कुल पेज दृश्य

27 जनवरी 2019

मानसूनी बारिश की कमी से गेहूं समेत रबी फसलों की बुवाई 4.90 फीसदी पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने का असर गेहूं, दलहन और मोटे अनाजों की बुवाई पर पड़ा है। गेहूं की बुवाई में 2.53 फीसदी, दलहन की बुवाई में 6.13 फीसदी, मोटे अनाजों की बुवाई में 13.93 फीसदी और धान की रोपाई में 21.32 फीसदी की कमी आई है। 
कृषि मंत्रालय के अनुसार देशभर में रबी फसलों की बुवाई 4.90 फीसदी घटकर 591.64 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 622.12 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। 
गेहूं की बुवाई में आई कमी
रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई चालू सीजन में 23 जनवरी तक 296.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 304.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। गेहूं की बुवाई समान्यत: 306.57 लाख हेक्टेयर में होती है।
दालों की बुवाई पिछले साल से कम
रबी दलहन की बुवाई चालू सीजन में 6.13 फीसदी घटकर 151.10 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 160.97 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई 9.96 फीसदी घटकर अभी तक केवल 95.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 106.55 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मसूर और उड़द की बुवाई घटी, मूंग एवं मटर की बढ़ी
अन्य दालों में मसूर की बुवाई चालू सीजन में 16.88 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 17.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द और मूंग की बुवाई चालू रबी में क्रमश: 7 और 5.70 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 8.10 और 6.67 लाख हेक्टेयर में हुई थी। मटर की बुवाई चालू रबी में बढ़कर पिछले साल के 9.33 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10.38 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।
मोटे अनाजों की बुवाई 13.93 फीसदी कम
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में 13.93 फीसदी घटकर 47.02 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 54.63 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई चालू रबी में 18.78 फीसदी घटकर केवल 24.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 30.49 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई हो चुकी थी। मक्का और जौ की बुवाई चालू रबी में क्रमश: 14.28 और 7.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 15.84 और 7.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रागी और बाजरा की बुवाई में भी क्रमश: पिछले साल की तुलना में 8.26 फीसदी और 38.73 फीसदी की कमी आई है।
तिलहन की बुवाई में हल्की कमी
तिलहन की बुवाई चालू रबी में 0.50 फीसदी घटकर 79.10 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 79.49 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई जरुर पिछले साल के 66.80 लाख हेक्टेयर से 3 फीसदी बढ़कर 68.81 लाख हेक्टेयर में हुई है। मूंगफली और असली की बुवाई चालू रबी में घटकर क्रमश: 4.41 और 3.42 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 5.44 और 3.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। सनफ्लावर की बुवाई में पिछले साल के 1.64 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.08 लाख हेक्टेयर में ही हुई है।
धान की रोपाई 21.32 फीसदी घटी
धान की रोपाई चालू सीजन में 21.32 फीसदी घटकर केवल 18.06 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 22.95 लाख हेक्टेयर में इसकी रोपाई हो चुकी थी।.....आर एस राणा

महाराष्ट्र सरकार सूखा राहत से निपटने के लिए 2,900 करोड़ रुपये करेगी जारी

आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को राहत देने के लिए 2,900 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की है। राज्य के राजस्व, राहत और पुनर्वास मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार किसानों को मुआवजा जारी करेगी, जो आने वाले दिनों में उनके खातों में जमा हो जायेगा। 
उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति से निपटने के लिए, राज्य सरकार किसानों के साथ मजबूती के साथ खड़ी है। राज्य के 151 तहसीलों के 268 मंडल के 923 गांवों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि बिजली बिल, गायों के लिए चारा और किसानों से संबंधित अन्य योजनाओं को देखा जा रहा है।
केंद्र को भेजा है 7,900 करोड़ का प्रस्ताव
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सूख राहत से निपटने के लिए केंद्र सरकार को 7,900 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। केंद्र सरकार की मदद घोषित होने तक, किसानों को राज्य सरकार की निधि से सहायता देने का फैसला किया गया है। इसलिए 2,900 करोड़ रुपये की धनराशि विभागीय आयुक्त के स्तर पर वितरित की गई है।
मंडल स्तर पर चारा शिवर बनेंगे
राज्य में सूखे की रोकथाम के लिए गठित समिति की गुरुवार को हुई बैठक में चारा शिविर शुरू करने का फैसला लिया गया। जिलाधिकारी को प्रस्ताव मिलने के बाद मंडल स्तर पर चारा शिविर शुरू किए जाएंगे। एक शिविर में सामान्यत: 300 से 500 जानवरों को रखा जायेगा। जिलाधिकारी को अधिकार दिया गया है कि यदि वहां पशुओं की संख्या अधिक होती है, तो उसी सर्कल में आवश्यकता अनुसार एक और शिविर शुरू करने का निर्णय वे ले सकते हैं। राज्य सरकार पहले ही पांच स्थानों पर चारा शिविर शुरू कर चुकी है।
पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जायेगी
राजस्व मंत्री ने कहा कि पानी की कमी को दूर करने के लिए पाइप लाइन की मरम्मत जैसे अस्थाई नई पाइपलाइनों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसी तरह बकाया बिजली बिल के कारण बंद बड़ी जलापूर्ति योजनाओं को शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने बकाया बिल की पांच प्रतिशत धनराशि भरने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय कृषि बीज विकास योजना के अंतर्गत 10 हजार क्विंटल बीज आवंटित करने का निर्णय लिया है। ...........  आर एस राणा

बजट में किसानों को केसीसी पर एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण संभव

आर एस राणा
नई दिल्ली। मोदी सरकार पहली फरवरी को पेश करने वाले अंतरिम बजट में छोटे-मझोले किसानों को बड़ी राहत दे सकती है। केंद्र सरकार किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर एक लाख रुपये तक के ऋण की समय से अदायगी करने वाले किसानों के लिए ब्याज माफी का ऐलान कर सकती है।
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले केंद्र सरकार किसानों की नाराजगी दूर करना चाहती है। छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार में किसानों की नाराजगी को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार छोटे और मझोले किसानों को एक लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा देने के साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड से दो लाख रुपये का कर्ज लेने वाले किसानों को जमीन भी बैंक के पास गिरवी नहीं रखनी पड़ेगी। इससे छोटे और मझोले किसानों को फायदा तो होगा ही, साथ ही इन किसानों को बैंकों से कर्ज लेने में सहूलियत मिलेगी।
बजट में कृषि कर्ज की सीमा में एक लाख बढ़ोतरी संभव
वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में कृषि कर्ज की सीमा को बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये किया गया था। सूत्रों के अनुसार अंतरिम बजट 2019 में इसमें एक लाख करोड़ रुपये का इजाफा किये जाने की संभावना है। देशभर में करीब 3 लाख किसानों के पास केडिट कार्ड हैं। 
समय पर कर्ज की अदायगी पर 4 फीसदी देना पड़ता है ब्याज
किसान क्रेडिट कार्ड के तहत किसानों को तीन लाख रुपये तक का लोन मिलता है तथा समय से कर्ज की अदायगी करने वाले किसानों को चार फीसदी का ब्याज देना होता है। वित्त मंत्री ने पिछले बजट में किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर मछुआरों और पशुपालकों को भी कार्ड दिए जाने का एलान किया था। ऐसा इसलिए किया गया था, ताकि उन्हें कर्ज मिलने में आसानी रहे।
किसान कई फसलों को लागत से नीचे दाम पर बेचने को मजबूर
महंगा कर्ज, कृषि लागत की अधिकता और फसलों की उचित कीमत नहीं मिलने जैसी समस्याओं से देश के किसानों को जूझना पड़ रहा है। देश के कई राज्यों में किसान आलू, प्याज और लहसुन के साथ ही दलहन फसलों को लागत से बेहद कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में सरकार के अंतरिम बजट में किसानों के हितों को प्राथमिकता के साथ उठाए जाने की उम्मीद है।..............  आर एस राणा

अभी तक की बारिश से गेहूं, चना और सरसों की फसल को फायदा-कृषि आयुक्त

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सप्ताह में कई राज्यों में हुई बारिश से गेहूं के साथ ही चना और सरसों की फसल को फायदा हुआ है। कृषि आयुक्त एस के मल्होत्रा ने गुरुवार को  संवाददाताओं से कहा कि वर्तमान मौसम रबी फसलों के लिए अच्छा है। 
उन्होंने कहा कि चालू रबी में चना के बुवाई क्षेत्रफल में 10 फीसदी की कमी आई है, लेकिन अन्य दालों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि चना बुवाई में आई कमी से चना का उत्पादन कम होने के अनुमान से किसानों को अच्छा भाव मिलेगा, लेकिन खुले बाजार में कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ेगी क्योंकि केंद्रीय पूल में चना का स्टॉक ज्यादा है। 
चना की बुवाई 9.96 फीसदी कम
रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई चालू रबी में 9.96 फीसदी घटकर 95.40 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 105.95 लाख हेक्टेयर में हुई थी। रबी में दलहन की कुल बुवाई चालू सीजन में 5.57 फीसदी घटकर 149.01 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 157.80 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। 
मटर की बुवाई में हुई बढ़ोतरी
अन्य दालों में मटर की बुवाई चालू रबी में पिछले साल के 9.30 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि मसूर की बुवाई चालू सीजन में 16.85 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 17.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द और मूंग की बुवाई चालू रबी में क्रमश: 6.75 और 4.98 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 7.50 और 4.89 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
रबी और खरीफ के बीच में होता है जायद फसलों का उत्पादन
सरकार ने जायद फसलों का रकबा 25 लाख हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा है जिससे इन फसलों का उत्पादन 50 लाख टन बढ़ेगा। रबी और खरीफ फसलों के बीच जो फसल ली जाती है उन्हें जायद या ग्रीष्मकालीन फसल कहते हैं। इनकी बुवाई मार्च-अप्रैल में की जाती है। इन फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य के साथ गुरुवार को राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जायद फसलों पर इस तरह का यह पहला सम्मेलन है। 
दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर
कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि जायद में दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों का रकबा करीब 24 लाख हेक्टेयर है जिसे बढ़ाकर 49 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जायद फसलों की बुवाई से खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद मिलती है। इस मौसम के लिए किसानों को रणनीति बनानी चाहिये। ऐसी फसलों की खेती करनी चाहिये जो कम समय में तैयार हो जाये और जिन के लिए पानी की कम से कम जरूरत हो। साथ ही ये फसल मिट्टी उत्पादकता बढ़ाने में भी मददगार हो सकती हैं।...........  आर एस राणा

22 जनवरी 2019

चीनी का उत्पादन घटकर 307 लाख टन होने का अनुमान, बकाया बढ़कर 19,000 करोड़-उद्योग

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर से सितंबर) में चीनी का उत्पादन घटकर 307 लाख टन ही होने का अनुमान है जोकि आरंभिक अनुमान 315 लाख टन से 8 लाख टन कम है। पहली अक्टूबर 2018 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी 2019 तक चीनी का उत्पादन 8.32 फीसदी बढ़कर 146.86 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 135.57 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर 2018 से 31 दिसंबर 2018 तक चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की राशि बढ़कर 19,000 करोड़ रुपये हो गई है, इसमें 2,800 करोड़ पिछले पेराई सीजन का भी है। पिछले पेराई सीजन में दिसंबर के अंत तक बकाया केवल 10,600 करोड़ रुपये ही था।
इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन में करीब पांच लाख टन चीनी उत्पादन के बराबर सीधे गन्ने के रस से एथनॉल का उत्पादन होने का अनुमान है। इस समय देशभर में 510 चीनी मिलों में पेराई चल रही है। उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 117 चीनी मिलों में पेराई चल रही है तथा राज्य की मिलों में 41.93 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।
उत्तर प्रदेश और महारष्ट्र में घटने की आशंका
इस्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 112.86 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 120.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 57.25 लाख टन का हो चुका है जोकि पिछले पेराई सीजन के मुकाबले 7 लाख टन ज्यादा है। राज्य में चालू पेराई सीजन में 95 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में 107.23 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
कर्नाटक में बढ़ेगा चीनी उत्पादन
अन्य प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 42 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में राज्य में 37.52 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक राज्य में 26.76 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 21.35 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।
अन्य राज्यों में उत्पादन बढ़ने का अनुमान
अन्य राज्यों तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तराखंड में चालू पेराई सीजन में 62 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है जोकि पिछले पेराई सीजन की तुलना में 2.5 लाख टन ज्यादा है।
निर्यात में कमी की आशंका
विश्व बाजार में चीनी के भाव नीचे होने के कारण चालू पेराई सीजन में चीनी का निर्यात 30 से 35 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि केंद्र सरकार ने चालू पेराई सीजन के लिए 50 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी हुई है।
भाव में हल्का सुधार संभव
चीनी की कीमतों में सप्ताहभर में सुधार आया है। केंद्र सरकार चीनी उद्योग के लिए राहत पैकेज देने पर विचार कर रही है, तथा इस समय चीनी में खपत का सीजन चल रहा है इसलिए चीनी के भाव में हल्का सुधार और भी आने का अनुमान है।.............. आर एस राणा

21 जनवरी 2019

रबी में गेहूं, दलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में आई कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी फसल सीजन में गेहूं, दलहन और मोटे अनाजों के साथ ही धान की पोराई में कमी आई है। देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने का असर फसलों की बुवाई पर पड़ा है। गेहूं की बुवाई में 2.57 फीसदी, दलहन की बुवाई में 5.57 फीसदी, मोटे अनाजों की बुवाई में 13.88 फीसदी और धान की रोपाई में 21.51 फीसदी की कमी आई है। 
कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई चालू सीजन में 18 जनवरी तक 296.05 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 303.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। गेहूं की बुवाई समान्यत: 306.29 लाख हेक्टेयर में होती है।
दलहन की बुवाई 5.57 फीसदी पिछड़ी
रबी दलहन की बुवाई चालू सीजन में 5.57 फीसदी घटकर 149.01 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 157.80 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई 9.96 फीसदी घटकर अभी तक केवल 95.40 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 105.95 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मसूर और उड़द की बुवाई कम
अन्य दालों में मसूर की बुवाई चालू सीजन में 16.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 17.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द और मूंग की बुवाई चालू रबी में क्रमश: 6.75 और 4.98 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 7.50 और 4.89 लाख हेक्टेयर में हुई थी। मटर की बुवाई जरुर चालू रबी में पिछले साल के 9.30 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। 
मोटे अनाजों की बुवाई 13.88 फीसदी पिछड़ी
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में 13.88 फीसदी घटकर 46.66 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 54.18 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई चालू रबी में 18.75 फीसदी घटकर केवल 24.60 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 30.27 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई हो चुकी थी। मक्का और जौ की बुवाई चालू रबी में क्रमश: 14.13 और 7.23 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 15.62 और 7.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रागी और बाजरा की बुवाई में भी पिछले साल की तुलना में कमी आई है। 
तिलहन की बुवाई में हल्की कमी
तिलहन की बुवाई चालू रबी में 0.95 फीसदी घटकर 78.45 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 79.20 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई जरुर पिछले साल के 66.77 लाख हेक्टेयर से 2.84 फीसदी बढ़कर 68.66 लाख हेक्टेयर में हुई है। मूंगफली और असली की बुवाई चालू रबी में घटकर क्रमश: 4.08 और 3.37 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 5.25 और 3.97 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। सनफ्लावर की बुवाई में पिछले साल की तुलना में कमी आई है।
धान की रोपाई 21.51 फीसदी घटी
धान की रोपाई चालू सीजन में 21.61 फीसदी घटकर केवल 17.93 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 22.84 लाख हेक्टेयर में इसकी रोपाई हो चुकी थी।......   आर एस राणा

महाराष्ट्र, गुजरात के साथ ही कई अन्य राज्यों के जलाशयों में पानी की कमी चिंताजनक

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहले से ही मौसम की मार झेल रहे महाराष्ट्र, गुजरात के साथ ही झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के किसानों की मुश्किले गर्मियों में और बढ़ सकती है। इन राज्यों के जलाशयों में पानी का स्तर पिछले दस साल के औसत स्तर से भी नीचे चला गया है, जोकि चिंताजनक है। खरीफ में मानसूनी बारिश कम होने के कारण देश के कई राज्यों ने पहले ही सूखा घोषित किया हुआ है, ऐसे में जलाशयों में पानी का स्तर औसत से भी कम होने के कारण आगे गर्मियों के सीजन में किसानों को और मुश्किलों का सामाना करना पड़ सकता है।
महाराष्ट्र और गुजरात में मानसूनी बारिश औसत से कम हुई थी, जिस कारण इन राज्यों में खरीफ के साथ ही रबी फसलों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। जलाशयों में पानी कम होने के कारण इन राज्यों के किसानों को गर्मियों में फसलों की सिंचाई के लिए पानी की किल्लत हो सकती है।
गुजरात और महाराष्ट्र के जलाशयों में जलस्तर काफी नीचे
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार 17 जनवरी 2019 को पश्चिमी क्षेत्र के गुजरात तथा महाराष्ट्र के 27 जलाशयों में पानी का स्तर घटकर कुल भंडारण क्षमता का 37 फीसदी ही रह गया है जोकि पिछले दस साल का औसत अनुमान 52 फीसदी से भी काफी कम है। पिछले साल की समान अवधि में पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता का 50 फीसदी पानी था।
पूर्वी क्षेत्र के जलाशयों में भी जलस्तर घटा
यही हाल पूर्वी क्षेत्र के झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा के 15 जलाशयों का भी है। इन जलाशयों में पानी का स्तर घटकर इनकी कुल भंडारण क्षमता के 61 फीसदी पर आ गया जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में इन जलाशयों में पानी का स्तर 69 फीसदी था। इन जलाशयों में पानी का स्तर पिछले 10 साल के औसतन अनुमान 64 फीसदी से भी कम है।
दक्षिण के जलाशयों में पिछले साल के बराबर
इसी तरह से दक्षिण भारत के जिलों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के 31 जलाशयों में पानी का स्तर दस साल के औसत स्तर से नीचे आ गया है। इन जलाशयों में पानी का स्तर कुल भंडारण क्षमता का 41 फीसदी ही रह गया है जोकि दस साल के औसत 47 फीसदी से कम है। वैसे, पिछले साल की समान अवधि में इन राज्यों के जलाशयों में पानी का स्तर केवल 41 फीसदी ही था।
मध्य क्षेत्र में पानी का स्तर पिछले साल से ज्यादा
मध्य क्षेत्र के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के 12 जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल भंडारण क्षमता के 52 फीसदी पर है जोकि पिछले दस साल के औसतन 52 फीसदी के लगभग बराबर ही है।पिछले साल के 45 फीसदी से जरुर मध्य क्षेत्र के जलाशयों में पानी का स्तर ज्यादा है। 
उत्तर क्षेत्र के जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ा
देश के उत्तरी क्षेत्र के जलाशयों में भी पानी की स्थिति ठीक है। हिमाचल, पंजाब तथा राजस्थान के 6 जलाशयों में पानी का स्तर 62 फीसदी है जोकि पिछले दस साल के औसत 48 फीसदी से ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि में उत्तरी क्षेत्र के जलाशयों में कुल क्षमता का 47 फीसदी पानी ही था।.....   आर एस राणा