कुल पेज दृश्य

20 नवंबर 2025

चालू सप्ताह में सीसीआई ने 50,900 गांठ कॉटन की बिक्री की, कीमतों में मिलाजुला रुख

नई दिल्ली। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने चालू सप्ताह में 2024-25 सीजन की खरीदी हुई कॉटन की ई-नीलामी के माध्यम से लगभग 50,900 गांठ, एक गांठ 170 किलो की बिक्री की।


सीसीआई लगातार पिछले सीजन की खरीदी हुई कॉटन घरेलू बाजार में बेच रही है तथा समय, समय पर निगम बिक्री कीमतों में कटौती भी कर रही है। उधर विश्व बाजार में कॉटन के दाम घरेलू बाजार की तुलना में नीचे बने हुए हैं इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

केंद्र सरकार ने कॉटन के आयात पर शून्य शुल्क की समय सीमा को 30 सितंबर 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 किया हुआ है।

व्यापारियों के अनुसार गुजरात एवं उत्तर भारत के कॉटन के उत्पादक राज्यों में मौसम खराब बना हुआ है। हालांकि विश्व बाजार में पिछले दो कार्यदिवस से कॉटन के दाम कमजोर हुए है, जिस कारण घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों पर दबाव है।

केंद्र सरकार ने दिसंबर तक शून्य शुल्क पर कॉटन के आयात की अनुमति दी हुई है। पिछले सीजन सितंबर के अंत में घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक इसके पिछले साल की तुलना में ज्यादा बचा हुआ था। वैसे भी कपास की बुआई में कमी आने के बावजूद उद्योग का अनुमान है कि चालू सीजन उत्पादन बढ़ेगा।

स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से शाम के सत्र में गुजरात में शुक्रवार को कॉटन की कीमतों में नरमी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में मिलाजुला रुख रहा।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 50 रुपये घटकर 52,900 से 53,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,200 से 5,270 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव नरम होकर 5,110 से 5,130 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 5,200 से 5,300 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 48,700 से 49,700 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 48,000 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमत में तेजी दर्ज की गई। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 10 रुपये तेज होकर 1,557 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। इस दौरान एमसीएक्स पर नवंबर महीने के वायदा अनुबंध में कॉटन के भाव 390 रुपये तेज होकर 25,800 रुपये हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।

उद्योग ने केंद्र से 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने की मांग

नई दिल्ली। उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी एवं घरेलू बाजार में उपलब्धता ज्यादा होने के कारण उद्योग ने केंद्र सरकार से पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2025-26 (अक्टूबर से सितंबर) में 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने की मांग की है।


भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (इस्मा) ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जिसमें उद्योग के लिए चिंता के कई मुद्दों, विशेष रूप से चीनी क्षेत्र को एथेनॉल आवंटन में भारी कमी पर चर्चा की गई। इस्मा ने सरकार से चीनी आधारित फीडस्टॉक्स के लिए अधिक एथेनॉल आवंटन, एथेनॉल खरीद मूल्यों में वृद्धि और चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य आदि के संबंध में तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की है।

पहली अक्टूबर से शुरू हुए पेराई सीजन 2025-26 के दौरान उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी को देखते हुए उद्योग ने केंद्र सरकार से इस सीजन में 20 लाख टन चीनी निर्यात की घोषणा करने का अनुरोध किया है। इस अवसर पर केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने भी माना कि देश में निश्चित रूप से चीनी की उपलब्धता कुल खपत की तुलना में ज्यादा है और सरकार निर्यात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि ब्राजील में चीनी उत्पादन बढ़ने से कीमतों पर दबाव है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें चार साल के अपने सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रही हैं।

इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार भारतीय उद्योग के लिए चीनी निर्यात का एक अच्छा अवसर है। उन्होंने कहा कि जनवरी से मार्च के बीच हमारे पास चीनी निर्यात का एक अच्छा अवसर है, क्योंकि ब्राजीलियाई फसल लगभग अप्रैल तक बाजार में नहीं आती है। हालांकि, हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह निर्यात संबंधी निर्णय जल्द ही घोषित करे ताकि मिलें अपने कच्ची चीनी उत्पादन की योजना बना सकें।

हाल ही में हरियाणा के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने के एसएपी में बढ़ोतरी की है। उद्योग ने केंद्र सरकार से सरकार गन्ना के एसएपी में की गई बढ़ोतरी की भरपाई के लिए चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन की मांग की है। उद्योग का कहना है कि 60 फीसदी से ज्यादा चीनी की खपत पेय पदार्थ, मिठाई, होटल, रेस्टोरेंट आदि निर्माताओं द्वारा की जाती है, इसलिए चीनी उद्योग द्वारा किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान जारी रखने की व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए एफआरपी एवं एसएपी के अनुरूप चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य घोषित करना आवश्यक है।

30 अक्टूबर 2025

फसल सीजन 2024-25 के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 11 फीसदी घटा - सोपा

नई दिल्ली। फसल सीजन 2024-25 के अक्टूबर 24 से सितंबर 25 के दौरान देश से सोया डीओसी का निर्यात 11.07 फीसदी घटकर केवल 20.23 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान इसका निर्यात 22.75 लाख टन का हुआ था।


सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के अक्टूबर से सितंबर के दौरान 89.56 लाख टन सोया डीओसी का उत्पादन हुआ है, जबकि इसके पिछले साल का करीब 1.33 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। इस दौरान 20.23 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ है जबकि 8 लाख टन की खपत फूड में एवं 62 लाख टन की फीड में हुई है। अत: पहली अक्टूबर 2025 को मिलों के पास 0.68 लाख टन सोया डीओसी का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.33 लाख टन से कम है।

सोपा के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के दौरान देशभर की उत्पादक मंडियों में 103 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई है, जबकि सितंबर अंत तक 113.50 लाख टन की पेराई हुई है। इस दौरान 5 लाख टन सोयाबीन की खपत डारेक्ट हुई है जबकि 0.12 लाख टन का निर्यात हुआ है। अत: प्लांटों एवं व्यापारियों तथा किसानों के पास पहली अक्टूबर 2025 को 4.42 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि इससे पिछले साल की समान अवधि के 8.94 लाख टन की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार फसल सीजन 2024-25 में देश में सोयाबीन का उत्पादन 125.82 लाख टन का हुआ था, जबकि 8.94 लाख टन का बकाया स्टॉक नई फसल की आवक के समय बचा हुआ था। अत: कुल उपलब्धता 134.76 लाख टन की बैठी है, जबकि फसल सीजन 2024-25 में करीब 0.02 लाख टन सोयाबीन का आयात हुआ है। फसल सीजन 2023-24 में 118.74 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, जबकि नई फसल की आवक के समय 24.07 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: कुल उपलब्धता 142.81 लाख टन की बैठी थी, जबकि 6.25 लाख टन का आयात हुआ था।

शुरुआती चरण में देशभर में रबी फसलों की कुल बुआई आगे, गेहूं की पीछे

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन के शुरुआती चरण में जहां देशभर में फसलों की बुवाई आगे चल रही है, वहीं रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 24 अक्टूबर तक देशभर में रबी फसलों की कुल बुआई 27.46 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 26.92 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी।

गेहूं की बुआई 35 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल के 66 हजार हेक्टेयर की तुलना में पीछे चल रही है।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 4.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 4.38 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 3.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 2.89 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी। अन्य रबी दलहन की बुआई अभी शुरुआती चरण में है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 18.98 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 19.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी जबकि पिछले साल इस समय तक 18.98 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई घटकर 2.41 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.83 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

खरीफ फसलों का उत्पादन बढ़ने का अनुमान, रबी की बुआई शुरू - शिवराज सिंह

नई दिल्ली। खरीफ सीजन में जहां फसलों का उत्पादन अनुमान बढ़ने की संभावना है, वहीं रबी फसलों की बुआई शुरू हो चुकी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान कृषि क्षेत्र में प्रगति की समीक्षा।


देश के कृषि क्षेत्र को इस बार अनुकूल मानसून, पर्याप्त वर्षा, जलाशयों में बेहतर जल संग्रहण के
चलते फायदा हुआ है। कृषि क्षेत्र की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रमुख जलाशयों में सामान्य या अधिक स्तर पर पानी संग्रहित है, जिससे सिंचाई संबंधी जरूरतें काफी हद तक पूरी हुई हैं व खरीफ की बुवाई समय पर पूरी हो सकी है। यह किसानों के लिए बड़ी राहत की बात रही, क्योंकि लगातार पर्याप्त नमी के कारण बुवाई में तेजी आई, पौधों की वृद्धि भी संतुलित रही हैं। पर्याप्त नमी से रबी बुवाई क्षेत्र में भी वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि खरीफ-2025 के लिए धान की बुवाई का कुल आंकड़ा 441.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक है। वहीं, तिलहनी फसलों का अखिल भारतीय क्षेत्र 190.13 लाख हेक्टेयर तक दर्ज किया गया, जिसमें सोयाबीन एवं मूंगफली प्रमुख हैं। इसी तरह, दालों का क्षेत्र 120.41 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है, जो पोषण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है, वहीं गन्ने का क्षेत्र 59.07 लाख हेक्टेयर तक रहा हैं, जिससे गन्ना उत्पादक
किसान भाइयों-बहनों को सीधा फायदा होगा।

बैठक में मौजूद कृषि आयुक्त डा. पीके सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह को रिपोर्ट दी कि देशभर में सिंचाई परियोजनाओं एवं जलाशयों के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि हुई हैं, जिससे सिंचाई आधारित कृषि क्षेत्रों में भी कृषि विकास संभव हुआ है। बैठक में बताया गया कि देश में पिछले वर्ष की तुलना में कुल जल संग्रहण की स्थिति बेहतर है, 161 जलाशयों में उपलब्ध संग्रहण 165.58 अरब घन मीटर (बीसीएम) है, जो गत वर्ष के मुकाबले 104.30 फीसदी और पिछले 10 वर्षों के औसत संग्रहण का 115.95 फीसदी है।

बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि देश के कुछ क्षेत्रों में खरीफ की फसलों की कटाई शुरू हो गई है, अब तक कुल खरीफ क्षेत्र के लगभग 27 फीसदी भाग की कटाई हो चुकी है, साथ ही कुछ इलाकों में रबी फसलों की बुवाई भी प्रारंभ हो चुकी है, जो वर्तमान में प्रारंभिक चरण में है। देश में प्याज, आलू व टमाटर की फसलों की स्थिति भी औसतन अच्छी परिलक्षित हो रही है, वहीं चावल एवं गेहूं का वास्तविक स्टाक, बफर मानक की तुलना में ज्यादा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि समय पर और अनुकूल मानसून, पर्याप्त जलाशय संसाधन, बढ़िया योजना प्रबंधन एवं डिजिटल नवाचार के चलते देश के कृषि क्षेत्र में रिकॉर्ड उपलब्धियां दर्ज हो रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, सरकार की किसान हितैषी नीतियों की वजह से ये उपलब्धियां किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठा रही है, वहीं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए भी यह शुभ संकेत हैं। आगामी रबी मौसम में दलहनी और तिलहनी फसलों की ज्यादा बुवाई के लिए और रिकॉर्ड उत्पादकता प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार, प्रदेशों के साथ मिलकर हर संभव सहायता किसानों को उपलब्ध कराएगी। आज ही केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 38 हजार करोड़ रुपये खाद सब्सिडी के लिए जारी करने का फैसला लिया है, इसके लिए शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री के प्रति सभी किसानों की ओर से आभार व्यक्त किया है।

केंद्र सरकार ने नवंबर के लिए 20 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 के लिए 20 लाख टन चीनी का मासिक कोटा जारी किया है, जो पिछले साल इसी महीने जारी कोटे से 2 लाख टन कम है।

अक्टूबर 2025 में सरकार ने 24 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया था, जो कि नवंबर की तुलना में 4 लाख टन ज्यादा था।

व्यापारियों के अनुसार अधिकांश त्यौहार अक्टूबर में समाप्त हो गए हैं, और नवंबर एक सामान्य महीना प्रतीत होता है, जिस कारण चीनी की कोई बड़ी माँग की उम्मीद नहीं है।

अधिकांश चीनी उत्पादक राज्यों में गन्ने की पेराई का कार्य शुरू जल्द ही शुरू हो जायेगा, तथा कुछ मिलों ने पेराई आरंभ भी कर दी है। अत: जल्द ही नई चीनी का उत्पादन शुरू होने और चीनी की उपलब्धता में वृद्धि होने की उम्मीद है। सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी विश्व स्तर पर चीनी के दाम नीचे बने हुए हैं।

सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में कटौती के बावजूद हाजिर बाजार में भाव तेज

नई दिल्ली। सीसीआई द्वारा कॉटन की कीमतों में कटौती के बावजूद हाजिर बाजार में सोमवार को सत्र में सत्र में इसके भाव तेज हुए। कई उत्पादक राज्यों में मौसम खराब होने से आवक प्रभावित होने का डर है, जिससे भाव में सुधार देखा गया।


कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने सोमवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 500–700 प्रति कैंडी की कटौती की। यह निर्णय मौजूदा बाजार परिस्थितियों और मिलों की सीमित खरीदारी को देखते हुए लिया गया। फसल सीजन 2024–25 के स्टॉक की बिक्री के भाव में निगम ने कटौती की, जोकि अकोला, औरंगाबाद, वारणगल, हब्ले, महबूबनगर और रायगढ़ जैसे प्रमुख केंद्रों पर आयोजित की गई।

हालांकि स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में सोमवार को कॉटन की कीमतों में सुधार आया।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव सोमवार को 150 रुपये बढ़कर 52,500 से 52,700 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,180 से 5,260 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,100 से 5,120 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 5,200 से 5,270 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 48,200 से 49,200 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 46,000 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमत में तेजी दर्ज की गई। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 6 रुपये तेज होकर 1,562 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा।

सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में 500–700 प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की कटौती की।

केंद्र सरकार ने कॉटन के आयात पर शून्य शुल्क की समय सीमा को 30 सितंबर 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 किया हुआ है।

व्यापारियों के अनुसार गुजरात एवं उत्तर भारत के कॉटन के उत्पादक राज्यों में मौसम खराब हुआ है, जिस कारण कॉटन की कीमतों में सुधार आया है। आगामी दिनों में उत्पादक राज्यों में मौसम कैसा रहा है, इस पर कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी निर्भर करेगी।

विश्व बाजार में कॉटन के दाम नीचे होने के कारण आयातित कॉटन सस्ती है, तथा केंद्र सरकार ने दिसंबर तक शून्य शुल्क पर कॉटन के आयात की अनुमति दी हुई है। पिछले सीजन सितंबर के अंत में घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक इसके पिछले साल की तुलना में ज्यादा बचा हुआ था। वैसे भी कपास की बुआई में कमी आने के बावजूद उद्योग का अनुमान है कि चालू सीजन उत्पादन बढ़ेगा।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 3 अक्टूबर तक चालू खरीफ सीजन देशभर में कपास की बुआई कम होकर 110.03 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 112.97 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।