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26 नवंबर 2025

राजस्थान में रबी फसलों की बुआई 73 फीसदी पूरी, चना के साथ ही सरसों की बढ़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में राजस्थान में 73 फीसदी क्षेत्रफल में फसलों की बुवाई हो चुकी  है। चना के साथ ही सरसों एवं गेहूं की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 20 नवंबर तक राज्य में रबी फसलों की बुआई 88.24 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 78.67 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। चालू रबी सीजन में राज्य में 120.15 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में तय लक्ष्य की 73 फीसदी बुआई पूरी हो चुकी है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में बढ़कर 33.72 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 32.04 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 32.50 लाख हेक्टेयर में, तारामीरा की 1.12 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले रबी की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 31.21 लाख हेक्टेयर और 73,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई राज्य में चालू रबी सीजन में बढ़कर 19.90 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 17.55 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी। अन्य रबी दलहन की बुआई 22 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 29 हजार हेक्टेयर की तुलना में कम है।

चालू रबी सीजन में राज्य में गेहूं की बुआई बढ़कर 21.74 लाख हेक्टेयर में और जौ की बुआई 3 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 14.81 लाख हेक्टेयर एवं 2.41 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में पीली मटर एवं मसूर तथा अरहर का आयात घटा, उड़द का बढ़ा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान पीली मटर के आयात में 66 फीसदी की, मसूर के आयात में 49 फीसदी की एवं अरहर के आयात में 28 फीसदी की कमी आई है। हालांकि इस दौरान उड़द के आयात में 0.81 फीसदी की हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई।


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 202-26 के पहली छमाही अप्रैल-25 से सितंबर-26 के दौरान पीली मटर का आयात 66 फीसदी घटकर 3,42,082 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 10,16,191 टन का हुआ था।

इसी तरह से चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहली छमाही में मसूर का आयात 49 फीसदी घटकर 2,28,253 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 4,45,591 टन का हुआ था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान अरहर का आयात 28 फीसदी घटकर 3,97,264 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 5,53,695 टन का हुआ था।

व्यापारियों के अनुसार चेन्नई में लेमन अरहर के भाव 725 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ है, जबकि हाजिर बाजार में इसके दाम 6,550 रुपये प्रति क्विंटल है। अत: इन भाव में आयातकों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की डिस्पैरिटी का सामना करना पड़ रहा है।

चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान उड़द का आयात 0.81 फीसदी बढ़कर 3,99,612 टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 3,96,391 टन का ही हुआ था।

जानकारों के अनुसार चेन्नई में उड़द एसक्यू के भाव 810 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हैं, जबकि हाजिर बाजार में इसके दाम 7,325 रुपये प्रति क्विंटल है। अत: इन भाव में आयातकों को 75 रुपये प्रति क्विंटल की डिस्पैरिटी का सामना करना पड़ रहा है।

कृषि मंत्रालय के अंतिम अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के दौरान देश में दालों का उत्पादन बढ़कर 256.8 लाख टन का हुआ था, जोकि इसके पिछले फसल सीजन की समान अवधि के 242.5 लाख टन की तुलना में ज्यादा है।

अक्टूबर में कैस्टर तेल का निर्यात 5.20 फीसदी बढ़ा - एसईए



नई दिल्ली। अक्टूबर में देश से कैस्टर तेल का निर्यात 5.20 फीसदी बढ़कर 50,485 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसका निर्यात केवल 47,950 टन का ही हुआ था।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार मूल्य के हिसाब से अक्टूबर में कैस्टर तेल का निर्यात 694.82 करोड़ रुपये का हुआ है, जो कि पिछले साल अक्टूबर के 598.41 करोड़ रुपये की तुलना में ज्यादा है।

एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 7 महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 398,985 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात 436,595 टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 7 महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान मूल्य के हिसाब से कैस्टर तेल का निर्यात 5,315.28 करोड़ रुपये का हुआ है।

गुजरात में गुरुवार को कैस्टर सीड के भाव 1,330 से 1,360 रुपये प्रति 20 किलो पर स्थिर हो गए, जबकि दैनिक आवक 30 हजार बोरियों (1 बोरी=75 किलोग्राम) की हुई। राजकोट में कैस्टर तेल कमर्शियल के दाम 2 रुपये कमजोर होकर 1,373 रुपये प्रति 10 किलो रह गए, जबकि एफएसजी के दाम 1,385 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए। राजस्थान में कैस्टर सीड की  आवक 5,000 बोरियों और सीधी मिलो में 3,000 बोरियों की आवक हुई।

व्यापारियों के अनुसार हाल ही में कैस्टर सीड के दाम तेज हुए, जिस कारण उत्पादक मंडियों में इसकी दैनिक आवकों में बढ़ोतरी हुई है।

कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के दौरान कैस्टर सीड का उत्पादन 17.30 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जोकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान उत्पादन 19.59 लाख टन का हुआ था।

20 नवंबर 2025

केंद्र ने राजस्थान एवं आंध्र प्रदेश से खरीफ फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद को दी मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश और राजस्थान द्वारा भेजे गए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीफ फसलों की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से दोनों राज्यों के किसानों को कुल 9,700 रुपये करोड़ से अधिक का आर्थिक सहारा मिलेगा।


केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को उचित दाम और आय स्थिरता देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंज़ूर किए गए प्रस्ताव खरीफ सीजन के लिए किसानों को बड़ा राहत पैकेज प्रदान करेंगे।

राजस्थान से केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की रिकॉर्ड स्तर पर खरीद की अनुमति दी है। इसके तहत राज्य से 3,05,750 टन मूंग एवं 1,68,000 टन उड़द के अलावा 5,54,750 टन मूंगफली तथा 2,65,750 टन सोयाबीन की खरीद को मंजूरी दी गई है।

राजस्थान से समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की खरीद के लिए 9,436 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा। राज्य में पीओएस, आधारित सत्यापन, आधार-लिंक्ड डीबीटी भुगतान और खरीद प्रबंधन की तैयारी पहले से पूरी कर ली गई है ताकि किसानों को भुगतान तुरंत मिल सके।

इसी तरह से आंध्र प्रदेश से केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत 37,273 टन मूंगफली की खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी कुल कीमत 270.71 रुपये करोड़ बैठती है। इसके अलावा 97,887 टन प्याज की एमआईएस स्कीम के तहत खरीद को भी स्वीकृति दी गई है, जिसका मूल्य 24.47 रुपये करोड़ है। केंद्र एवं राज्य एजेंसियां इन खरीद कार्यों को पूरा करेंगी।

केंद्र सरकार का कहना है कि यह निर्णय किसानों को न्यायसंगत दाम, बाजार स्थिरता और सुरक्षित आय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे खरीद कार्य सुचारू रूप से संचालित करें ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के दौरान डीओसी का निर्यात 3 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले सात महीनें अप्रैल से अक्टूबर के दौरान डीओसी के निर्यात में 3 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 2,464,303 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 2,388,327 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अक्टूबर में डीओसी के निर्यात में 21 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 371,235 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसका निर्यात 305,793 टन का ही हुआ था।

भारत सरकार ने अधिसूचना संख्या 37/2025-26 दिनांक 3 अक्टूबर, 2025 को डी-ऑयल राइस ब्रान के निर्यात पर प्रतिबंध हटा लिया है, जिसके परिणामस्वरूप निर्यात फिर से शुरू हो गया है और अक्टूबर 2025 के दौरान वियतनाम और नेपाल को 14,589 टन डी-ऑयल राइस ब्रान का निर्यात किया गया।

चीन से भारी मांग के कारण सरसों डीओसी का निर्यात बढ़ा है और अप्रैल से अक्टूबर 2025 के दौरान इसका निर्यात बढ़कर 581,823 टन का हुआ है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 14,886 टन का ही हुआ था। हाल ही में कुछ नई कंपनियों ने भारतीय निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) के माध्यम से जीएसीसी, चीन से संपर्क कर अपनी कंपनियों को चीन को सरसों डीओसी के निर्यात की अनुमति मांगी है। वर्तमान में भारतीय सरसों डीओसी की कीमत 217 अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है, जबकि हैम्बर्ग एक्स-मिल में सरसों डीओसी की कीमत 244 अमेरिकी डॉलर है।

पिछले दो वर्षों में मूंगफली के उत्पादन में वृद्धि के कारण इसकी पेराई में वृद्धि हुई है और मूंगफली डीओसी के निर्यात को बढ़ावा मिला है। अक्टूबर 2025 में देश से 19,300 टन मूंगफली डीओसी का निर्यात किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 7,823 टन मूंगफली डीओसी का निर्यात हुआ था। एसईए के फसल सर्वेक्षण के अनुसार, गुजरात में खरीफ मूंगफली की खेती का क्षेत्रफल पिछले वर्ष के 19.09 लाख हेक्टेयर से लगभग 3.0 लाख हेक्टेयर बढ़कर 22.02 लाख हेक्टेयर हो गया है और मूंगफली का उत्पादन 46.07 लाख टन अनुमानित है। पूरे भारत में मूंगफली की बुवाई का कुल क्षेत्रफल पिछले वर्ष के 49.96 लाख हेक्टेयर से 1.60 लाख हेक्टेयर कम होकर 48.36 लाख हेक्टेयर का गया।

भारतीय बंदरगाह पर अक्टूबर में सोया डीओसी का भाव कमजोर होकर 387 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि सितंबर में इसका दाम 398 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान सरसों डीओसी का मूल्य अक्टूबर में भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 211 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि सितंबर में इसका भाव 198 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान कैस्टर डीओसी का दाम सितंबर के 101 डॉलर प्रति टन से कमजोर होकर अक्टूबर में 99 डॉलर प्रति टन रह गया।

चालू रबी में गेहूं एवं दलहन के साथ ही तिलहनी फसलों की बुआई बढ़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार 14 नवंबर तक देशभर में रबी फसलों की कुल बुआई 208.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 188.73 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी।


रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 66.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 56.55 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 52.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 48.93 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 37.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 34.04 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 6.83 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 4.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 6.08 लाख हेक्टेयर में और 4.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 66.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 62.93 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 64.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी जबकि पिछले साल इस समय तक 60.52 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 7.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 6.82 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 15.53 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 13.50 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 8.82 लाख हेक्टेयर और मक्का की 4.26 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 8.21 और 3.63 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 1.83 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.22 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

शुरूआती चरण में चीनी का उत्पादन 48 फीसदी बढ़ा, 325 मिलों में पेराई आरंभ

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2025-26 (अक्टूबर से सितंबर) में अभी तक 10.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 7.10 लाख टन की तुलना में 47.88 फीसदी अधिक है।


राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के अनुसार देशभर में 325 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 144 मिलों में ही पेराई आरंभ हुई थी।

चालू पेराई सीजन 2025-26 में अभी मिलों ने 128 लाख टन गन्ने की पेराई की है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 91 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान गन्ने में औसत चीनी की रिकवरी दर 8.2 फीसदी आई है जोकि पिछले वर्ष की समान अवधि के 7.80 फीसदी के मुकाबले ज्यादा है।

देश में गन्ने का नया पेराई सीजन पहली अक्टूबर से शुरू होता है लेकिन इस वर्ष, यह देखा गया है कि मानसूनी बारिश अक्टूबर एवं महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में नवंबर तक जारी रही थी। जानकारों के अनुसार मानसून की वापसी में देरी हुई। साथ ही महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हुई बेमौसम भारी बारिश के कारण सोयाबीन, ज्वार, दालें, मक्का, सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ। अत: खेतों में खड़े गन्ने का वजन बढ़ने की उम्मीद के बावजूद, गीले खेतों के कारण समय पर कटाई नहीं हो पा रही है। इस स्थिति को देखते हुए, गन्ने के नए पेराई सत्र की शुरुआत में देरी हुई है। इसके अलावा, कर्नाटक और महाराष्ट्र में गन्ना मूल्य आंदोलन ने पूरे भारत में गन्ना पेराई को धीमा कर दिया। जानकारों के अनुसार पिछले गन्ना पेराई सीजन में भी देरी हुई थी, क्योंकि महाराष्ट्र में चुनावों थे। अत: गन्ने की पेराई पिछले सीजन में नवंबर के अंत तक शुरू हो पाई थी।

एनएफसीएसएफ के अनुसार नए पेराई सीजन में देरी से शुरुआत के बावजूद, देशभर में 350 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है। प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में लगभग 125 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 110 लाख टन और कर्नाटक में 70 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है। चालू पेराई सीजन में करीब 35 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमानित उपयोग इथेनॉल उत्पादन में होने की उम्मीद है।

देश में चीनी की सालाना खपत करीब 290 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू पेराई सीजन के आरंभ में लगभग 50 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: घरेलू बाजार में 20-25 लाख टन चीनी का स्टॉक कुल खपत के मुकाबले ज्यादा है। केंद्र सरकार ने निर्यात के लिए 15 लाख टन चीनी की अनुमति दी है। अत: केंद्र सरकार द्वारा समय पर की गई इस अग्रिम घोषणा से बाजार की धारणा को स्थिर करने में मदद मिलेगी।

जनवरी से अप्रैल 2026 तक के निर्यात अवसर की अवधि केवल 2 महीने दूर है तथा जानकारों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार चालू पेराई सीजन के मध्य तक और भी करीब 10 लाख की अनुमति दे सकती है। इससे चीनी मिल मालिकों को आंशिक रूप से राहत मिलेगी, जो पिछले 6 वर्षों से चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में संशोधन न होने और पिछले 3 वर्षों से इथेनॉल खरीद मूल्यों के स्थिर रहने के कारण अर्ध-मंदी की स्थिति में हैं।