कुल पेज दृश्य

06 मार्च 2019

राजस्थान के कोटा से गेहूं की एमएसपी पर खरीद 15 मार्च से, किसान कराये पंजीकरण

आर एस राणा
नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा संभाग से गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद 15 मार्च से शुरू होगी, जबकि राज्य के अन्य जिलों की मंडियों से पहली अप्रैल से खरीद की जायेगी। राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश चंद्र मीणा ने बताया कि गेहूं की एमएसपी पर खरीद के लिए मंगलवार से पंजाीकरण शुरू कर दिया गया है।
केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2019-20 के लिए गेहूं का एमएसपी 1,840 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि पिछले रबी में गेहूं का एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल था।
पंजीकरण के लिए फोटो पहचान पत्र की जरुरत
उन्होंने कहा कि किसान अपनी गेहूं की फसल को एमएसपी पर बेचने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की वेबसाइट पर पंजीकरण करवा सकते हैं। मीणा ने कहा कि कोटा संभाग में 15 मार्च से गेहूं की खरीद शुरू की जायेगी, जबकि यह प्रक्रिया एक अप्रैल से राज्य के बाकी हिस्सों में शुरू होगी। किसान पंजीकरण के लिए फोटो पहचान पत्र के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, किसान क्रेडिट कार्ड और पासपोर्ट को फोटोकाफी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
गेहूं उत्पादन अनुमान में कमी की आशंका
रबी विपणन सीजन 2018-19 में राजस्थान से एमएसपी पर 15.32 लाख टन गेहूं की खरीद की गई थी। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू रबी में गेहूं की बुवाई घटकर 28,25,200 हेक्टेयर में ही हुई है जबकि 104,47,590 टन उत्पादन का अनुमान है। पिछले साल रबी में राज्य में गेहूं की बुवाई 30,50235 हेक्टेयर में हुई थी, तथा उत्पादन 112,08,087 टन का हुआ था। ................  आर एस राणा

गैर-बासमती चावल का निर्यात 15.45 फीसदी घटा, बासमती का बढ़ा

आर एस राणा
बंगलादेश के साथ ही अन्य देशों की आयात मांग कम होने के कारण चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान गैर-बासमती चावल के निर्यात में 15.45 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 61.21 लाख टन का ही हुआ है। इस दौरान बासमती चावल का निर्यात 2.62 फीसदी बढ़कर 33.65 लाख टन का हुआ है।
एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में बंगलादेश ने गैर-बासमती चावल का आयात ज्यादा किया था, जबकि चालू वित्त वर्ष में बंगलादेश के पास घरेलू स्टॉक ज्यादा है जिस कारण बंगलादेश की आयात मांग कम रही है। उन्होंने बताया कि सामान्य गैर-बासमती चावल का निर्यात सालाना 68 से 70 लाख टन का होता है अत: चालू वित्त वर्ष में भी मार्च के आखिर तक करीब इतना निर्यात होने का अनुमान है।
मूल्य के हिसाब से गैर-बासमती का निर्यात 11.72 कम
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2018-19 के अप्रैल से जनवरी के दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात घटकर 61.21 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017—18 की समान अवधि में इसका निर्यात 72.40 लाख टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी के दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात 16,971 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में 19,224 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था।
बासमती चावल का निर्यात 2.62 फीसदी ज्यादा
बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले दस महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान 2.62 फीसदी बढ़कर 33.65 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में इसका निर्यात 32.79 लाख टन का ही हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में बासमती चावल का निर्यात 24,919 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में 21,319 करोड़ रुपये मूल्य का ही निर्यात हुआ था।
बीते वित्त वर्ष में रिकार्ड हुआ था गैर-बासमती चावल का निर्यात
मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में गैर-बासमती चावल का कुल निर्यात 22,927 करोड़ रुपये का रिकार्ड 86.33 लाख टन का हुआ है। बासमती चावल का निर्यात पिछले वित्त वर्ष में 26,841 करोड़ रुपये का 40.51 लाख टन का हुआ था।
बासमती धान के भाव में सुधार की उम्मीद
बासमती चावल की निर्यात फर्म खुरानिया एग्रो के प्रबंधक रामनिवास खुरानिया ने बताया कि घरेलू बाजार में पूसा 1,121 बासमती चावल सेला का भाव 6,775 से 6,800 रुपये और पूसा 1,509 बासमती चावल सेला का भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल है। पूसा 1,121 बासमती धान का भाव घरेलू मंडियों 3,600 रुपये प्रति क्विंटल है। उन्होंने बताया कि बासमती धान में चावल मिलों की मांग अच्छी बनी हुई है जिससे घरेलू बाजार में इसके भाव में सुधार आने का अनुमान है।
चावल के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2018-19 में देश में रिकार्ड 11.56 करोड़ टन चावल के उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले फसल सीजन में 11.10 करोड़ टन का उत्पादन हुआ था।....आर एस राणा

मक्का की नई फसल की आवक से पहले ही कीमतें 10 फीसदी घटी, किसान चिंतित

आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी सीजन में मक्का की नई फसल की आवक चालू महीने के आखिर तक शुरू होगी, जबकि अप्रैल में आवकों का दबाव बनेगा। सप्ताहभर में मक्का की कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है, तथा आगे भाव में और मंदा आने का अनुमान है जिससे मक्का किसानों की चिंता बढ़ गई है।
बिहार के भागलपुर जिला की नौगछिया तहसील के मक्का किसान पवन कुमार ने बताया कि उन्होंने दो एकड़ में मक्का की फसल की बुवाई कर रखी है। नई फसल की कटाई मार्च के आखिर तक बन जायेगी, जबकि मक्का की कीमतों में अभी से मंदा आना शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि फरवरी में नौगछिया अनाज मंडी में मक्का के भाव 2,100 रुपये प्रति क्विंटल थे जोकि घटकर 1,850 से 1,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। माना जा रहा है कि अप्रैल में बिहार की मंडियों में मक्का के भाव घटकर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल तक बन सकते हैं, अत: अभी मौजूदा कीमतों में 400 रुपये की और गिरावट आने की आशंका है।
दिल्ली के मक्का कारोबारी कमलेश कुमार जैन ने बताया कि मक्का कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा आ चुकी है। दिल्ली में मक्का के भाव घटकर 2,075 से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं जबकि सप्ताहभर पहले इसके भाव 2,300 से 2,325 रुपये प्रति क्विंटल थे। उनहोंने बताया कि मक्का की आवक इस समय मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से रही है जबकि बिहार से मक्का की नई फसल की आवक अप्रैल में बनेगी। अत: आगे मक्का की कीमतों में और भी 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आने का अनुमान है।
कीमतों में और मंदा आने का अनुमान
मुंबई के मक्का आयातक दलीप काबरा ने बताया कि घरेलू बाजार में मक्का की कीमतों में आई गिरावट बनी हुई है जिस कारण आयात सौदे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में मक्का की बुवाई में कमी आई है, लेकिन नई फसल की आवक बढ़ने पर भाव में और भी गिरावट आने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2018-19 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,700 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है। रबी में मक्का का उत्पादन मुख्यत: बिहार, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में ज्यादा होता है।
रबी में मक्का की बुवाई कम
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में मक्का की बुवाई घटकर 15.55 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल रबी में इसकी बुवाई 17.28 लाख हेक्टेयर में हुई थी। प्रमुख उत्पादक राज्य बिहार में मक्का की बुवाई पिछले साल के 4.70 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.75 लाख हेक्टेयर में हुई है। अन्य राज्यों में आंध्रप्रदेश में 1.59 लाख हेक्टेयर में, महाराष्ट्र में 1.16 लाख हेक्टेयर में, तमिलनाडु में 2.17 लाख हेक्टेयर में और तेलंगाना 1.15 लाख हेक्टेयर में तथा पश्चिम बंगाल में 1.17 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। 
मक्का का उत्पादन रबी में घटने का अनुमान
मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में रबी सीजन में मक्का का उत्पादन 75.8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल रबी में इसका उत्पादन 76.3 लाख टन का उत्पादन हुआ था। खरीफ और रबी में मक्का का कुल उत्पादन चालू फसल सीजन में 278 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 271.4 लाख टन का उत्पादन हुआ था।............  आर एस राणा

पीएम-किसान योजना की दूसरी किस्त के लिए आधार नहीं होगा अनिवार्य

आर एस राणा
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले सरकार ने किसानों को 'पीएम-किसान' योजना की दूसरी किस्त भी बिना आधार नंबर के देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कृषि मंत्रालय के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई। इसका फायदा देश के 12 करोड़ से अधिक लघु व सीमांत किसानों परिवारों को मिलेगा।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी महीने की 24 तारीख को गोरखपुर से की थी। कई राज्यों ने अपने किसानों की सूची भेजने के साथ केंद्र से आग्रह किया था कि उनके यहां आधार से जोड़ने में अभी विलंब हो सकता है। अत: आधार से जोड़ने में आ रही दिक्कतों और देरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने योजना के पात्र लघु व सीमांत किसानों को आधार से जोड़ने की शर्त में छूट दी है।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि किसानों के हित में सरकार ने यह फैसला लिया है। इसके तहत पहली किस्त के माफिक दूसरी किस्त के भुगतान में किसानों के नाम आधार से जोड़ने की शर्त हटा ली गई है। अत: दूसरी किस्त भी किसानों को बगैर आधार के दी जायेगी। 
अप्रैल में दूसरी किस्त देने की तैयारी
24 फरवरी को योजना की लांचिंग के समय प्रधानमंत्री ने एक करोड़ से अधिक किसानों के खाते में राशि जारी की थी। तथा बाकि किसानों को भी जल्द ही पहली किस्त जारी की जायेगी। केंद्र सरकार इस योजना की दूसरी किस्त अप्रैल में जारी करेगी, इसीलिए दूसरी किस्त में आधार की अनिवार्यता में छूट दी गई है। इस योजना से देशभर के 12 करोड़ से अधिक किसानों परिवारों को सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों 2,000-2,000 रुपये देने की योजना है।
पांच एकड़ तक वाले किसानों को मिल रहा है लाभ
उन सभी किसान परिवारों को इस स्कीम का फायदा मिलेगा जिनके पास पांच एकड़ तक जमीन है। 1 फरवरी, 2019 तक जिन किसानों के नाम राज्य के लैंड रिकॉर्ड्स में दिखेंगे, उन्हें इस स्कीम का फायदा मिलेगा। छोटे एवं सीमांत किसान परिवार की परिभाषा में वैसे परिवारों को शामिल किया गया है जिनमें पति-पत्नी और 18 वर्ष तक की उम्र के नाबालिग बच्चे हों और ये सभी सामूहिक रूप से दो हेक्टेयर यानी 5 एकड़ तक की जमीन पर खेती करते हों।..............  आर एस राणा

बकाया भुगतान के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन को दी मंजूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानों के बढ़ते बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये का सस्ता कर्ज देने की घोषणा की है। इसमें शर्त यह है कि जिन चीनी मिलों ने किसानों का 25 फीसदी गन्ने का बकाया भुगतान कर दिया है, उन्हें ही इसका फायदा मिलेगा।
पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू गन्ना पेराई सीजन (अक्टूबर से सितंबर) के फरवरी के आखिरी सप्ताह तक चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की रकम बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये को पार कर गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इसको मंजूरी दी गई।  
पच्चीस फीसदी भुगतान वाली मिलों को मिलेगा सस्ता कर्ज
सीसीईए की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि किसानों के बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए चीनी मिलों को सॉफ्ट लोन देने के लिए 10,540 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि उन्हीं चीनी मिलों को इसका लाभ मिलेगा, जो चालू पेराई सीजन 2018-19 में किसानों को 25 फीसदी का भुगतान कर चुकी होंगी।
उद्योग के अनुसार चीनी उत्पादन अनुमाम कम
केंद्र सरकार ने हाल ही में चीनी उद्योग के राहत देने के लिए चीनी के न्यूनतम बिक्री भाव (एमएसपी) को दो रुपये प्रति किलो बढ़ाकर 31 रुपये किलो कर दिया था। इससे चीनी मिलों को  बड़ी राहत मिली थी। उद्योग के अनुसार चालू गन्ना पेराई सीजन 2018-19 में चीनी का उत्पादन घटकर 307 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल रिकार्ड 325 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। देश में चीनी की सालाना खपत करीब 250 से 255 लाख टन की ही होती है। पहली अक्टूबर 2018 को शुरू हुए चालू गन्ना पेराई सीजन के समय चीनी मिलों के पास करीब 100 लाख टन से ज्यादा चीनी का बकाया स्टॉक बचा हुआ था।
इससे पहले भी चीनी मिलों को दी गई है राहत
इससे पहले भी केंद्र सरकार चीनी मिलों को कई तरह की राहत दे चुकी है। जून 2018 में केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 8,500 करोड़ रुपये का पैकेज देने की घोषणा की थी, इसमें 4,440 करोड़ रुपये चीनी मिलों को सस्ते कर्ज के रूप में एथेनॉल क्षमता के विकास के लिए दिए गए थे। उधर सितंबर 2018 में मिलों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एथेनॉल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की थी। सीधे गन्ने के रस से बनने वाले एथेनॉल का भाव बढ़ाकर 59.19 रुपये प्रति लीटर तय किया था, जबकि बी-ग्रेड एथेनॉल का भाव 47.13 रुपये से बढ़ाकर 52.43 रुपये प्रति लीटर कर दिया था।..............  आर एस राणा

महाराष्ट्र के बैंको ने पीएम-किसान योजना का पैसा ऋण खातों में डाला, सरकार ने किसानों को देने के निर्देश दिए

आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के कई बैंकों ने राज्य के किसानों को मिली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान योजना की पहली किस्त किसानों के ऋण खाते में डाल दी है, जिसे राज्य सरकार ने बैंकों को किसानों को पैसा देने का निर्देश दिया है।
राज्य के कृषि आयुक्त सुहास दिवासे के अनुसार जिन बैंकों ने किसानों के ऋण खातों में पीएम-किसान योजना की किस्त जमा कर दी है, उन बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं, साथ ही बैंकों को पत्र लिखा है कि जिन किसानों का पैसा ऋण खाते में जमा हो गया है, उनका पैसा वापिस दिया जाये।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सहायक महाप्रबंधक के अनुसार सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों को पीएम-किसान योजना की राशि उन्हें मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पूरी बैंकिंग प्रणाली ऑनलाइन है, अत: यदि किसी किसान का बैंक खाता एनपीए में हैं, जो जमा किया गया पैसा आनलाइन प्रणाली के माध्यम से सीधा किसान के ऋण खाते में जमा हो जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ बैंकों को इस समस्या का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सभी बैंकों को पीएम—किसान योजना का पैसा सीधे किसान को देने के लिए पत्र जारी किया गया है कि बैंक किसानों के ऋण खाते से पैसा निकाल कर किसानों को दे।
एक अन्य बैंक के अधिकारी के अनुसार बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह से आनलाइन होने के कारण लगभग सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को इस समस्या का सामाना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पीएम-किसान योजना में सहकारी बैंकों को शामिल नहीं किया है।
पात्र किसानों को बिना देरी मिलेगा पैसा
राज्य के नांदेड़, परभणी और नासिक जिलों में किसानों ने शिकायत की है कि पीएम-किसान योजना की राशि उन्हें नहीं मिली है, तथा बैंकों ने किसानों के ऋण खाते में यह राशि जमा कर दी है। कृषि आयुक्त ने कहा कि इसकी जांच की जा रही है तथा किसानों को जल्द ही यह पैसा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह आनलाइन प्रणाली के कारण हुआ है। कृषि आयुक्त ने कहा कि इस मामले को सुलझा लिया गया है तथा सभी पात्र किसानों को बिना किसी देरी के उनकी किस्तें मिलेंगी।
बैंक नहीं दे रहे हैं जानकारी
अहमदनगर जिले के माधे वडगांव के एक किसान बालासाहेब मंडे के अनुसार कोई भी हमें यह नहीं बता रहा है कि हमारे पैसे का क्या हुआ है? हम जानकारी लेने के लिए बैंक गए थे, लेकिन बैंक अधिकारी कह रहे हैं कि सरकार ने हमारा पैसा वापस ले लिया है। मेरे गांव के किसी भी किसान को कोई राशि नहीं मिली है।......  आर एस राणा

बारिश सामान्य से 9 फीसदी कम होने के बावजूद खाद्यान्न का रिकार्ड 28.13 करोड़ अन उत्पादन का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ सीजन में देशभर में सामान्य से 9 फीसदी बारिश कम हुई थी, जिससे देश के कई राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार आदि ने कई जिलों में सूखा घोषित किया हुआ है। इसके बावजूद भी चालू फसल सीजन 2018-19 में देश में खाद्यान्न का रिकार्ड 28.13 करोड़ टन का उत्पादन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 2017-18 में 27.74 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में देश में चावल का रिकार्ड 11.56 करोड़ टन उत्पादन होने का अनुमान है जोकि फसल सीजन 2017-18 के दूसरे अनुमान 11.10 करोड़ टन से ज्यादा है। गेहूं का उत्पादन भी चालू रबी में रिकार्ड 991 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल गेहूं का 971 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
दलहन में चना और अरहर का उत्पादन अनुमान कम
मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक दालों का उत्पादन फसल सीजन 2018-19 में 240.2 लाख टन होने का अनुमान है जोकि फसल सीजन 2017-18 के दूसरे अग्रिम अनुमान 239.5 लाख टन से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना का उत्पादन चालू रबी में घटकर 103.2 लाख टन ही होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के दूसरे अग्रिम अनुमान 111 लाख टन से कम है। अरहर का उत्पादन भी पिछले साल के 40.2 लाख टन से घटकर 36.8 लाख टन होने का अनुमान है। उड़द का उत्पादन चालू फसल सीजन 2018-19 के दूसरे अग्रिम अनुमान में बढ़कर 33.6 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 32.3 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। इसी तरह से मूंग का उत्पादन भी पिछले साल के 17.4 लाख टन से बढ़कर 24.1 लाख अन होने का अनुमान है। मसूर का उत्पादन चालू रबी में 15.3 लाख टन होने का अनुमान है।
ज्वार के साथ ही बाजरा के उत्पादन घटने की आशंका
मोटे अनाजों में ज्वार का उत्पादन चालू फसल सीजन 2018-19 के दूसरे अग्रिम अनुमान में घटकर 37.5 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल मोटे अनाजों का उत्पादन 46.6 लाख टन का हुआ था। बाजरा का उत्पादन भी पिछले साल के 92.6 लाख टन से घटकर 74.6 लाख टन ही होने का अनुमान है। मक्का का उत्पादन चालू फसल सीजन में 278 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल देश में 271.4 लाख टन का उत्पादन ही हुआ था। जौ का उत्पादन चालू रबी में घटकर 19.2 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 19.9 लाख टन का हुआ था।
सरसों, सोयाबीन का उत्पादन अनुमान ज्यादा, मूंगफली का कम
दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में तिलहन का उत्पादन बढ़कर 315.02 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल देश में 298.82 लाख टन का उत्पादन हुआ था। तिलहन की प्रमुख फसल सरसों का उत्पादन चालू रबी में पिछले साल के 75.40 लाख टन से बढ़कर 83.97 लाख टन होने का अनुमान है। इसी तरह से सोयाबीन का उत्पादन भी चालू फसल सीजन 2018-19 के दूसरे अग्रिम अनुमान में बढ़कर 136.89 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 113.90 लाख टन का उत्पादन हुआ था। मूंगफली का उत्पादन जरुर पिछले साल के 82.17 लाख टन से घटकर 69.70 लाख टन ही होने का अनुमान है। 
कपास के साथ गन्ने का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कपास का उत्पादन चालू फसल सीजन में 315.02 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलोग्राम) होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 298.82 लाख गांठ से ज्यादा है। गन्ने का उत्पादन पिछले साल के 3,532.25 लाख टन से बढ़कर चालू फसल सीजन 2018-19 में बढ़कर 3,808.34 लाख टन होने का अनुमान है।.....  आर एस राणा