवं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से “राष्ट्रीय दलहन मिशन” मंजूर किया गया है। मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 242 लाख टन से बढ़ाकर 350 लाख टन करने का है। मिशन के तहत 416 जिलों में विशेष उत्पादन एवं वृद्धि कार्यक्रम लागू किये जायेंगे।

उन्होंने बताया कि दलहनी फसल में अरहर, उड़द व मसूर की खरीद एमएसपी पर 100 फीसदी होगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का पूर्ण लाभ मिलेगा। मिशन का 2025-26 में 11,440 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।

तेलंगाना से कपास की समर्थन मूल्य पर खरीद पहली अक्टूबर से करने की मांग

नई दिल्ली। कपास की कीमतों में चल रही गिरावट को रोकने के लिए तेलंगाना के कृषि राज्य मंत्री थुम्माला नागेश्वर राव ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से पहली अक्टूबर 2025 से राज्य की मंडियों से कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के माध्यम से कपास की खरीद का आग्रह किया है।


राज्य मंत्री ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को एक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि राज्य में कपास का भाव घटकर 6,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं, जबकि केंद्र सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। अत: समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं होने के कारण राज्य के किसान मजबूरी में कपास की बिक्री कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि चालू सीजन में राज्य में लगभग 43.29 लाख एकड़ में कपास की खेती की गई है और राज्य में कपास का उत्पादन 24.7 लाख टन होने का अनुमान है।

सूत्रों के अनुसार सीसीआई ने हाल ही में सीसीआई ने निविदाएं आमंत्रित की थी, लेकिन जिनिंग मिलों ने इसमें भाग नहीं लिया है।

नागेश्वर राव ने विपणन विभाग के अधिकारियों को सभी केंद्रों पर सुचारू खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय निगरानी समितियां बनाने का निर्देश दिया है।

तेलंगाना के कपास उत्पादक क्षेत्रों में मंगलवार को बादल छाए रहे। व्यापारियों के अनुसार राज्यों में कपास की नई फसल पहली पिकिंग के लिए तैयार है, लेकिन हाल ही में कई क्षेत्रों में मौसम खराब हुआ है, जिस कारण नई फसल की आवकों में देरी होने की आशंका है। इस समय फसल को तेज धूप की आवश्यकता है, जबकि कई क्षेत्रों में मौसम खराब बना हुआ है। राज्य की अधिकांश स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक ज्यादा है।

तेलंगाना की मंडियों में मंगलवार को करीब 600 गांठ कपास की आवक हुई, जबकि इसके पिछले कारोबारी दिवस में भी आवक इतनी ही गांठ की हुई थी।