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28 सितंबर 2019

बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान की आशंका, उत्तर भारत में तेज बारिश का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। मानसून की विदाई के समय बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार अगले 24 घंटों में बिहार, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा गुजरात रीजन में तेज बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणाा, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कहीं मध्यम तो कहीं भारी बारिश होने का अनुमान है। चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और सौराष्ट्र तथा कच्छ में भी बारिश होने की संभावना है।
उत्तर भारत के राज्यों में खरीफ की प्रमुख फसल धान के साथ ही बाजरा और ज्वार एवं दलहन और तिलहन की कटाई चल रही है जबकि कपास की पिकिंग जोरो पर है। मौसम की विदाई के समय होने वाली बारिश से फसलों की कटाई तो प्रभावित होगी ही, साथ ही भारी बारिश से फसल की क्वालिटी और उत्पादकता में भी कमी आयेगी।
मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान, बिहार, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, असम और गुजरात के हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान सौराष्ट्र व कच्छ, दक्षिणी राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, ओडिशा, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, तटीय कर्नाटक, केरल तथा कोंकण व गोवा के अलग-अलग स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। देश के बाकी हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर मध्यम बारिश के आसार हैं।
देशभर में सामान्य से 6 फीसदी ज्यादा हुई है बारिश
मौसम विभाग के अनुसार चालू खरीफ सीजन पहली जून से 26 सितंबर तक देशभर में सामान्य से 6 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। इस दौरान मध्य भारत के राज्यों में सामान्य से 25 फीसदी और दक्षिण भारत के राज्यों में सामान्य से 16 फीसदी बारिश ज्यादा बारिश हुई है। इस दौरान पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में सामान्य से 16 फीसदी कम और उत्तर पश्चिम भारत के राज्यों में सामान्य से 8 फीसदी कम बारिश हुई है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में चालू खरीफ में सामान्य से 43 फीसदी, पश्चिम उत्तर प्रदेश में सामान्य से 29 फीसदी और उत्तराखंड में सामान्य से 24 फीसदी कम बारिश हुई है। पंजाब में इस दौरान सामान्य से 11 फीसदी और हिमाचल प्रदेश में 16 फीसदी बारिश कम हुई है।
देश के कई राज्यों में भारी बारिश से आई बाढ़
आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में अभी मध्य महाराष्ट्र में बारिश सामान्य से 57 फीसदी और पश्चिम मध्य प्रदेश में 58 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। भारी बारिश से इन राज्यों के कई जिलों में बाढ़ से खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है। मध्य प्रदेश राज्य सरकार के अनुसार भारी बारिश और बाढ़ से करीब 24 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है, राज्य के 36 जिलों में बाढ़ से राज्य के 22 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। पूर्वी राजस्थान में भी चालू खरीफ में सामान्य से 48 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश के पूर्वी और मध्य भागों में हुई भारी बारिश
स्काईमेट के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के पूर्वी और मध्य भागों में भारी से मूसलाधार बारिश रिकॉर्ड हुई है। गुजरात, कोंकण व गोवा, तेलंगाना, तटीय कर्णाटक, विदर्भ, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के हिस्सों में भी हल्की से मध्यम मॉनसून की बारिश देखने को मिली। पूर्वोत्तर भारत, छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और लक्षद्वीप के हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर पिछले 24 घंटों में हल्की से मध्यम बारिश देखी गई। देश के बाकी हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर मध्यम बारिश दर्ज हुई है।............ आर एस राणा

उत्तर प्रदेश सरकार समर्थन मूल्य पर एक लाख टन मक्का की करेगी खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार चालू खरीफ में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक लाख टन मक्का की खरीद करेगी। राज्य के 22 जिलों मक्का की खरीद 15 अक्टूबर, 2019 से 15 जनवरी, 2020 तक की जायेगी।
राज्य के कृषि निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया चालू खरीफ में राज्य से समर्थन मूल्य पर एक लाख टन मक्का की खरीद का निर्णय किया है। उन्होंने बताया अक्टूबर में मक्का की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में बढ़ेगी, इसलिए मक्का की खरीद 15 अक्टूबर से शुरू की जायेगी। चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए केंद्र सरकार ने मक्का का एमएसपी 1,760 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले खरीफ सीजन की तुलना में इसमें 60 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
राज्य के 22 जिलों से होगी खरीद
उन्होंने बताया कि मक्का की खरीद राज्य के 22 जिलों अलीगढ़, फिरोजाबाद, कन्नौज, एटा, मैनपुरी, कासगंज, बदायूं, बहराइच, फर्रूखाबाद, इटावा, हरदोई, कानपुर नगर, जौनपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, गोण्डा, बलिया, बुलन्दशहर, ललितपुर, श्रावस्ती, हापुड़ एवं देवरिया में की जाएगी। मक्का बेचने से पहले किसान का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि मक्का की ढुलाई के लिए किसान को 20 रुपये प्रति क्विंटल का अलग से भुगतान किया जायेगा। किसानों से मक्का की खरीद जोतबही-खाता नंबर अंकित कम्प्यूटराइज खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र, तथा आधार कार्ड के आधार पर की जाएगी। किसानों को मक्का के मूल्य का भुगतान सीधे उनके खाते में आनलाइन आरटीजीएस के माध्यम से 72 घण्टे के अन्दर किया जाएगा।
राज्य में मक्का की बुआई ज्यादा
उन्होंने बताया कि चालू खरीफ में राज्य में मक्का की बुआई 7.38 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले खरीफ सीजन में 7.36 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। खरीफ सीजन में मक्का का उत्पादन मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में सबसे ज्यादा होता है। देशभर में खरीफ सीजन में मक्का का उत्पादन 198.8 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के चौथे अनुमान 190.4 लाख टन से ज्यादा है।............. आर एस राणा

विश्व बाजार में कीमतें नीचे होने के कारण कपास के निर्यात सौदे कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में कपास के दाम उंचे बने हुए हैं, जबकि विश्व बाजार में कीमतें कम है इसलिए कपास के निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे हैं। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू होने वाले कपास सीजन के अभी तक केवल 2.5 से 3 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलोग्राम) के ही अगाउ सौदे हुए हैं जबकि पिछले साल सीजन शुरू होने से पहले ही सात से आठ लाख गांठ के निर्यात सौदे हो चुके थे।
कमल कॉटन ट्रेडर्स प्रा. लिमिटेड के डायरेक्टर राकेश राठी ने बताया कि घरेलू बाजार में कीमतें उंची है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें नीचे बनी हुई है। इसीलिए निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय कपास के भाव विश्व बाजार में करीब 77 सेंट प्रति पाउंड है जबकि ब्राजील और अमेरिका की कपास के भाव कम हैं। न्यूयार्क कॉटन वायदा में दिसंबर वायदा का भाव बुधवार को 60.40 सेंट प्रति पाउंड रहे। बंगलादेश के साथ वियतनाम द्वारा ही इस समय कपास के आयात सौदे किए गए हैं।
अगले महीने बढ़ेगी कपास की दैनिक आवक
उन्होंने बताया कि उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मंडियों में 20 से 22 हजार गांठ कपास की आवक हो रही है। उत्पादक मंडियों में बुधवार को कपास के भाव 3,850 रुपये प्रति मन (एक मन-37.25 किलो) रहे। गुजरात में नई कपास की आवक तो शुरू हुई है लेकिन आवकों का दबाव अगले महीने में ही बनेगा। ऐसे में अक्टूबर में कपास की कीमतों में मंदा आने का अनुमान है। हालांकि मंदा कॉटन कारर्पोरेशन आफ इंडिया (सीसीआई) की खरीद पर भी निर्भर करेगा। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म की कपास का भाव 41,500 रुपये और नई कपास का भाव 39,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) है।
सीसीआई की 100 लाख गांठ खरीद की योजना
सीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए सीजन में कपास की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आई तो खरीद शुरू की जायेगी। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू होने वाले सीजन में 100 लाख गांठ खरीद करने की योजना है, जबकि चालू सीजन में केवल 10 लाख गांठ कपास की ही खरीद एमएसपी पर की थी।
कपास का उत्पादन अनुमान ज्यादा
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए मीडियम स्टेपल कपास का एमएसपी 5,255 रुपये और लॉन्ग स्टेपल कपास का एमएसपी 5,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। कृषि मंत्रालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार कपास का उत्पादन चालू खरीफ में बढ़कर 322.67 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन केवल 287.08 लाख गांठ का ही हुआ था।.....  आर एस राणा

उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर किसानों का 5,500 करोड़ से ज्यादा है बकाया

आर एस राणा
नई दिल्ली। गन्ने का नया पेराई सीजन पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हो जायेगा जबकि अभी भी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर किसानों का 5,587 करोड़ रुपये बकाया है। रबी फसलों की बुआई का सीजन अगले महीने से शुरू हो रहा है, ऐसे में बकाया भुगतान नहीं मिलने से किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक और डीजल की खरीद के लिए आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने चालू पेराई सीजन में किसानों से 33,048 करोड़ रुपये का 10,296.31 क्विंटल गन्ना खरीदा था, जिसमें से 20 सितंबर तक भुगतान केवल 27,460 करोड़ रुपये का ही किया है। अत: अभी भी राज्य की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 5,587 करोड़ रुपये बकाया है। तय मानकों के अनुसार चीनी मिलों को गन्ने की खरीद के 14 दिनों के अंदर किसानों को भुगतान करना होता है। राज्य की चीनी मिलों में पेराई बंद हुए महीनेभर से ज्यादा हो चुका है तथा सप्ताहभर बाद नया पेराई सीजन शुरू हो जायेगा।
बकाया में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी प्राइवेट चीनी मिलों पर
बकाया भुगतान में सबसे ज्यादा राज्य की 92 प्राइवेट चीनी मिलों पर 5,195 करोड़ रुपये तथा 24 कोआपरेटिव चीनी मिलों पर 458 करोड रुपये तथा निगम की तीन चीनी मिलों पर भी 33.86 करोड़ रुपये बकाया है। पेराई सीजन 2017-18 का भी राज्य की चीनी मिलों पर 40.54 करोड़ रुपये और पेराई सीजन 2016-17 का 22.29 करोड़ रुपये बचा हुआ है।
बकाया भुगतान नहीं होने से किसान परेशान
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के देहराचक गांव के गन्ना किसान जोगिंद्र आर्य ने आउटलुक को बताया कि वेव शुगर मिल में गन्ने की पेराई मई के पहले सप्ताह में बंद हो गई थी, जबकि अभी भी मेरा 75,000 रुपये का भुगतान मिल पर बकाया है। उन्होंने बताया कि बकाया के साथ ही उन्हें पांच महीने का ब्याज भी मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि अगले महीने से गेहूं और अन्य रबी फसलों की बुआई शुरू करनी है लेकिन चीनी मिलों द्वारा बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में हमें मजबूरन साहूकारों से उंची दर पर उधार लेना पड़ेगा। ............  आर एस राणा

खरीफ में खाद्यान्न का उत्पादन घटकर 14.05 करोड़ टन होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में बारिश और बाढ़ से खरीफ फसलों का उत्पादन घटकर 14.05 करोड़ टन ही होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 14.17 करोड़ टन से कम है। खरीफ में चावल के साथ ही दलहन के उत्पादन में कमी आने का अनुमान है जबकि तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों का उत्पादन अनुमान ज्यादा है।
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 खरीफ में चावल का उत्पादन 10.03 करोड़ टन ही होने का अनुमान है जोकि फसल सीजन 2018-19 के चौथे अनुमान के 10.21 करोड़ टन से कम है। इसी तरह से दालों का उत्पादन आरंभिक अनुमान के अनुसार खरीफ में घटकर 82.3 लाख टन ही होने का अनुमान है। फसल सीजन 2018-19 के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार खरीफ में दालों का उत्पादन 85.9 लाख टन का उत्पादन हुआ था। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का उत्पादन 35.4 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 35.9 लाख टन का उत्पादन हुआ था। खरीफ में उड़द का उत्पादन 24.3 लाख टन और मूंग का उत्पादन 14.2 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ में 25.6 लाख टन उड़द और 18.4 लाख टन मूंग का उत्पादन हुआ था।
मोटे अनाजों में बाजरा का कम, मक्का का ज्यादा होने की उम्मीद
मोटे अनाजों में बाजरा का उत्पादन चालू खरीफ में 82.9 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2018—19 के चौथे अनुमान के अनुसार बाजरा का उत्पादन 86.1 लाख टन का हुआ था। खरीफ में मक्का का उत्पादन 198.8 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के चौथे अनुमान 190.4 लाख टन से ज्यादा है। ज्वार का उत्पादन चालू खरीफ में बढ़कर 18.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 17.4 लाख टन का हुआ था।
तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी का अनुमान
खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन का उत्पादन चालू खरीफ सीजन में 135.05 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2018-19 के चौथे अनुमान के अनुसार उत्पादन 137.86 लाख टन का हुआ था। हालांकि तिलहन का कुल उत्पादन खरीफ सीजन 2019-20 में 223.89 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 212.78 लाख टन से ज्यादा है। खरीफ में मूंगफली का उत्पादन पिछले साल के 53.63 लाख टन से बढ़कर 63.11 लाख टन होने का अनुमान है। केस्टर सीड का उत्पादन पिछले साल के 12.15 लाख टन से बढ़कर 17.37 लाख टन होने का अनुमान है। शीसम का उत्पादन पिछले साल के 7.55 लाख टन से बढ़कर 6.86 लाख टन होने का अनुमान है।
कपास का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कपास का उत्पादन चालू खरीफ में बढ़कर 322.67 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलोग्राम) होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन केवल 287.08 लाख गांठ का ही हुआ था। गन्ने का उत्पादन पिछले साल के 4,001.57 क्विंटल से घटकर चालू खरीफ में 3,777.66 लाख क्विंटल ही होने का अनुमान है। .......... आर एस राणा

सस्ती दाल लेने में राज्यों की रूचि नहीं, 14 राज्य ही खरीद रहे हैं केंद्रीय पूल से

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्रीय पूल से सस्ती दालें लेने में राज्यों की रूचि कम है, स्कीम को शुरू हुए सालभर से ज्यादा हो चुक है लेकिन केवल 14 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश ही इन दालों की खरीद केंद्र सरकार से कर रहे हैं। केंद्र राज्य सरकारों को थोक मूल्य के मुकाबले 15 रुपये प्रति किलो सस्ती दर पर दालें मुहैया करा रही है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले साल अगस्त में केंद्र सरकार ने गरीबों बेचने देने का फैसला किया था, लेकिन राज्य सरकारों की रुचि कम होने के कारण 13 नवंबर 2019 तक राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने केवल 9.20 लाख टन दालों की खरीद ही की है जिसमें से 8.40 लाख टन दालों का राज्य उठाव राज्य सरकारें कर चुकी हैं।
देश के 14 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश ही ले रहे हैं दालें
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, गुजरात, केरल, दमन, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, नागालैंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत 14 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश द्वारा ही केंद्रीय पूल से दालों की खरीद की जा रही है। केंद्रीय पूल में दालों के बंपर स्टॉक को हल्का करने के लिए सरकार ने राज्य सरकारों को सस्ती दालें बेचने का फैसला किया था। उन्होंने बताया कि इन दालों का उपयोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब उपभोक्ताओं के साथ अन्य कल्याणकारी योजनाओं में किया जाना है। राज्य सरकारें आंगनबाड़ी और मिड-डे मील में इन सस्ती दालों का उपयोग कर सकती हैं।
केंद्रीय पूल में 38 से 39 लाख टन दालों का बकाया स्टॉक
उन्होंने बताया कि खरीफ 2018 और रबी 2019 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 19.45 लाख टन 10.540 करोड़ रुपये मूल्य की दालों की खरीद की गई थी। इसमें सबसे ज्यादा 7.76 लाख टन चना, 4.92 लाख टन उड़द, 3.29 लाख टन मूंग और 2.41 लाख टन अरहर के अलावा 0.56 लाख टन मसूर थी। इसके पिछले खरीफ सीजन 2017-18 और रबी 2019 में समर्थन मूल्य पर 45.53 लाख टन दालों की खरीद की गई थी। केंद्रीय पूल में 38 से 39 लाख टन दालों का स्टॉक बकाया है जबकि खरीफ विपणन सीजन 2019 में एमएसपी पर दालों की खरीद तमिलनाडु से शुरू हो चुकी है। अन्य राज्यों से भी इसकी खरीद जल्द शुरू हो जायेगी।
उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में दालों का उत्पादन 234 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि इसके पिछले साल 254.2 लाख टन का उत्पादन हुआ था।.............  आर एस राणा

20 सितंबर 2019

पीएम-किसान योजना में लाभार्थी स्वयं कर सकेगा रजिस्ट्रेशन

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) में जल्द ही लाभार्थी स्वयं रजिस्ट्रशन कर सकेंगे। रजिस्ट्रेशन के साथ ही लाभार्थी इस योजना के तहत मिलने वाली किस्त की जांच भी कर सकेंगे। यह सुविधा लाभार्थी को कॉमन सर्विस सेंटर (केसीसी) के माध्यम से मिलेगी।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए सरकार ने पीएम-किसान योजना पोटर्ल को सुगम बनाने का फैसला किया है। लाभार्थी इस योजना के लिए केसीसी के माध्यम से स्वयं रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे, तथा खाते में पैसे आए या नहीं इसकी भी जांच कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि अक्टूबर से रबी फसलों की बुआई का सीजन शुरू हो जाएगा, साथ ही त्यौहारी सीजन भी शुरू हो रहा है। इसलिए जिन लाभार्थियों को दूसरी और तीसरी किस्त का भुगतान नहीं हुआ है, उन्हें जल्द भुगतान किया जायेगा।
कुल लाभार्थियों का 64 फीसदी ही हुआ है रजिस्ट्रेशन
उन्होंने बताया कि देशभर के 13.32 करोड़ किसान पीएम-योजना के दायरे में आते हैं तथा अभी तक 8.56 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन ही हुआ है। यह कुल लाभार्थियों का 64 फीसदी है। पश्चिम बंगाल और लक्षद्वीप के किसानों का डेटा अभी तक मंत्रालय को मिला नहीं है। उन्होंने बताया कि पीएम किसान योजना की पहली किस्त देश के 6.54 करोड़ किसानों को मिली है, जबकि दूसरी किस्त केवल 3.83 करोड़ और तीसरी किस्त 1.41 करोड़ किसानों को मिली है।
राज्यों से एक सप्ताह में लाभार्थियों की लिस्ट मांगी
उन्होंने बताया कि राज्य सरकारों को लाभार्थियों की लिस्ट भेजने के लिए सप्ताहभर का समय दिया गया है। सभी लाभार्थियों को आधार से जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि अक्टूबर के शुरू में रजिस्ट्रेशन को चुके किसानों को बची हुई दूसरी और तीसरी किस्त का भुगतान हो जायेगा।
सरकार ने लोकसभा चुनाव 2019 से पहले फरवरी में पेश किए गए अंतरिम बजट में किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का ऐलान किया था। इस योजना के तहत किसानों को एक साल में तीन समान किस्तों में 6,000 रुपये दिए जा रहे हैं। योजना को 1 दिसंबर 2018 से लागू किया था। दिसंबर से मार्च के बीच पहली किस्त, अप्रैल से जुलाई के बीच दूसरी किस्त का भुगतान किया गया है। अगस्त से नवंबर के बीच तीसरी किस्त का भुगतान किया जाना है।........ आर एस राणा