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03 नवंबर 2026

चालू खरीफ में कॉटन का उत्पादन 270 से 290.50 लाख गांठ होने का अनुमान = अतुल गणात्रा

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में प्रमुख उत्पादक राज्यों में प्रतिकूल मौसम के कारण कॉटन का उत्पादन घटकर 270 से 290.50 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 335 लाख गांठ का हुआ था।


श्री राधालक्ष्मी ग्रुप के अध्यक्ष अतुल गणात्रा के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार 19 अक्टूबर तक, नए फसल सीजन में पिछले साल के मुकाबले कुल कॉटन के उत्पादन में लगभग 18 से 20 फीसदी की कमी आने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि अगले 20 से 30 दिनों में उत्पादक राज्यों में मौसम कैसा रहता है, इस पर ध्यान देना होगा और बहुत करीब से नजर होगी। उन्होंने बताया कि 15 नवंबर 2026 को एक और कॉटन क्रॉप का फाइनल सर्वे करेंगे।

एल-नीनो की वजह से, इस साल जून से अक्टूबर महीनों तक देशभर के कपास उत्पादक राज्यों में बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई, इसलिए कई क्षेत्रों में किसानों के पास आगे की फसल (आखिरी 3/4/5 पिकिंग) के लिए पानी कम होगा। इससे कॉटन उत्पादन नंबर्स पर भी असर पड़ने की आशंका है।

उन्होंने बताया कि अगर अगले 10 से 15 दिनों में उत्पादक राज्यों में अच्छी बारिश हो जाती है, करीब 3 से 4 इंच, तो फसल को फायदा हो सकता है और 10 से 15 लाख गांठ फसल का उत्पादन बढ़ सकता है। लेकिन अगर इस दौरान किसी राज्य में बहुत ज्यादा बारिश होती है करीब 5-10 इंच, तो खड़ी फसल को नुकसान भी होगा।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में चालू खरीफ में कपास की बुआई 18 फीसदी कम हुई है, लेकिन खड़ी फसल की हालत अच्छी है। जमीन में कम नमी और ज्यादा तापमान से पैदावार और फसल का साइज कम हो सकता है। स्थानीय व्यापारियों के हिसाब से पिछले साल के आस-पास ही प्रेसिंग के नंबर आने की उम्मीद है। नए सीजन 2026-27 में प्रेसिंग के आंकड़े 28 से 30 लाख गांठ होंगे।

गुजरात में अभी तक दूसरे राज्यों की तरह फसल की हालत इतनी खराब नहीं है, लेकिन दिन में बहुत ज्यादा तापमान से गुजरात में पैदावार कम हो जाएगी। स्थानीय जानकारों के हिसाब से पिछले साल के मुकाबले लोकल फसल में 12 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है। लोकल फसल 56 लाख गांठ और 7 से 12 लाख गांठ दूसरे राज्यों की कपास गुजरात आयेगी, इसलिए नए सीजन की प्रेसिंग लगभग 62 से 70 लाख गांठ की होगी।

महाराष्ट्र में बुआई पिछले साल के बराबर है तथा अभी तक विदर्भ में फसल कुछ ज़लों में अच्छी है और कुछ में बहुत खराब। विदर्भ/अकोला को मिलाकर 50 से 53 लाख गांठ प्रेसिंग होने की उम्मीद है। खानदेश में फसल की हालत अच्छी है। जलगांव जिले में हालात खराब हैं, लेकिन दुलिया जिले में खराब है अत: खानदेश में कुल 10 से 12 लाख गांठ प्रेसिंग की उम्मीद है।

मराठवाड़ा में फसल की हालत बहुत से बहुत खराब है, कम बारिश और ज्यादा तापमान की वजह से फसल में 40 से 50 फीसदी नुकसान होने की उम्मीद है। प्रेसिंग 23 से 25 लाख गांठ होने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर महाराष्ट्र में पिछले सीजन के मुकाबले फसल की संख्या 20 फीसदी कम होने की उम्मीद है, महाराष्ट्र में नए सीजन के लिए प्रेसिंग लगभग 85 से 90 लाख गांठ हो सकती है।

मध्य प्रदेश में कपास की बुवाई का क्षेत्रफल 5 फीसदी बढ़ा है, फसल की हालत अभी अच्छी है। प्रेसिंग के आंकड़े पिछले साल के जैसे ही या उसके आस-पास दिख रहे हैं। पिछले साल 17 से 18 लाख गांठ की प्रेसिंग हुई थी।

तेलंगाना में कॉटन की बुआई पिछले साल से 5 फीसदी ज्यादा है। आज की तारीख में फसल की हालत के बारे में कह सकते हैं कि तेलंगाना में आधा एरिया अच्छा है और आधा खराब है। आदिलाबाद और वारंगल जिले अच्छे हैं लेकिन कम बारिश की वजह से महबूबनगर और नाला गोड्डा जिलों में फसल की हालत बहुत खराब है। तेलंगाना में पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी फसल कम होने की उम्मीद है, तेलंगाना में नई फसल सिर्फ 35 से 37 लाख गांठ के आसपास हो सकती है।

आंध्र प्रदेश में पिछले 3 महीनों में बहुत कम बारिश की वजह से कॉटन की फसल पर बुरा असर पड़ा है और कॉटन की पैदावार बहुत से बहुत ज्यादा कम होने की आशंका है। आंध्र प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले फसल का उत्पादन 35 फीसदी तक कम होने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश में नए सीजन की प्रेसिंग 12 से 13 लाख गांठ हो सकती है।

कर्नाटक में कपास की बुआई ठीक-ठाक है, लेकिन राज्य में बहुत कम बारिश की वजह से फसल की पैदावार बहुत कम होने की संभावना है। पिछले साल के मुकाबले कॉटन प्रेसिंग का नंबर 30 से 35 फीसदी कम हो सकता है, अभी कर्नाटक में नई फसल की प्रेसिंग का नंबर लगभग 18 से 20 लाख गांठ होगा।

तमिलनाडु में कपास की बुआई दिवाली के बाद ही होगी तथा राज्य में 5 लाख गांठ का उत्पादन होने की उम्मीद है।

उड़ीसा में कपास की बुआई 15-20 फीसदी कम हुई है साथ ही ज्यादा बारिश की वजह से फसल की हालत बहुत खराब है। उड़ीसा में प्रेसिंग का आंकड़ा 30 फीसदी कम होने की उम्मीद है। अत: राज्य में प्रेसिंग का आंकड़ा लगभग 2 से 2.5 लाख गांठ का होगा।

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